कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

धारा 4(1) बी

1. प्रभाग/प्राधिकरण का संगठन एवं कार्य

कृषि विभाग वर्ष 1875 में स्थापित किया गया था। प्रारम्भ में विभाग का कार्य मात्र कृषि सम्बन्धी आंकडों के संकलन तथा आदर्श प्रक्षेत्रों की स्थापना तक सीमित था, तदोपरांत वर्ष 1880 में विभाग को भू-अभिलेख विभाग से सम्बद्ध कर दिया गया है। गवर्नमेंट आफ इण्डिया एक्ट-1919 के पारित होने के उपरांत राज्य सरकार द्वारा कृषि नीति प्रतिपादित किए जाने के फलस्वरूप कृषि विभाग को 01 दिसम्बर,1919 से एक स्वतंत्र विभाग बनाया गया तथा इसकी विधिवत स्थापना 01 मई ,1920 को हुई। विभाग के तत्कालीन क्रिया कलापों में कृषि उत्पादन के अतिरिक्त गन्ना उत्पादन, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण एवं कोलोनाइजेशन सम्बन्धी गतिविधियों का समावेश था। कालान्तर में 1964 के दौरान कोलानाइजेशन योजना समाप्त हो गयी एवं वर्ष 1974 में उद्यान एवं खाद्य प्रसंसकरण विभाग पृथक विभाग के रूप में सृजित कर दिया गया। सम्पत्ति उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग अपने वर्तमान स्वरूप में विविध सस्थाओं यथा उत्तर प्रदेश बीज प्रमाणीकरण सस्था एवं यू.पी.एग्रो. आदि के सहयोग से कृषि उत्पादन सम्बन्धी क्रिया कलापों को गति प्रदान करने में प्रयासरत है।कृषि विभाग, उ.प्र. की बेवसाइट http://agriculture.up.nic.in उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम की बेबसाइट- http://upseed.co.in स्थापित की गयी है, जिसमें उनसे सम्बधित कार्यों का पूर्ण विवरण दिया गया है।कृषि विभाग का मूल उद्देश्य कृषि विकास की दर को गति प्रदान करने के साथ-साथ फसलोत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि करना है,जिससे प्रदेश के कृषकों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर उनके जीवन-स्तर को ऊंचा उठाया जा सके। इसके अतिरिक्त प्रदेश में व्याप्त क्षेत्र विशेष के लिए उपयुक्त योजनाओं का क्रियांवयन एवं कृषकों को रोजगार के नये अवसर प्रदान करना विभाग के उद्देश्यों में परिकल्पित है। विभिन्न फसलों की उत्पादकता एवं वृद्धि हेतु विभाग द्वरा विभिन्न उपज पालन योजनाओं एवं कार्यक्रमों का क्रियांवयन कृषकों को बीज उर्वरक कीट नाशक रसायन कृषि रक्षा उपकरण फसल ऋण की आपूर्ति निर्धारित समय सारिणी के अनुरूप सुनिश्चित करना, कृषि निवेशों की गुणवत्ता निवेशों पर बल देना, कृषि लागत में कमी, मृदा स्वास्थ्य तथा गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पादन को सुनिश्चित करना, प्रदेश में स्थित समस्यग्रस्त भूमि यथा-जलमग्न,ऊसर, बंजर भूमि को उपचारित करके कृषि क्षेत्रफल में वृद्धि करना, मुख्य उद्देश्य है।

2. प्रभाग/प्राधिकरण के अधिकारियों एवं कार्मिकों के कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व

उत्तर प्रदेश शासन स्तर पर कृषि विभाग के अनुभागों के मध्य कार्य आवंटन एवं उनके द्वारा निस्तारित किए जाने वाले कार्यों का विवरण संलग्नक-1 तथा अधिकारियों के मध्य कार्य आवंटन का विवरण सग्नक-2 पर उपलब्ध है।

3-प्रभाग/प्राधिकरण में सम्पादित किए जा रहे कार्यों के सम्बन्ध में निर्णय की प्रक्रिया तथा पर्यवेक्षक के विभिन्न स्तर पर जवाबदेही का निर्धारण

कृषि विभाग में नीतिगत मामलों पर विभाग के सचिव/प्रमुख सचिव द्वारा विभागीय मंत्री जी का अनुमोदन प्राप्त किया जाता है। अन्य सभी मामलों में निर्णय लेने का अधिकार प्रमुख सचिव/सचिव मे निहित है। पर्यवेक्षक एवं दायित्व का निर्धारण भी इसी क्रम में किये जाते है।