कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

थारू जनजाति उपयोजना

थारू जनजाति उप योजना

वर्ष 1991 की जनगणना के आधार पर उत्तर प्रदेश में जनपद लखीमपुर खीरी बलरामपुर (गोण्डा) श्रावस्ती (बहराईच) महराजगंज और बिजनौर को जनजाति बाहुल्य क्षेत्र मे सम्मिलित किया गया हैं प्रदेश मं अनुसूचित जनजातियां का प्रतिशत 0.21 है राज्य सरकार ने अनुसूचित जनजाति के उद्धार के लिए उक्त योजना को मैदानी क्षेत्र में भूमि एवंज ल संरक्षण के साथ वर्ष 1982-83 से लागू किया जिसके लिए सर्वप्रथम तत्कालीन जनपद गोण्डा (बलरामपुर) को चयनित किया गया वर्तमान में जनपद लखीमपुर को चयनित किया गया है। प्रदेश के अनुसूचित जनजाति बाहुल्य अन्य जनपदों मे भी यह योजना भविष्य में लागू करने का प्रयास किया जायेगा।

उद्देश्य
भूमि एवं जल संरक्षण के विभिन्न कार्यो के माध्यम से जल प्रवाह को नियंत्रित कर भूमि कटाव रोकना अधिक समय तक वर्षा तक पानी को रोक कर अधिक से अधिक मात्रा में भूमि में जल शोषित कराना ताकि भूमिगत जल-स्तर में बढ़ोत्तरी हो वर्षा के अतिरिक्त पानी को जल निकास के माध्यम से सुरक्षित रूप से किसी प्राकृतिक जल निकाय में बढ़ाने देना कार्याें के निष्पादन के माध्यम से पारिŸामिक रूप में रोजगार उपलब्ध कराना भूमि को स्थापित्य प्रदान कर उसकी उर्वरता बनाए रखना ताकि उसे खेती के लिए अधिक उपयोगी बनाया जा सके, क्षेत्र मे वानस्पतिक उत्पादन एवं जीवन यापन के अन्य स्रोतो कों स्थापित्य प्रदान करना जिससे थारू जनजाति के लोगो का पलायन रोकने एवं परिस्थितिकीय संतुलन बनाएं रखने का उछ्देश्य पूरा हो सके।

कार्यक्षेत्र

वर्तमान समय में यह योजना जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा विकास खण्ड के अन्तर्गत भागर नाला के उप जलसमेट क्षेत्र में संचालित किया जाना प्रस्तावित है।

कृषको को देय सुविधायें
थारू जनजाति के सभी कृषकों को भूमि संरक्षण कार्यो पर शत प्रतिशत अनुदान देय है।