कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

बीज

25.    नियम बनाने की शक्ति :-

  • केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित कर नियम शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगी।
  • विशिष्टतः और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे :-
    • समिति के कृत्य और समिति के सदस्यों, तथा धारा 3 (5) के अधीन नियुक्त किसी उपसमिति के सदस्यों को एवं दैनिक भत्ते
    • केन्द्रीय बीज प्रयोगशाला के कृत्य
    • प्रमाणन अभिकरण के कृत्य
    • किसी अधिसूचित किस्म या उपकिस्म के बीज के आधान 7 के खंड (ग) और धारा 17 के खण्ड (ख) के अधीन चिन्हित या उस पर लेबल लगाने की रीति;
    • वे अपेक्षाएं जो धारा 7 में निर्दिष्ट कारोबार चलाने वाले व्यय अनुपालित की जाय
    • धारा 9 के अधीन प्रमाणपत्र के अनुदान के लिए आवेदन वे विशिष्टयां जो उसमें अन्तर्विष्ट हों, वह फीस जो उसके चाहिए, प्रमाणपत्र का प्रारूप, वे शर्तें जिनके अध्वधीन अनुदत्त किया जा सकेगा
    • वह प्रारूप जिसमें, वह रीति जिससे और वह फीस जिसके पर धारा 11 के अधीन अपील की जा सकेगी तथा अपील व अपील अधिकारी द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया
    • बीज विश्लेषक और बीज निरीक्षकों की अर्हताएं और कार्यव्य
    • वह रीति जिससे नमूने बीज निरीक्षक द्वारा लिए जा सके नमूने बीज विश्लेषक या केन्द्रीय बीज प्रयोगशाला को भी प्रक्रिया और ऐसे नमूनों के विश्लेषण की रीति
    • धारा 16 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन विशेष परिणाम की रिपोर्ट का प्ररूप और उक्त उपधारा (2) के अध्यन रिपोर्ट के बारे में संदेय फीस
    • धारा 7 में निर्दिष्ट कारोबार चलाने वाले व्यक्ति द्वारा रखे अभिलेख और वे विशिष्टयां जो ऐसे अभिलेखों में अन्तर्विष्ट होंगी।
    • कोई अन्य बात जो विहित की जानी है या की जाय।
  • इस अधिनियम के अधीन बनाया गया हर नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद के हर एक सदन के समक्ष, उस समय जब वह सत्र में हो, कुल मिलाकर तीस दिन की कालावधि के लिए, जो एक सत्र में या देा, क्रमवर्ती सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के, जिसमें वह ऐसे रखा गया हो, या अव्यवहित पश्चातवर्ती सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई उपान्तर करने के लिए सहमत हो जाए या दोनों सदन सहमत हो जाए कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् यथास्थिति, यह नियम ऐसे उपान्तरित रूप में ही प्रभावशील होगा, या उसका कोई भी प्रभाव न होगा किन्तु इस प्रकार कि ऐसा कोई उपान्तर या वातिलकरण उस नियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधि मान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा।

26.    बीज अधिनियम में संशोधन :-

बीज अधिनियम, 1966 (1966 का 54) की धारा 25 द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए केन्द्रीय सरकार एतत् द्वारा बीज नियम 1968 में संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है :-

  • इन नियमों को बीज (संशोधन) नियम, 1974 कहा जायेगा।
  • उपर्युक्त नियमों में नियम 23 के बाद निम्नलिखित जोड़ा जायेगा अर्थात-'23-ए’ कोई शिकायत करने पर बीज निरीक्षक द्वारा कार्यवाही की जाएगी।
    • यदि कोई किसान लिखकर यह शिकायत करता है कि उसकी फसल इस कारण खराब हो गई कि अधिसूचित किस्म को जो बीज सप्लाई किया गया था वह घटिया किस्म का था, तो बीज निरीक्षक शिकायत करने वाले से प्रयोग में लाए गये बीज के बैच या लेवलों, बीजों के थैलों और ऐसे बीजों के बचे हुए अधिक से अधिक नमूनों को अपने कब्जे में ले लेगा ताकि यह सबूत मिल सकें कि इन बीजों की सप्लाई कहां से हुई थी। बीज निरीक्षक राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशाला में विस्तृत विश्लेषण के लिए लाट के नमूने बीज विश्लेषक के पास भेजकर शिकायत कर्ता की फसल नष्ट होने के कारणों का पता लगाएगा। उसके पश्चात् वह इस संबंध में अपने निष्कर्षों के बारे में श्रम प्राधिकारी को यथाशीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
    • यदि बीज निरीक्षक इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि किसान को जो बीज सप्लाई किया गया था वह केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम स्टैन्डर्ड से घटिया किस्म का था और इसी कारण से किसान की फसल नष्ट हुई है तो इन नियमों के उपबन्धों के उल्लंघन के लिए सप्लायर के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।