कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

फसलोत्पादन

धान
  • धान में नाइट्रोजन की दूसरी व अन्तिम टाप ड्रेसिंग बाली बनने की प्रारम्भिक अवस्था (रोपाई के 50-55 दिन बाद) में, अधिक उपज वाली प्रजातियों में प्रति हेक्टेयर 30 किग्रा (65 किग्रा यूरिया) तथा सुगन्धित प्रजातियों में प्रति हेक्टेयर 15 किग्रा (33 किग्रा यूरिया) की दर से करें।
  • धान में बालियॉ फूटने तथा फूल निकलने के समय पर्याप्त नमी बिनाये रखने के लिए आवश्यकतानुसार सिंचाई करें।
  • धान के भूरे फुदके से बचाव के लिए खेत में पानी निकाल दें। नीम आयल 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए।

मक्का

  • मक्का में अधिक बरसात होने पर जल-निकास की व्यवस्था करें।
  • फसल में नर मंजरी निकलने की अवस्था एवं दाने की दूधियावस्था सिंचाई की दृष्टि से विशेष महत्वपूर्ण है। यदि विगत दिनों में वर्षा न हुई हो या नमी की कमी हो तो सिंचाई अवश्य करें।

ज्वार

  • ज्वार से अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए वर्षा न होने या नमी की कमी होने पर बाली निकलने के समय तथा दाना भरते समय सिंचाई करें।

बाजरा

  • बाजरा की उन्नत/संकर प्रजातियों में नाइट्रोजन की शेष आधी मात्रा यानि 40-50 किग्रा (87-108 किग्रा यूरिया) की टाप ड्रेसिंग बोआई के 25-30 दिन बाद करें।

मूँग/उर्द

  • वर्षा न होने पर कलियाँ बनते समय पर्याप्त नमी बनाये रखने के लिए सिंचाई करें।
  • फली छेदक कीट की सूड़ियाँ, जो फली के अन्दर छेद करके दानों को खाती हैं, को रोकथाम के लिए निबौली का 5 प्रतिशत या क्यूनालफास 25 ई०सी० की 1.25 लीटर मात्रा का प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।

सोयाबीन

  • सोयाबीन में वर्षा न होने पर फूल एवं फली बनते समय सिंचाई करें।

मूँगफली

  • मूँगफली में खूंटिया बनते (पेगिंग) समय तथा फलियाँ बनते समय पर्याप्त नमी बनाये रखने के लिए आवश्यकतानुसार सिंचाई अवश्य करें।
  • टिक्का बीमारी की रोकथाम के लिए प्रति हेक्टेयर मैन्कोजेब 75% डब्लू० पी० 2.0 किग्रा या जिनेब 75 प्रतिशत की 2.5 किग्रा या जिरम 27 प्रतिशत तरल 3 लीटर का 2-3 छिड़काव 10 दिन के अन्तराल पर करना चाहिए।

सूरजमुखी

  • सूरजमुखी के फूल में नर भाग पहले पकने के कारण परपरागण (मधुमक्खियों द्वारा) होता है। अतः खेत में या मेड़ों पर बक्सों में मधुमक्खी पालन किया जाये तो मुण्डकों में अधिक बीज बनने से उपज में वृद्धि होगी और साथ ही शरद भी अतिरिक्त आय के रूप में प्राप्त होगी।

गन्ना

  • पायरिला की रोकथाम के लिए प्रति हेक्टेयर क्वीनालफास 25 प्रतिशत ई० सी० 2 ली० अथवा डाइक्लोरवास 76 प्रतिशत ई०सी० 375 मिली को 800-1000 ली० पानी में घोलकर छिड़काव करें।
  • फसल वातावरण में पायरिलाकीट के परजीवी एपीरिकेमिया मेलोनोल्यूका को संरक्षण प्रदान करना चाहिए। इस की उपस्थिति से कीट की स्वतः रोकथाम हो जाती है।
  • गन्ने में गुरूदास बोरर व शीर्ष बोधक (टाप बोरर) की रोकथाम के लिए क्लोरोपाइरीफास 20 प्रतिशत ई०सी० 1.5 ली० अथवा मोनोक्रोटोफास 36 प्रतिशत के 2 ली० मात्रा का 800-1000 लीटर में घोलकर छिड़काव करें।

