कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

फसलोत्पादन

गेहूँ
  • फसल काटने से पहले खरपतवार या गेहूँ की अन्य प्रजातियों की बालियों को निकाल देना चाहिए, जिससे मड़ाई के समय इनके बीज गेहूँ के बीज में न मिलने पायें।
जौ/चना/मटर/सरसों/मसूर
  • जौ, चना, मटर, सरसों व मसूर आदि कटाई व मड़ाई पुरी कर लें।
सूरजमुखी
  • सूरजमुखी में हरे फुदके पत्तियों से रस चूसकर हानि पहुँचाते हैं। इनके नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर फास्फेमिडान 250 मिलीलीटर का छिड़काव करें।
उर्द/मूँग
  • उर्द की बोआई का समय अब निकल गया है। परन्तु मूँग की बोआई 10 अप्रैल तक की जा सकती है।
  • उर्द/मूँग की फसल में पत्ती खाने वाले कीटों की रोकथाम करें।
शरदकालीन/बसन्तकालीन गन्ना
  • आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें।
  • गन्ने की दो कतारों के मध्य इस समय मूँग की एक कतार बोई जा सकती है।
चारे की फसल
  • बीज वाले बरसीम के खेत में हल्की सिंचाई करें अन्यथा वानस्पतिक वृद्धि अधिक होगी तथा बीज उत्पादन घटेगा।

सब्जियों की खेती

  • नर्सरी तैयार करने के लिए लो टनेल पाली हाउस (एग्रोनेट युक्त) का प्रयोग करने से अच्छी गुणवत्ता का पौध तैयार होगा।
  • बैगन में तनाछेदक कीट से बचाव के लिए नीमगिरी 4 प्रतिशत का छिड़काव 10 दिन के अन्तराल पर करने से अच्छा परिणाम मिलता है।
  • भिण्डी/लोबिया की फसल में पत्ती खाने वाले कीट से बचाने के लिए क्यूनालफास 20% 1.0 ली./हे. 800 ली. पानी में घोलकर छिड़काव करें।
  • लहसुन व प्याज की खुदाई करें। खुदाई के 10-12 दिन पूर्व सिंचाई बन्द कर दें।
  • लाल भृंग कीट की रोकथाम के लिए सुबह ओस पड़ने के समय राख का बुरकाव करने से कीट पौधों पर नहीं बैठते हैं।
  • सूरन की बोआई पूरी माह तथा अदरक व हल्दी की बोआई माह के दूसरे पखवाड़े से शुरू की जा सकती है।
  • प्रति हेक्टेयर अदरक की बोआई के लिए लगभग 18 कुन्टल, हल्दी के लिए 15-20 कुन्टल व सूरन के लिए 75 कुन्टल बीज की आवश्यकता होती है।
  • बोआई से पूर्व हल्दी व अदरक के बीज को 0.3 प्रतिशत कापर आक्सीक्लोराइड के घोल में उपचारित कर लें।

फलों की खेती

  • आम के गुम्मा रोग (मालफारमेशन) से ग्रस्त पुष्प मंजरियों को काट कर जला या गहरे गढ्ढे में दबा दें।
  • आम के फलों को गिरने से बचाने के लिए एल्फा नेफ्थलीन एसिटिक एसिड 4.5 एस.एल. के 20 मिली को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
  • लीची के बागों की आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें। लीची में फ्रूट बोरर की रोकथाम हेतु डाईक्लोरोवास आधा मिलीलीटर प्रति लीटर पानी (0.05 प्रतिशत) या 2 मिलीलीटर प्रति 5 लीटर पानी (0.04 प्रतिशत) में घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • आम, अमरूद, नींबू, अंगूर, बेर तथा पपीता की सिंचाई करें।

पुष्प व सगन्ध पौधे

  • गर्मी के फूलों जैसे जीनिया, पोर्चुलाका व कोचिया के पौधों की सिंचाई एवं निराई-गुड़ाई कर दें।
  • मेंथा में 10-12 दिन के अन्तर पर सिंचाई तथा तेल निकालने हेतु प्रथम कटाई करें।

पशुपालन/दुग्ध विकास

  • पशुओं में खुरपका-मुँहपका रोग से बचाव के लिए टीका लगवायें।
  • पशुओं के लिए बदलते हुए मौसम के अनुसार सुपाच्य तथा पौष्टिक चारा की व्यवस्था करें।

मुर्गीपालन

  • जो मुर्गियाँ कम अण्डे दे रही हों, उनकी छटनी कर दें।
  • मुर्गियों में डिवर्मिंग (पेट के कीड़ों के लिए दवा) करें।
  • बदलते मौसम में मुर्गियों को प्रकाश, स्वच्छ जल तथा सन्तुलित आहार की व्यवस्था करवायें।
  • आर.डी. तथा फाउल पाक्स का टीकाकरण ससमय करायें