कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

बीज

21.    कम्पनियों द्वारा अपराध :-

  • जहां कि इस अधिनियम के अधीन अपराध अपराध कम्पनी द्वारा किया है वह व्यक्ति जो अपराध किये जाने के समय कम्पनी के कारोबार के संचालन को उस कम्पनी का भारसाधक और उस कम्पनी के प्रति उत्तरदायी था, और कम्पनी भी, उस अपराध के दोषी समझे जायेंगे और तदनुसार अपने कार्यवाही की जाने और दण्डित किये जाने के दायित्व के अधीन होंगे।
  • परन्तु इस उपधारा में अन्तर्विष्ट कोई भी बात ऐसे किसी व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन किसी दण्ड के दायित्व के अधीन न करेगी यदि यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया था और ऐसे अपराध को किया जाना निवारित करने के लिए उसने सम्यक् तत्परता बरती थी।

  • उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां कि इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित कर जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक प्रबन्धक, सचिव या आफीसर की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उसकी ओर से हुई किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य आफीसर की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उसकी ओर से हुई किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य आफीसर उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरूद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने के दायित्व के अधीन होगा।
स्पष्टीकरण :-

इस धारा के प्रयोजनों के लिए :-

  • ‘कम्पनी’ से कोई निगमित निकाय अभिप्रति है और उसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम आता है, तथा
  • फर्म के सम्बन्ध में ‘निदेशक’ से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है।

22.    सदभावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए परित्राण :-

कोई भी वाद अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही इस अधिनियम के अधीन सदभावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए सरकार या सरकार के किसी आफीसर के विरूद्ध न होगी।

23.    निदेश देने की शक्ति :-

केन्द्रीय सरकार किसी राज्य सरकार को ऐसे निर्देश दे सकेगी जो केन्द्रीय सरकार को इस अधिनियम या तदधीन बनाए गए किसी नियम के उस राज्य में निष्पादित करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों।

24.    छूट :-

इस अधिनियम में कोर्इ बात किसी ऐसे अधिसूचित किस्म या उपकिस्म के बीज को लागू नहीं होगी जो किसी व्यक्ति द्वारा उगाया गया हो और उसके द्वारा स्वयं अपने परिसर में सीधें किसी अन्य व्यक्ति को, उस व्यक्ति द्वारा बोए जाने या रोपण के प्रयोजनार्थ उपयोग में लाए जाने के लिए बेचा या परिदत्त किया गया हो।