तोरिया

  • तोरिया की बोआई के लिए सितम्बर का दूसरा पखवाड़ा सबसे उत्तम है।
  • बोआई के लिए सदैव उपचारिता बीज का प्रयोग करें।

सब्जियों की खेती

  • टमाटर, विशेषकर संकर प्रजातियों व गाँठ गोभी के बीज की बोआई नर्सरी में करें।
  • पत्तागोभी की अगेती किस्में जैसे-पूसा हाइब्रिड-2, गोल्डनएकर की बोआई 15 सितम्बर तक माध्यम व पिछेती किस्मे जैसे पूसा ड्रमहेड, संकर क्विस्टो की बोआई 15 सितम्बर के बाद प्रारम्भ की जा सकती है।
  • शिमला मिर्च की रोपाई पौध के 30 दिन के होने पर 50-60×40 सेन्टीमीटर की दूरी पर करें।
  • पत्तागोभी की रोपाई सितम्बर के अन्तिम सप्ताह से शुरू की जा सकती है।
  • मध्यवर्गीय फूलगोभी जैसे इम्प्रूब्ड जापानी, पूसा दीपाली, पूसा कार्तिक की रोपाई के लिए पूरा माह उपयुक्त है।
  • मूली की एशियाई किस्मों जैसे जापानी ह्वाइट, पूसा चेतकी, हिसार मूली नं०1, कल्याणपुर-1 की बोआई इस माह से शुरू की जा सकती है।
  • मेथी की अगेती फसल के लिए 15 सितम्बर से बोआई कर सकते हैं। इसके लिए प्रति हेक्टेयर 25-30 किग्रा बीज की आवश्यकता होगी।
  • वर्षा समाप्त होते ही इस माह हरी पत्ती के लिए धनिया की प्रजाति पन्त हरीतिमा, आजाद धनिया-1 की बोआई प्रारम्भ कर सकते हैं।
  • अगेती बोआई के लिए आलू की कुफरी अशोका, कुफरी चन्द्रमुखी, किस्में अच्छी है, जिनकी बोआई 25 सितम्बर से प्रारम्भ की जा सकती है।

बागवानी

  • आम में एन्थ्रैक्नोज रोग से बचाव के लिए कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण एक ग्राम पर्णीय संक्रमण हेतु या कापर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा एक लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • आँवला में फल सड़न रोग की रोकथाम के लिए कॉपर आक्सीक्लोराइड 3 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • केले में प्रति पौधा 55 ग्राम यूरिया पौधे से 50 सेंटीमीटर दूर घेरे में प्रयोग कर हल्की गुड़ाई करके भूमि में मिला दें।

पुष्प व सगन्ध पौधे

  • रजनीगंधा के स्पाइक की कटाई-छंटाई एवं विपणन करें।
  • ग्लैडियोलस के रोपाई की तैयारी के लिए प्रति वर्गमीटर 10 किग्रा गोबर की खाद/कम्पोस्ट, 200 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट व 200 ग्राम म्यूरेट आफ पोटाश रोपाई के 15 दिन पूर्व अच्छी तरह मिला दें।

पशुपालन/दुग्ध विकास

  • खुरपका-मुँहपका रोग की रोकथाम के लिए टीका लगवायें। इस रोग से ग्रसित पशुओं के घाव को पौटेशियम परमैग्नेट से धोएँ।
  • नवजात बच्चों को खीस (कोलस्ट्रम) अवश्य दें।
  • मेस्टाइटिस रोग का पता लगाने हेतु दूध की जॉच करायें।

मुर्गीपालन

  • मुर्गीखाने में कैल्शियम प्राप्ति के लिए सीप का चूरा रखें।
  • पेट के कीड़ों को मारने के लिए दवा दें।
  • मुर्गी खाने में 14-16 घंटे प्रकाश उपलब्ध करायें।
  • डीप लीटर के बिछावन को नियमित रूप से उलटने पलटते रहें।