कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

मटर

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भूमि:
मटर हेतु दोमट तथा हल्की दोमट भूमि अधिक उपयुक्त है।

भूमि की तैयारी:
प्रथम जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए।

संस्तुत प्रजातियाँ:
मटर की प्रजातियों का विवरण:

क्र. सं. प्रजातियाँ उत्पादकता (कु0/हे0) पकने की अवधि (दिन) उपयुक्त क्षेत्र विशेषतायें
1 रचना 20-25 130-135 सम्पूर्ण उ० प्र० लम्बे पौधे, सफेद बुकनी अवरोधी
2 इन्द्र (के.पी.एम.आर.-400) 30-32 125-130 बुन्देलखण्ड मध्यउ० प्र० बौने पौधे, दाने सफेद गोल बुकनी, अवरोधी
3 शिखा (के.एफ.पी.डी.-103) 25-30 125-130 तदैव पौधे लम्बे, दाने सफेद गोल
4 मालवीय मटर 2 20-25 125-130 पूर्वी उ० प्र० पौधे लम्बे दाने सफेद गोल, पर्णिल आसिता रोग प्रतिरोधी
5 मालवीय मटर 15 22-25 120-125 सम्पूर्ण उ० प्र० मध्यम बौने पौधे, सफेद बुकनी एवं रतुआ अवरोधी
6 जे.पी.-885 20-25 130-135 बुन्देलखण्ड हेतु -
7 पूसा प्रभात (डी.डी.आर.-23) 15-18 100-105 पूर्वी उ० प्र० बुकनी रोग अवरोधी
8 पन्त मटर 5 20-25 130-135 मैदानी क्षेत्र पौधे लम्बे, हल्के हरे, बुकनी रोग रोधी।
9 आदर्श (आईपीएफ 99-15) 23-25 130-135 बुंदेलखण्ड हेतु लम्बी, सफेद, बुकनी, अवरोधी।
10 विकास (आईपीएफडी 99-13) 22-25 100-105 तदैव बौनी, सफेद, बुकनी, अवरोधी।
11 जय (के.पी.एम.आर. 522) 32-35 125-130 पश्चिमी उ० प्र० बौनी, सफेद, बुकनी, अवरोधी।
12 सपना (के.पी.एम.आर. 144-1) 30-32 125-130 सम्पूर्ण उ० प्र० बौनी, सफेद, बुकनी रोगरोधी।
13 प्रकाश 28-32 110-115 बुन्देलखण्ड बौनी, सफेद, बुकनी रोगरोधी।
14 हरियाल 26-30 120-125 पश्चिमी उ० प्र० बौनी, हरे गोल दाने, सफेद बुकनी अवरोधी।
15 पालथी मटर 22-30 125-130 पूर्वी उ० प्र० पौधे लम्बे, गोल दाने, सफेद बुकनी एवं रतुआ अवरोधी।
16 आई.पी.एफ.डी. 10-12 25-30 106-109 बुन्देलखण्ड हरा रंग
17 पन्त पी-42 24-25 130-140 पश्चिमी उ० प्र०  
18 अमन (2009) 28-30 120-125 पश्चिमी उ० प्र० लम्बे  

बीज की मात्रा

80-100 किलोग्राम/हेक्टर लम्बे पौधे की प्रजातियों हेतु तथा बौनी प्रजातियों के लिए 125 किग्रा० प्रति हेक्टर।

बीजोपचार

मटर हेतु राइजोबियम, लेग्यूमिनोसेरम कल्चर का प्रयोग होता है।

बुवाई

अक्टूबर के मध्य से नवम्बर के मध्य तक बुवाई हल के पीछे 20 सेमी० (बौनी) 30 सेमी० (लम्बी प्रजाति) की दूरी पर करनी चाहिए। पन्तनगर जीरो टिल ड्रिल द्वारा मटर की बुवाई की जाती है।

बीज शोधन

बीज जनित रोग से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम या मैकोंजेब 3 ग्राम या 4 ग्राम ट्राइकोडरमा अथवा थीरम 2 ग्राम + कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीज को बोने से पूर्व शोधित करना चाहिए।

बीजशोधन कल्चर द्वारा उपचारित करने के पूर्व करना चाहिए। एक पैकेट (200 ग्राम) राइजोबियम कल्चर से 10 किलोग्राम बीज को उपचारित करके बोना चाहिए। पी.एस.बी. कल्चर का अवश्य प्रयोग करें।

उर्वरक

नत्रजन फास्फोरस पोटाश गन्धक मोलीबिडनम गोबर की खाद
20 किग्रा०/हे० 60 किग्रा०/हे० 40 किग्रा०/हे० 20 किग्रा०/हे० 1 किग्रा० 60 कु०/हे०

बौनी प्रजातियों के लिए 20 किग्रा० नत्रजन बुवाई के समय अतिरिक्त दिया जाये।

सिंचाई

जाड़े में वर्षा न हो तो फूल आने के समय एक सिंचाई करना चाहिए। दाना भरते समय दूसरी सिंचाई लाभप्रद होती है। स्प्रिंकलर (बौछारी) सिंचाई बुदेलखण्ड के लिए लाभकारी होगी।