कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

एग्रोक्लाइमेटिक जोनवार

एग्रोक्लाइमेटिक जोनवार
फसल का नाम:- बाजरा
  एग्रोक्लाइमेटिक जोनवार विभिन्न खरीफ फसलों की सघन पद्धतियाँ
  फसल का नामः बाजरा
क्र०सं०   1 1 2 3 4 5 6 7 8 9
एग्रोक्लाइमेटिक जोन का नाम   2 भावर एवं तराई क्षेत्र सहारनपुर‚ बिजनौर‚ रामपुर‚ मुरादाबाद‚ बरेली‚ पीलीभीत‚ लखीमपुर खीरी‚ बहराइच‚ श्रावस्ती। पश्चिमी मैदानी क्षेत्र गंगा जमुना दोआब के सहारनपुर‚मुजफ्फरनगर‚ मेरठ‚ गाजियाबाद‚ बुलन्दशहर‚ बागपत‚ गौतमबुद्धनगर मध्य पश्चिमी मैदानी क्षेत्र बिजनौर‚ मुरादाबाद‚ रामपुर‚ बरेली‚ पीलीभीत‚ शाहजहांपुर‚ बदायूं‚ ज्योतिबा फूले नगर दक्षिण पश्चिमी अर्द्धशुष्क क्षेत्रः आगरा तथा अलीगढ़ मण्डल के समस्त जनपद मध्य मैदानी क्षेत्र लखनऊ‚कानपुर‚ मंडलों के समस्त जनपद एवं इलाहाबाद मंडल के प्रतापगढ़ को छोड़कर शेष जनपद बुन्देलखण्ड क्षेत्र झांसी एवं चित्रकूट धाम मण्डलों के समस्त जनपद उत्तरी पूर्वी मैदानी क्षेत्रः गोण्डा‚ बहराइच‚ कुशीनगर‚बस्ती‚ देवरिया‚गोरखपुर‚महाराजगंज‚ सिद्धार्थनगर‚ बलरामपुर‚श्रावस्ती‚ सन्तकबीर नगर पूर्वी मैदानी क्षेत्रः बाराबंकी‚ फैजाबाद‚सुल्तानपुर‚अमेठी‚ प्रतापगढ़‚जौनपुर‚आजमगढ़‚वाराणसी‚चन्दौली‚मऊ‚बलिया‚अम्बेडकर नगर‚ संत रविदास नगर‚ गाजीपुर। विन्ध्य क्षेत्रः मिर्जापुर‚ इलाहाबाद‚सोनभद्र‚चन्दौली के पठारी भाग
संस्तुत प्रजातियां   3 संकरः पूसा-322‚ पूसा-23‚ आई०सी०एम०एच०-451 संकुलः आई०सी०एम०वी० 155‚डब्लू०सी०सी०-75‚ आई०सी०टी०पी०-8203‚राज-171 संकरः पूसा-322‚ पूसा-23‚ आई०सी०एम०एच०-451 संकुलः आई०सी०एम०वी० 155‚डब्लू०सी०सी०-75‚ आई०सी०टी०पी०-8203‚राज-171 संकरः पूसा-322‚ पूसा-23‚ आई०सी०एम०एच०-451 संकुलः आई०सी०एम०वी० 155‚डब्लू०सी०सी०-75‚ आई०सी०टी०पी०-8203‚राज-171 संकरः पूसा-322‚ पूसा-23‚ आई०सी०एम०एच०-451 संकुलः आई०सी०एम०वी० 155‚डब्लू०सी०सी०-75‚ आई०सी०टी०पी०-8203‚राज-171 संकरः पूसा-322‚ पूसा-23‚ आई०सी०एम०एच०-451 संकुलः आई०सी०एम०वी० 155‚डब्लू०सी०सी०-75‚ आई०सी०टी०पी०-8203‚राज-171 संकरः पूसा-322‚ पूसा-23‚ आई०सी०एम०एच०-451 संकुलः आई०सी०एम०वी० 155‚डब्लू०सी०सी०-75‚ आई०सी०टी०पी०-8203‚राज-171 संकरः पूसा-322‚ पूसा-23‚ आई०सी०एम०एच०-451 संकुलः आई०सी०एम०वी० 155‚डब्लू०सी०सी०-75‚ आई०सी०टी०पी०-8203‚राज-171 संकरः पूसा-322‚ पूसा-23‚ आई०सी०एम०एच०-451 संकुलः आई०सी०एम०वी० 155‚डब्लू०सी०सी०-75‚ आई०सी०टी०पी०-8203‚राज-171 संकरः पूसा-322‚444 पूसा-23‚ आई०सी०एम०एच०-451 संकुलः आई०सी०एम०वी० 155‚डब्लू०सी०सी०-75‚ आई०सी०टी०पी०-8203‚राज-171 नरेन्द्र देव बाजरा-3
भूमि की तैयारी   4 पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करनी चाहिए।
बुवाई का समय   5 जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक
बीज की मात्रा   6 4-5 किग्रा० प्रति हे० 4-5 किग्रा० प्रति हे० 4-5 किग्रा० प्रति हे० 4-5 किग्रा० प्रति हे० 4-5 किग्रा० प्रति हे० 4-5 किग्रा० प्रति हे० 4-5 किग्रा० प्रति हे० 4-5 किग्रा० प्रति हे० 4-5 किग्रा० प्रति हे०
उर्वरक की मात्रा किग्रा०/हे० नत्रजन 7 80 80 80 80 80 80 80 80 80
फास्फोरस 8 40 40 40 40 40 40 40 40 40
पोटाश 9 40 40 40 40 40 40 40 40 40
  सिंचाई 10 फूल आने पर यदि वर्षा न हो तो 1-2 सिंचाइयां करनी चाहिए। फूल आने पर यदि वर्षा न हो तो 1-2 सिंचाइयां करनी चाहिए। फूल आने पर यदि वर्षा न हो तो 1-2 सिंचाइयां करनी चाहिए। फूल आने पर यदि वर्षा न हो तो 1-2 सिंचाइयां करनी चाहिए। फूल आने पर यदि वर्षा न हो तो 1-2 सिंचाइयां करनी चाहिए। फूल आने पर यदि वर्षा न हो तो 1-2 सिंचाइयां करनी चाहिए। फूल आने पर यदि वर्षा न हो तो 1-2 सिंचाइयां करनी चाहिए। फूल आने पर यदि वर्षा न हो तो 1-2 सिंचाइयां करनी चाहिए। फूल आने पर यदि वर्षा न हो तो 1-2 सिंचाइयां करनी चाहिए।
