कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

मशरूम की खेती

रबी गेंहू कठिया (डयूरम) गेहूँ की खेती जौ जई तोरिया (लाही) राई और सरसों पीली सरसों अलसी कुसुम रबी मक्का शिशु मक्का (बेबी कॉर्न) की खेती चना मटर मसूर रबी राजमा बरसीन रबी शाकभाजी एवं मसाला फसलों के प्रभावी बिन्दु बोरो धान की खेती आलू उत्पादन की तकनीकी प्रदेश में आलू उत्पादन हेतु प्रमुख प्रजातियाँ मशरूम की खेती सहफसली खेती कांस उंप मोथा का रसायनों द्वारा नियंत्रण संतुलित उर्वरक प्रयोग में नीम लेपित यूरिया का उपयोग एकीकृत पोषक तत्व प्रबन्धन कृषि उत्पादों में जैव उर्वरकों की महत्ता एवं उपयोग नादेव (नैडप) कम्पोस्ट जैविक कृषि में केंचुआ खाद जैविक कृषि में केंचुआ खाद रबी हेतु उपयोगी कृषि यंत्र बौछारी (स्प्रिंकलर) सिंचाई विधि रबी के मौसम में ऊसर सुधार कार्यक्रम जैविक एजेंट एवं जैविक कीटनाशकों के प्रयोग द्वारा कृषि रक्षा प्रबन्धन एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट) विभागीय कृषि रक्षा इकाइयों पर उपलब्ध फसल सुरक्षा रसायनों का नाम व मूल्य प्रतिबन्धित रसायनों की सूची प्रतिबंधित कीटनाशकों की सूची प्रमुख रसायनिक फसलों के आंकड़े उर्वरको की पहचान किसान काल सेन्टर मौन पालन एक लाभदायक व्यवसाय बीज उत्पादक कम्पनियों के नाम महत्वपूर्ण दूरभाष नम्बर

श्वेत वटन मशरूम की खेती शरद ऋतु में अक्टूबर से फरवरी तक

खेती की विधि

आधार सामग्री की तैयारी

मशरूम की खेती हेतु गेहूँ के भूसे को बोरे में रात भर के लिए साफ पानी में भिगो दिया जाता है यदि आवश्यक हो तो 7 ग्राम कार्बेन्डाइजिन (50 प्रतिशत) तथा 115 मिली0 फार्सलीन प्रति 100 लीटर पानी की दर से मिला दिया जाता है, इसके पश्चात भूसे को बाहर निकालकर अतिरिक्त पानी निथारकर अलग कर दिया जाता है और जब भूसे से लगभग 70 प्रतिशत नमी रह जाये तब यह बिजाई के लिए तैयार हो जाता है।

बिजाई

इसमें ढिंगरी मशरूम की तरह की बिजाई की जाती है परन्तु स्थान की मात्रा ढिंगरी मशरूम से दो गुनी (5-6 प्रतिशत) प्रयोग की जाती है तथा बिजाई करने के बाद थैलों में छिद्र नहीं बनाये जाते है। बिजाई के बाद तापक्रम 28-32 डिग्री होना चाहिये बिजाई के बाद इन थैलों को फसल कक्ष में रख देते है।

आवरण मृदा तैयार करना

विजाई के वी 20-25 दिन बाद फफूँद पूरे भूसे में सामान रूप से फैल जाती है, इसके बाद आवरण मृदा तैयार कर 2 से 3 इंच मोटी पर्त थैली के मुँह को खोलकर ऊपर समान रूप से फैला दिया जाता है इसके पश्चात पानी के फव्वारे से इस तरह आवरण मृदा के ऊपर सिचाई की जाती है कि पानी से आवरण मृदा की लगभग आधी मोटाई ही भीगने पाये आवरण मृदा लगाने के लगभग 20 से 25 दिन बाद आवरण मृदा के ऊपर मशरूम की बिन्दुनुमा अवस्था दिखाई देने लगती है। इस समय फसल का तापमान 32 से 35 तथा आर्द्रता 90 प्रतिशत से अधिक बनाये रखा जाता है अगले 3 से 4 दिन में मशरूम तोड़ाई योग्य हो जाती है।

उपज

सूखे भूसें के भार का 70 से 80 प्रतिशत उत्पादन प्राप्त होता है।

धान के पुआल का मशरूम (वालवेरियल्ला प्रजाति)

इस मशरूम को चाईनीज मशरूम तथा गर्मी का मशरूम भी कहा जाता है इसकी खेती सर्वप्रथम 1822 में चीन में शुरू हुई थी यह सबसे कम समय में तैयार होने वाला मशरूम है। भारत वर्ष में इसकी खेती प्रायः समुद्र तटीय राज्यों जैसे-पश्चिमी बंगाल, उड़ीसा, कर्नाटक, तमिलनाडु एवं आन्ध्र प्रदेश में की जाती है। वर्तमान में इसकी खेती देश के मैदानी भागों में प्रायः माह जुलाई से सितम्बर तक की जाती है।

मशरूम स्थान प्राप्त करने के स्रोत

मशरूम की खेती को करने के लिए गुणवत्तायुक्त स्थान अति आवश्यक है जिसके लिए निमन् स्त्रोतों से सम्पर्क किया जा सकता है।

  • पादप रोग विज्ञान विभाग, चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्यौगिक विश्वविद्यालय, कानपुर।
  • पादप रोग विज्ञान विभाग, गोविन्द वल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्यौगिक विश्वविद्यालय, पन्तनगर, उधम सिंह नगर, उत्तराखंड।
  • पादप रोग विज्ञान विभाग, राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय उदयपुर, राजस्थान।
  • पादप रोग विज्ञान विभाग, महात्मा फूले कृषि विद्यापीठ पूना महाराष्ट्र।
  • पादप रोग विज्ञान विभाग, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार, हरियाणा।

मशरूम प्रशिक्षण

मशरूम उत्पादन में प्रशिक्षण एक महत्वपूर्ण अंग है क्योकि बिना प्रशिक्षण प्राप्त किये कोई व्यक्ति मशरूम का सफलता पूर्वक उत्पादन नहीं कर सकता है, सभी सामग्री का सही मात्रा में प्राप्त करने सम्बन्धितत जानकारी हेतु निम्न केन्द्रो से सम्पर्क किया जा सकता है।

  • राष्ट्रीय खुम्ब अनुसंधान केन्द्र, बम्बाघाट सोलन, हिमाचल प्रदेश।
  • पादप रोग विज्ञान विभाग चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्यौगिक विश्वविद्यालय, कानपुर-208002 उ.प्र. अखिल भारतीय समन्वित मशरूम विकास परियोजना के अन्तर्गत कुछ राज्यों से भी प्रशिक्षण कार्य चलाया जारहा है जो निम्न है।
    • पादप रोग विज्ञान विभाग इन्दिरा गांधी कृषि विश्वविद्यायल रायपुर, छत्तीसगढ़।
    • पादप रोग विज्ञान विभाग, आई.आई.एच.आर. बंगलौर, कर्नाटक।
    • उद्यान विभाग, मेघालय, शिलांग।
    • उद्यान निदेशालय, लखनऊ उत्तर प्रदेश।
    • उद्यान निदेशालय, ईटा नगर, अरूणांचल प्रदेश।