कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

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मिट्टी की जाँच

पौधों में आवश्यक पोषक तत्व एवं उनके कार्य

  • पौधों के सामान्य विकास एवं वृद्धि हेतु कुल 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इनमें से किसी एक पोषक तत्व की कमी होने पर पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और भरपूर फसल नहीं मिलती ।
  • कार्बन , हाइड्रोजन व आक्सीजन को पौधे हवा एवं जल से प्राप्त करते है।
  • नाइट्रोजन , फस्फोरस एवं पोटैशियम को पौधे मिट्टी से प्राप्त करते है। इनकी पौधों को काफी मात्रा में जरूरत रहती है। इन्हे प्रमुख पोषक तत्व कहते है।
  • कैल्शियम, मैग्नीशियम एवं गन्धक को पौधे कम मात्रा में ग्रहण करते है। इन्हे गौड अथवा द्वितीयक पोषक तत्व कहते है।
  • लोहा, जस्ता, मैगनीज, तांबा, बोरॉन, मोलिब्डेनम और क्लोरीन तत्वों की पौधों को काफी मात्रा में आवश्यकता पड़ती है। इन्हे सूक्ष्म पोषक तत्व कहते है।

पोषक तत्वों के कार्य

नाइट्रोजन

  • सभी जीवित ऊतकों यानि जड़, तना, पत्ति की वृद्दि और विकास में सहायक है।
  • क्लोरोफिल, प्रोटोप्लाज्मा प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्लों का एक महत्वपूर्ण अवयव है।
  • पत्ती वाली सब्जियों और चारे की गुणवत्ता में सुधार करता है।

फास्फोरस

  • पौधों के वर्धनशील अग्रभाग, बीज और फलों के विकास हेतु आवश्यक है। पुष्प विकास में सहायक है।
  • कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक है। जड़ों के विकास में सहायक होता है।
  • न्यूक्लिक अम्लों, प्रोटीन, फास्फोलिपिड और सहविकारों का अवयव है।
  • अमीनों अम्लों का अवयव है।

पोटेशियम

  • एंजाइमों की क्रियाशीलता बढाता है।
  • ठण्डे और बादलयुक्त मौसम में पौधों द्वारा प्रकाश के उपयोग में वृद्धि करता है, जिससे पौधों में ठण्डक और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता बढ़ जाती है।
  • कार्बोहाइड्रेट के स्थानांतरण, प्रोटीन संश्लेषण और इनकी स्थिरता बनाये रखने में मदद करता है।
  • पौधों की रोग प्रतिरोधी क्षमता में वृद्धि होती है।
  • इसके उपयोग से दाने आकार में बड़े हो जाते है और फलों और सब्जियों की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

कैल्शियम

  • कोशिका झिल्ली की स्थिरता बनाये रखने में सहायक होता है।
  • एंजाइमों की क्रियाशीलता में वृद्धि करता है।
  • पौधों में जैविक अम्लों को उदासीन बनाकर उनके विषाक्त प्रभाव को समाप्त करता है।
  • कार्बोहाइट्रेड के स्थानांतरण में मदद करता है।

मैग्नीशियम

  • क्लोरोफिल का प्रमुख तत्व है, जिसके बिना प्रकाश संश्लेषण (भोजन निर्माण) संभव नहीं है।
  • कार्बोहाइट्रेड-उपापचय, न्यूक्लिक अम्लों के संश्लेषण आदि में भाग लेने वाले अनेक एंजाइमों की क्रियाशीलता में वृद्धि करता है।
  • फास्फोरस के अवशोषण और स्थानांतरण में वृद्दि करता है।

गंधक

  • प्रोटीन संरचना को स्थिर रखने में सहायता करता है।
  • तेल संश्लेषण और क्लोरोफिल निर्माण में मदद करता है।
  • विटामिन के उपापचय क्रिया में योगदान करता है।

जस्ता

  • पौधों द्वारा नाइट्रोजन के उपयोग में सहायक होता है
  • न्यूक्लिक अम्ल और प्रोटीन-संश्लेषण में मदद करता है।
  • हार्मोनों के जैव संश्लेषण में योगदान करता है।
  • अनेक प्रकार के खनिज एंजाइमों का आवश्यक अंग है।