कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

परिचय

प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन

प्रदेश में भूमि संसाधनों के संरक्षण, विकास एवं उपयोग का कार्य कृषि विभाग द्वारा विगत पांच दशकों से किया जा रहा है जिसके फलस्वरूप उत्पादकता तथा फसल सघनता में पर्याप्त वृद्वि के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भी वृद्वि हुई है। प्राकृतिक संसाधनों को सतत् उपयोगी एवं स्थायी बनायें रखने के लिये आवश्यक है कि उनका प्रबन्धन एवं अनुरक्षण जनसहभागिता पर आधारित हो। कृषि विभाग इस दिशा में सतत् प्रयत्नशील है।

वर्तमान में प्रदेश के 241.70 लाख हे0 क्षेत्रफल में से 120.44 लाख हे0 क्षेत्रफल भू-क्षरण के विभिन्न कारको से ग्रसित है। इस 120.44 लाख हे0 क्षेत्रफल में 73.53 लाख हे0 भू-क्षरण जल के कारण हो रहा है जिससे इन क्षेत्रों की उत्पादकता कम है एवं इसमें उत्तरोतर कमी आ रही है। इसी प्रकार 46.91 लाख हे0 क्षेत्रफल बीहड़, ऊसर, जल भराव एवं बाढ़ की विशेष समस्याओं से ग्रसित है। चयनित जलागम क्षेत्रों में जल संसाधनों का विकास सतही एवं भू जल अत्यन्त अल्प है। इसके साथ ही वर्षा जल बतौर रन आफ नदियों में प्रवाहित हो जाता है। इस वर्षा जल का समुचित उपयोग नहीं होने के कारण नमी एवं जल उपलब्धता की कमी अनुभव की जाती है।

विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन से आशातीत सफलता प्राप्त हुई है एवं उपचारित जलागमों में सार्थक फसल चक्र परिवर्तन के साथ-साथ उत्पादन एवं उत्पादकता में बढ़ोत्तरी हुई तथा भूगर्भ जल स्तर में भी बढ़ोत्तरी परिलक्षित हुई है।

वर्तमान समय में विभाग द्वारा संचालित योजनायें :-

क्र0 स0  योजना का नाम  वित्त पोषण 
1 खेत तालाब योजना  भारत सरकार (आर0के0वी0वाई) 
2 भूमि सेना योजना  राज्य सेक्टर एवं मनरेगा 
3 आर0आई0डी0एफ0 (वाटरशेड डेवलपमेन्ट) प्रोजेक्ट  नाबार्ड 
4 बुन्देलखण्ड क्षेत्र में वर्षा जल संचयन एवं स्प्रिंकलर सेट वितरण की योजना भारत सरकार (बु0पैके0)