कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

उत्तर प्रदेश

उ0प्र0 कृषि अनुसंधान परिषद

प्रदेश में विभिन्न कृषि जलवायुवीय परिस्थितियों में कृषि शिक्षा, शोध एवं प्रसार की बढ़ती आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निम्न चार कृषि विश्वविद्यालय एवं एक डीम्ड कृषि विश्वविद्यालय स्थापित हैं:

  • चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर।
  • नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, फैजाबाद।
  • सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मोदीपुरम, मेरठ।
  • बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय ।
  • सैम हिगिनबाटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज, इलाहाबाद ।

कृषि विश्वविद्यालयों के अन्तर्गत कृषि क्षेत्र में अनुसंधान हेतु विभिन्न स्रोतों से शोध परियोजनायें संचालित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से विश्वविद्यालयों में फसल सुधार, सस्य व पौध सुरक्षा तकनीक, बीज उत्पादन कर सम्यक कृषि उपयोग तकनीकी के विकास को गति दी जा रही है। इसके अतिरिक्त विभिन्न फसलों की शस्य विधियाँ, उर्वरक प्रबन्ध, फसल सुरक्षा, फसल पद्धति, बारानी खेती, दियारा व ऊसर भूमि सुधार, सब्जी एवं उद्यान के क्षेत्र में तकनीक विकसित की गई हैं।

उन्नतशील फसल प्रजातियों एवं तकनीकों के प्रचार-प्रसार हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रत्येक द्वारा प्रत्येक जनपद में कृषि विज्ञान केन्द्र स्थापित किये जाने का प्राविधान है। प्रदेश के कुल 75 जनपदों में से वर्तमान में 67 जनपदों में कृषि विज्ञान केन्द्र स्थापित हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा तैयार किये गये माडल एक्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अधिनियम 2014 तैयार कर इसे लागू किये जाने की प्रक्रिया क्रमिक है।

प्रदेश में फसल मौसम पूर्वानुमान से सम्बन्धित सूचना निरन्तर प्राप्त कर कृषि के लिये सामयिक जानकारी/संस्तुतियाँ देने हेतु परिषद में क्राप वेदर वॉच ग्रुप गठित है। वॉच क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप द्वारा वर्ष 2015-16 में 25 बैठेकों का आयोजन किया गया तथा ग्रुप की संस्तुतियाँ इफको के सहयोग से एस.एम.एस. के द्वारा 9 लाख कृषकों को पहुँचाई जा रही हैं।

राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद

कृषि उत्पादन मण्डी अधिनियम 1964 के अधीन 250 मुख्य मंडियाँ एवं 365 उप मण्डियाँ विनियमित हैं। प्रत्येक विनियमित मण्डी के लिए एक मण्डी समिति की स्थापना है। मण्डी समितियों द्वारा मण्डियों के विनियमन के साथ-साथ किसानों एवं व्यापारियों हेतु सुख-सुविधा युक्त नवीन मण्डी स्थलों का निर्माण कराया जा रहा है। अब तक प्रदेश में 218 मुख्य मण्डी स्थलों, 94 उपमण्डी स्थलों, 72 फल/सब्जी मण्डी स्थलों, 05 दुग्ध मण्डी स्थल, 05 मत्स्य बाजारों, 225 हाट-पैठ, 238 ग्रामीण गोदाम, 87 कृषक सेवा केन्द्रों, 04 किसान बाजार, 132 ग्रामीण अवस्थापना केन्द्र 06 विशिष्ट मण्डी स्थल तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 20,149 कि0मी0 लम्बाई के सम्पर्क मार्गो का निर्माण कार्य पूर्ण करा लिया गया है।

नूतन अभिनव कार्य

  • जनेश्वर मिश्र ग्राम योजना के अन्तर्गत अब तक 6643 ग्रामों का चयन किया गया है जिसमें से 5036 ग्रामों को संतृप्त किया जा चुका है। योजना के अन्तर्गत सी0सी0 रोड, नाली का निर्माण एवं विद्युत कार्य कराया जाता है। वर्ष 2013-14 से रू0 25.00 लाख से बढ़ाकर रू0 40.00 लाख प्रति गाँव के विकास पर व्यय किया गया। वर्ष 2016-17 रु० 35.00 लाख प्रति गाव के विकास पर व्यय किया जा रहा है।
  • प्रदेश के कृषकों को बीज कृषि यंत्र एवं माइक्रो यूनिट पर दिया जाने वाला अनुदान डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डी.बी.टी.) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में दिया जा रहा है।