कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

प्रौद्योगिकी का उपयोग

कृषि के विकास हेतु सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के अन्तर्गत पारदर्शी किसान सेवा योजना की संक्षिप्त टिप्पणी

योजना की पृष्ठभूमि-

कृषि क्षेत्र की प्रदेश तथा देश के विकास में अहम भूमिका है किन्तु वर्तमान में कृषि तथा कृषकों के सामने अनेक समस्यायें आ रही हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिये सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण योजनायें क्रियान्वित की हैं। कृषकों के लिये कल्याणकारी योजनाओं को सरकार पात्र लाभार्थियों तक पहुँचाने के लिये संकल्पबद्ध भी है किन्तु अभी तक जो भी अनुश्रवण तंत्र व्यवहार में लाये गये हैं वे व्यवस्था को पारदर्शी नही बना सके हैं। इसी समस्या के समाधान के लिये सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुये कृषकों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं एवं सुविधाओं को पारदर्शी बनाने हेतु इलेक्ट्रॅानिक हैण्ड हेल्ड डिवाइस/मोबाईल डाटा कलेक्टर का उपयोग किया जायेगा, जिसके माध्यम से लाभार्थी कृषक को ऑनलाइन एक प्रिंटेड विवरण दिया जायेगा तथा उस किसान का फोटो एवं उसी हैण्ड हेल्ड डिवाइस में स्थापित बायोमेट्रिक्स सिस्टम द्वारा अंगूठा निशान ग्रहण करते हुये उसका पूरा विवरण प्राप्त कर लिया जायेगा। किस किसान को किस योजना में क्या लाभ दिया गया उसका पूरा विवरण हैण्ड हेल्ड डिवाइस के ऑनलाइन होने के कारण तुरन्त ही कृषि विभाग के सर्वर तथा वेब पोर्टेल पर आ जायेगा जिसे कोई भी व्यक्ति देख अथवा प्रिंट कर सकेगा। जिन योजनाओं में अनुदान की धनराशि सीधे लाभार्थी के खाते में स्थानान्तरित करनी होगी उनमें अनुदानित वस्तु के वितरण/बिक्री के पश्चात लाभार्थियों का विवरण जिनमें उनके बैंक खाते का भी विवरण होगा, कम्प्यूटर से प्राप्त कर NEFT/RTGS के माध्यम से धनराशि आहरण अधिकारी द्वारा अन्तरित कर दी जायेगी।

दूसरी ओर योजनाओं के कुशल वित्तीय प्रबन्धन हेतु यह आवश्यक है कि सही मद में धनराशि का व्यय सुनिश्चित हो तथा आकड़ों का विश्लेषण कर विकास की भावी रणनीति तैयार की जा सके। इसके लिये वित्तीय विशेषज्ञों की देख-रेख में योजनाओं का अनुश्रवण सुनिश्चित कराया जायेगा। योजनाओं की वित्तीय प्रगति के आधार पर ही भौतिक प्रगति का विवरण तैयार होगा। भारत सरकार को सही समय से उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजकर अधिक से अधिक धनराशि राज्य सरकार के पक्ष में समय से अवमुक्त कराया जायेगा। यह सभी कार्य ऑनलाइन सुनिश्चित कराया जायेगा।

लाभार्थी के खाते में सीधे अनुदान की धनराशि नकद स्थानान्तरित करने के निर्णय के पश्चात लाभ प्राप्त करने वाले कृषक के खाते में तीन दिन के अन्दर धनराशि कोषागार अथवा बैंक खाते से अन्तरित किया जाना सॉफ्टवेर के माध्यम से सुनिश्चत कराया जायेगा।

कृषि के विकास में सूचना प्रौद्योगिकी विशेष सहायक बने, विभाग के प्रति किसानों का विश्वास बढे़, सम्पूर्ण व्यवस्था पारदर्शी हो इसी उद्देश्य से यह योजना लागू की गयी है।

योजना का उद्देश्य :-

  • ‘‘किसान का अधिकार किसान के द्वार‘‘ कृषि विभाग के समस्त कार्यालयों को कम्प्यूटर नेटवर्क के माध्यम से जोड़ते हुये योजनाओं की ऑनलाइन मॉनीटरिंग, कुशल वित्तीय प्रबन्धन, विभाग के कार्यकलापों में पारदर्शिता लाना तथा कम्प्यूटर तकनीक को कृषकों के लिये उपयोगी बनाते हुये विभाग की पहुँच आम जनता तक सुनिश्चित करना।
  • माइक्रो से मैक्रो स्तर तक के सभी कार्य तुरंत तथा दोष रहित तरीके से संपन्न कराना।
  • कम्प्यूटरीकृत आकड़ों के विश्लेषण द्वारा कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के लिये प्रभावशाली रणनीति तैयार करना।

योजना का क्रियान्वयन

सर्वप्रथम विभिन्न माध्यमों से प्रत्येक किसान को यह जानकारी दी जायेगी कि हमारी सरकार किस योजना में किस प्रकार के किसान को क्या लाभ देने जा रही है। तदोपरान्त किसान अथवा मजदूर जो भी कृषि विभाग की योजनाओं से लाभ चाहते हैं उनका पंजीकरण किया जायेगा।

किसानों और मजदूरों को पंजीकरण कराना आवश्यक क्यों ?

शासनादेश सं0-811/12-3-2014-100(61)/2012 दिनांक 23-07-2014 द्वारा पारदर्शी लाभार्थी चयन प्रक्रिया निर्धारित करते हुए कृषि विभाग की योजनाओं से लाभ प्राप्त करने हेतु पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

  • पंजीकरण अनिवार्य होने से लाभार्थी चयन प्रक्रिया पारदर्शी होगी।
  • लाभार्थी का चयन उसके पंजीकरण के क्रम में ही किया जायेगा एंव शासन की नीति के अनुसार कमजोर किसानों को लाभ वितरण में वरीयता दी जोयेगी।
  • अपने लाभार्थी की पहचान करते हुये कृषकों के महत्वपूर्ण डाटा बेस का सृजन होगा।
  • पंजीकरण अनिवार्य होने से बार-बार कुछ विशेष किसानों और मजदूरों को ही लाभ प्रदान करने की प्रथा पर रोक लगेगी और लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि होगी।
  • कृषि विभाग की योजनाओं में किसको क्या लाभ दिया गया इसका विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेगा।
  • पंजीकृत कृषकों और मजदूरों को सरकार की योजनाओं की जानकारी उनके मोबाइल पर समय समय पर मिलती रहेगी।
  • एक बार पंजीकरण हो जाने के उपरान्त अपना पंजीकरण नंबर बताकर अनुमन्य लाभ की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
  • पंजीकृत कृषकों और मजदूरों की आवश्यकताओं के अनुरूप विभागीय रणनीति बनायी जा सकेगी।

पंजीकरण कराने कि लिये आवश्यक अभिलेख-

पंजीकरण कराने के लिये निम्न 3 अभिलेखों की फोटोकापी लगाना जरूरी है :-

  • वोटर कार्ड/आधार कार्ड/राशन कार्ड/पासपोर्ट में से कोई एक- लाभार्थी की पहचान हेतु।
  • खतौनी (मजदूरी के लिये नहीं चाहिये)- भूमि की पहचान हेतु।
  • बैंक पासबुक का पहला पन्ना जिस पर लाभार्थी का विवरण हो- लाभ सीधे खाते में पहुँचाने के लिये।