फसल सुरक्षा बीज शोधन 11 1) 2.5 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बन्डाजिम प्रति किग्रा० बीज‚ 2) अरगट रोग से प्रभावित दानों को 20 प्रतिशत नमक से शोधित करके। 1) 2.5 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बन्डाजिम प्रति किग्रा० बीज‚ 2) अरगट रोग से प्रभावित दानों को 20 प्रतिशत नमक से शोधित करके। 1) 2.5 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बन्डाजिम प्रति किग्रा० बीज‚ 2) अरगट रोग से प्रभावित दानों को 20 प्रतिशत नमक से शोधित करके। 1) 2.5 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बन्डाजिम प्रति किग्रा० बीज‚ 2) अरगट रोग से प्रभावित दानों को 20 प्रतिशत नमक से शोधित करके। 1) 2.5 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बन्डाजिम प्रति किग्रा० बीज‚ 2) अरगट रोग से प्रभावित दानों को 20 प्रतिशत नमक से शोधित करके। 1) 2.5 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बन्डाजिम प्रति किग्रा० बीज‚ 2) अरगट रोग से प्रभावित दानों को 20 प्रतिशत नमक से शोधित करके। 1) 2.5 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बन्डाजिम प्रति किग्रा० बीज‚ 2) अरगट रोग से प्रभावित दानों को 20 प्रतिशत नमक से शोधित करके। 1) 2.5 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बन्डाजिम प्रति किग्रा० बीज‚ 2) अरगट रोग से प्रभावित दानों को 20 प्रतिशत नमक से शोधित करके। 1) 2.5 ग्राम थीरम या 2 ग्राम कार्बन्डाजिम प्रति किग्रा० बीज‚ 2) अरगट रोग से प्रभावित दानों को 20 प्रतिशत नमक से शोधित करके।
कीट/रोग नियंत्रण 12 कीट/रोग होना चाहिए। संस्तुत रसायनों से अवश्य करें। कीट/रोग होना चाहिए। संस्तुत रसायनों से अवश्य करें। कीट/रोग होना चाहिए। संस्तुत रसायनों से अवश्य करें। कीट/रोग होना चाहिए। संस्तुत रसायनों से अवश्य करें। कीट/रोग होना चाहिए। संस्तुत रसायनों से अवश्य करें। कीट/रोग होना चाहिए। संस्तुत रसायनों से अवश्य करें। कीट/रोग होना चाहिए। संस्तुत रसायनों से अवश्य करें। कीट/रोग होना चाहिए। संस्तुत रसायनों से अवश्य करें। कीट/रोग होना चाहिए। संस्तुत रसायनों से अवश्य करें।
जोनवार विभिन्न फसलों के लिए संक्षिप्त 13 -भूमि का जल निकास अच्छा होना चाहिए। - भूमि परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। - थिनिंग करना आवश्यक होता है। -भूमि का जल निकास अच्छा होना चाहिए। - भूमि परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। - थिनिंग करना आवश्यक होता है। -भूमि का जल निकास अच्छा होना चाहिए। - भूमि परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। - थिनिंग करना आवश्यक होता है। -भूमि का जल निकास अच्छा होना चाहिए। - भूमि परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। - थिनिंग करना आवश्यक होता है। -भूमि का जल निकास अच्छा होना चाहिए। - भूमि परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। - थिनिंग करना आवश्यक होता है। -भूमि का जल निकास अच्छा होना चाहिए। - भूमि परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। - थिनिंग करना आवश्यक होता है। -भूमि का जल निकास अच्छा होना चाहिए। - भूमि परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। - थिनिंग करना आवश्यक होता है। -भूमि का जल निकास अच्छा होना चाहिए। - भूमि परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। - थिनिंग करना आवश्यक होता है। -भूमि का जल निकास अच्छा होना चाहिए। - भूमि परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। - थिनिंग करना आवश्यक होता है।