कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

मिट्टी की जाँच

पौधों के सर्वांगीण विकास एवं वृद्धि के लिये उपर्युक्त सभी पोषक तत्वों की उपलब्धता आवश्यक है।

पोषक तत्वों की कमी के लक्षण

नाइट्रोजन

  • पौधों की बढवार रूक जाती है तथा तना छोटा एवं पतला हो जाता है।
  • पत्तियां नोक की तरफ से पीली पड़ने लगती है। यह प्रभाव पहले पुरानी पत्तियों पर पड़ता है, नई पत्तियाँ बाद में पीली पड़ती है।
  • पौधों में टिलरिंग कम होती है।
  • फूल कम या बिल्कुल नही लगते है।
  • फूल और फल गिरना प्रारम्भ कर देते है।
  • दाने कम बनते है।
  • आलू का विकास घट जाता है।

फास्फोरस

  • पौधों की वृद्धि कम हो जाती है।
  • जडों का विकास रूक जाता है।
  • पुरानी पत्तियाँ सिरों की तरफ से सूखना शुरू करती है तथा उनका रंग तांबे जैसा या बैंगनी हरा हो जाता है।
  • टिलरिंग घट जाती है।
  • फल कम लगते है, दानो की संख्या भी घट जाती है।
  • अधिक कमी होने पर तना गहरा पीला पड़ जाता है।

पोटाश

  • पौधों में ऊपर की कलियों की वृद्धि रूक जाती है।
  • पत्तियाँ छोटी पतली व सिरों की तरफ सूखकर भूरी पड़ जाती है और मुड़ जाती है।
  • पुरानी पत्तियाँ किनारों और सिरों पर झुलसी हुई दिखाई पड़ती है तथा किनारे से सूखना प्रारम्भ कर देती है।
  • तने कमजोर हो जाते है।
  • फल तथा बीज पूर्ण रूप से विकसित नहीं होते तथा इनका आकार छोटा, सिकुड़ा हुआ एवं रंग हल्का हो जाता है।
  • पौधों पर रोग लगने की सम्भावना अधिक हो जाती है।

कैल्शियम

  • नये पौधों की नयी पत्तियां सबसे पहले प्रभावित होती है। ये प्राय: कुरूप, छोटी और असामान्यता गहरे हरे रंग की हो जाती है। पत्तियों का अग्रभाग हुक के आकार का हो जाता है, जिसे देखकर इस तत्व की कमी बड़ी आसानी से पहचानी जा सकती है।
  • जड़ो का विकास बुरी तरह प्रभावित होता है और जड़े सड़ने लगती है।
  • अधिक कमी की दशा में पौधों की शीर्ष कलियां (वर्धनशील अग्रभाग) सूख जाती है।
  • कलियां और पुष्प अपरिपक्व अवस्था में गिर जाती है।
  • तने की संरचना कमजोर हो जाती है।

मैग्नीशियम

  • पुरानी पत्तियां किनारों से और शिराओं एवं मध्य भाग से पीली पड़ने लगती है तथा अधिक कमी की स्थिति से प्रभावित पत्तियां सूख जाती है और गिरने लगती है।
  • पत्तियां आमतौर पर आकार में छोटी और अंतिम अवस्था में कड़ी हो जाती है और किनारों से अन्दर की ओर मुड़ जाती है।
  • कुछ सब्जी वाली फसलों में नसों के बीच पीले धब्बे बन जाते है और अंत में संतरे के रंग के लाल और गुलाबी रंग के चमकीले धब्बे बन जाते है।
  • टहनियां कमजोर होकर फफूंदी जनित रोग के प्रति सवेदनशील हो जाती है। साधाराणतया अपरिपक्व पत्तियां गिर जाती है।

गन्धक

  • नयी पत्तियां एक साथ पीले हरे रंग की हो जाती है।
  • तने की वृद्दि रूक जाती है।
  • तना सख्त, लकड़ी जैसा और पतला हो जाता है।

जस्ता

  • जस्ते की कमी के लक्षण मुख्यत: पौधों के ऊपरी भाग से दूसरी या तीसरी पूर्ण परिपक्व पत्तियों से प्रारम्भ होते है।
  • मक्का में प्रारम्भ में हल्के पीले रंग की धारियां बन जाती है और बाद में चौड़े सफेद या पीले रंग के धब्बे बन जाते है। शिराओं का रंग लाल गुलाबी हो जाता है। ये लक्षण पत्तियों की मध्य शिरा और किनारों के बीच दृष्टिगोचर होते है, जो कि मुख्यत: पत्ती के आधे भाग में ही सीमित रहते है।
  • धान की रोपाई के 15-20 दिन बाद पुरानी पत्तियों पर छोटे-छोटे हल्के पीले रंग के धब्बे दिखाई देते है, जो कि बाद में आकार में बड़े होकर आपस में मिल जाते है। पत्तियां (लोहे पर जंग की तरह) गहरे भूरे रंग की हो जाती है और एक महीने के अन्दर ही सूख जाती है। उपरोक्त सभी फसलों में वृद्दि रूक जाती है। मक्का में रेशे और फूल देर से निकलते है और अन्य फसलों में भी बालें देर से निकलती है।