कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

उत्तर प्रदेश

वर्ष 2016-17 में उपज पालन मद के अन्तर्गत विभिन्न कार्यक्रम/उत्पादन बढ़ाने की योजनाएं संचालित की गयी हैं जो मुख्यतः इस प्रकार हैं :-

  • मृदा प्राकृतिक संसाधन है जिसकी उत्पादकता बनाये रखने हेतु विभिन्न कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं, जिससे रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के असंतुलित प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके। उक्त के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के प्रत्येक कृषक को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराये जाने के कार्यक्रम के अन्तर्गत कृषक के खेतों से मृदा नमूने एकत्र कर उन्हें प्रयोगशालाओं में भेजकर तथा विश्लेषित कराकर संस्तुतियाँ मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से कृषकों को उपलब्ध करायी जा रही हैं।
  • कृषकों को कृषि की नई तकनीक उपलब्ध कराने हेतु प्रचार-प्रसार के कार्यक्रम के अन्तर्गत निम्न कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं :-
  1. प्रदेश में एग्रो क्लाईमेटिक जोनवार तीन दिवसीय विराट किसान मेलों का आयोजन किया गया। इन मेलों में कृषकों की समस्याओं का स्थलीय निदान तथा कृषि निवेश/कृषि तकनीक भी उपलब्ध करायी गयी।
  2. विगत वर्षो में प्रदेश की कृषि उत्पादकता में उत्तरोत्तर हो रही वृद्धि को और तीव्र गति देने को ध्यान में रखते हुए कृषि उत्पादन की नवीन तकनीक को ससमय कृषकों तक पहुंचाना, सामयिक कृषि संसाधन व्यवस्था हेतु मण्डल, जनपद, विकास खण्ड एवं न्याय पंचायत स्तर पर खरीफ एवं रबी मौसमों के प्रारम्भ में गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। गोष्ठियों में कृषि विश्व-विद्यालय एवं अन्य संस्थाओं के वैज्ञानिक तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भाग लेकर कृषकों के हितोपयोगी बनाया जाता है।
  3. कृषि की सम-सामयिक समस्याओं के निदान एवं तकनीकी ज्ञान में वृद्धि हेतु मासिक बुलेटिन "कृषि चिन्तन” का प्रकाशन किया जा रहा है। इस बुलेटिन को प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों, विभागीय कर्मचारियों, प्रगतिशील कृषकों एवं जन-प्रतिनिधियों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
  4. कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र की सम-सामयिक समस्याओं के निदान एवं अद्यतन पद्धति एवं तकनीकों के प्रचार-प्रसार हेतु कृषि एवं पशुपालन मासिक पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है तथा इसे कृषकों के मध्य रू0 24 मात्र के वार्षिक मूल्य पर सदस्य कृषकों को उपलब्ध कराया जाता है।
  5. जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बायो फर्टीलाइजर, बायो पेस्टीसाइड्स एवं बायो एजेन्ट्स के वितरण पर 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है साथ ही मृदा में सूक्ष्म तत्वों की कमी को दूर करने एवं भूमि सुधार के उद्देश्य से जिप्सम के वितरण पर भी 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत सम्पूर्ण कृषि क्षेत्र को आच्छादित करते हुए इसके समग्र विकास हेतु अवस्थापना विकास, उन्नत तकनीक तथा वृहद स्तर पर राज्य एवं जनपद स्तरीय योजनायें तैयार कर कार्यक्रमों को स्थानीय आवश्यकतानुसार संचालित किया जा रहा है।
  • प्रदेश में गेहूं, चावल एवं दलहन के उत्पादन की असमानता को दूर करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन वित्तीय वर्ष 2007-08 से चलायी जा रही है।
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपदों में खाद्यान्न उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि की व्यापक संभावनाओं के दृष्टिगत पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरित क्रांति के विस्तार की रणनीतिक योजना वर्ष 2010-11 से संचालित की जा रही है।