कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

उत्तर प्रदेश

  • नेशनल मिशन ऑन ऑयलसीड एण्ड ऑयलपाम :- भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूर्व में संचालित आइसोपाम योजना का पुनर्गठन कर वर्ष 2014-15 से नेशनल मिशन आन आयलसीड एण्ड आयलपाम योजना का संचालन किया जा रहा है, जिससे तिलहनी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होगी तथा प्रदेश खाद्यान्न तेलों में आत्मनिर्भर होगा।
  • नेशनल मिशन आन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एण्ड टेक्नोलॉजी :- भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कृषि प्रसार हेतु वर्ष 2013-14 तक आत्मा माडल का क्रियान्वयन किया जा रहा था। वर्ष 2014-15 से आत्मा योजना (सपोर्ट टू स्टेट एक्सटेंशन प्रोग्राम फार एक्सटेंशन रिफाम्र्स) को नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चर एण्ड टेक्नोलॉजी में संविलीन कर दिया गया है। नवीन योजना के अन्तर्गत, सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन, सब मिशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन, सब मिशन ऑन सीड एण्ड प्लान्टिंग मैटेरियल तथा स्ट्रेन्थनिंग एण्ड मार्डनाइजेशन आफ पेस्ट मैनेजमेन्ट एप्रोच जैसे चार सब मिशन संचालित किये जा रहे हैं।
  • नेशनल क्राप इन्शोरेन्स प्रोग्राम :- भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना एवं मौसम आधारित फसल बीमा योजना को वर्ष 2014-15 में एकीकृत कर नेशनल क्राप इन्शोरेन्स प्रोग्राम का संचालन किया जा रहा है। नेशनल क्राप इन्शोरेन्स प्रोग्राम के घटक के रूप में दो कार्यक्रम यथा- राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना एवं मौसम आधारित फसल बीमा योजना संचालित हैं।
  • वर्ष 2016-17 से राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के स्थान पर प्रधानमंत्री पालन बीमा योजना चलाई जा रही है
  • नेशनल मिशन फार सस्टेनेबल एग्रीकल्चर :- कृषि उत्पादकता को सतत बनाना प्राकृतिक संसाधनों जैसे मृदा एवं जल की गुणवत्ता और उपलब्धता पर निर्भर करता है। कृषि उत्पादकता को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत प्रयोग को बढ़ावा देकर उपयोगी बनाए रखा जा सकता है। इसी अवधारणा को दृष्टिगत रखते हुए नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के अन्तर्गत निम्न मुख्य घटक है:-
    • रेनफेड एरिया डेवलपमेन्ट (आर0ए0डी0)
    • मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन (एस0एच0एम0)
      • स्वायल हेल्थ
      • स्वायल हेल्थ कार्ड
      • परम्परागत कृषि विकास योजना (पी0के0वी0वाई0)
  • प्रमाणित बीजों पर अनुदान सम्बन्धी योजना के माध्यम से कृषकों को गुणवत्ता युक्त बीज अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पर होने वाला व्यय राज्य सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वहन किया जाता है।
  • संकर बीजों के उपयोग को बढ़ावा देने की योजना:- देश एवं प्रदेश की खाद्य सुरक्षा को अक्षुण्ण बनाये रखने, अधिक से अधिक खाद्यान्न उत्पादन को प्राप्त करने के साथ-साथ प्रदेश के 90 प्रतिशत से अधिक लघु एवं सीमान्त कृषकों के आय में वृद्धि को लक्षित करते हुए प्रदेश सरकार इस योजना के माध्यम से अधिक उपज देने वाली हाईब्रिड बीजों को अनुदानित दर पर उपलब्ध करा रही है।
  • रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से दृष्टिगोचर दुष्प्रभावों को कम करने हेतु विभिन्न पारिस्थितिकीय संसाधनों द्वारा कीट/रोग नियंत्रण की योजना चलायी जा रही है। योजना के अन्तर्गत बायो एजेन्ट्स, बायो पेस्टीसाइड्स एवं एकीकृत नाशी जीव प्रबन्धन जैसी तकनीकों के प्रयोग से कीट/रोग नियंत्रण किये जाने का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
  • कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए कृषि प्रसार, कृषि निवेश तथा तकनीकी प्रबन्धन योजना :- कृषि की नवीनतम जानकारियों, नवीनतम वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों तथा विभिन्न तकनीकी प्रबन्धनों को प्रचार-प्रसार के माध्यम से कृषकों तक पहुंचाये जाने हेतु यह योजना चलाई जा रही है।
  • सोलर फोटो वोल्टिक इरीगेशन पम्प की स्थापना :- वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देने, पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ पर्यावरणीय अनुकूलता के दृष्टिगत इस योजना का संचालन किया जा रहा है।
  • कृषि के विकास हेतु सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के अन्तर्गत पारदर्शी किसान सेवा योजना/डी0बी0टी0 योजना के माध्यम से लाभार्थी के खाते में सीधे अनुदान की धनराशि नकद स्थानान्तरित करने के पश्चात लाभ प्राप्त करने वाले कृषक के खाते में तीन दिन के अन्दर धनराशि कोशागार/बैंक से अन्तरित किया जा रहा है।