कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

अधिनियन-2005

16. पदावधि और सेवा की शर्तें
  1. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, पांच वर्ष की अवधि के लिए पद धारित करेगा और पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा : परन्तु कोई राज्य मुख्य सूचना आयुक्त पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने के पश्चात् उस रूप में पद धारित नहीं करेगा।
  2. प्रत्येक राज्य सूचना आयुक्त उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता हैं पांच वर्ष की अवधि के लिए यह पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से कोई भी पूर्वतर हो, पद धारित होगा : परन्तु प्रत्येक राज्य सूचना आयुक्त इस उपधारा के अधीन अपना पद रिक्त करने पर धारा 15 की उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट रीति में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होगा । परन्तु यह और कि जहां राज्य सूचना आयुक्त की राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ति की जाती है, वहां उसकी पदावधि राज्य सूचना आयुक्त और राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में कुल मिलाकर पांच वर्ष से अधिक नहीं होगी।
  3. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त अपना पद ग्रहण करने से पूर्व राज्यपाल या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त कियी अन्य व्यक्ति के समक्ष पहली अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए उपवर्णित प्रारूप के अनुसार शपथ या प्रतिज्ञा लेगा और उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा।
  4. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त, किसी भी समय, राज्यपाल को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपने पद का त्याग कर सकेगा :परन्तु राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त को धारा 17 में विनिर्दिष्ट रीति से हटाया जा सकेगा।
    1. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त को संदेय वेतन और भत्ते तथा उसके सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें वहीं होंगी, जो किसी निर्वाचन आयुक्त की हैं।
    2. राज्य सूचना आयुक्त को संदेय वेतन और भत्ते तथा उसकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें वही होंगी जो राज्य के मुख्य सचिव की है : परन्तु यदि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त अपनी नियुक्ति के समय भारत सरकार के अधीन या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी पूर्व सेवा के संबंध में कोई पेंशन (अक्षमता या क्षति पेंशन से भिन्न) प्राप्त कर रहा है तो राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त के रूप में सेवा के संबंध में उसके वेतन में से उस पेंशन की रकम को, जिसके अंतर्गत पेंशन का ऐसा भाग जिसे संराशिकृत किया गया था और सेवानिवृत्ति उपदान के समतुल्य पेंशन को छोड़कर अन्य प्रकार के सेवानिवृत्ति फायदों के समतुल्य पेंशन भी है, रकम को कम कर दिया जाएगा : परन्तु यह और कि जहां राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त, अपनी नियुक्ति के समय किसी केन्द्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी सरकारी कंपनी में की गई किसी पूर्व सेवा के संबंध में सेवानिवृत्ति फायदे प्राप्त कर रहा है वहां राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त के रूप में सेवा के संबंध में उसके वेतन में से सेवानिवृत्ति फायदों के समतुल्य पेंशन की रकम कम कर दी जाएगी : परन्तु यह और कि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त के वेतन, भत्तों और सेवा की अन्य शर्तों में उनकी नियुक्ति के पश्चात् उनके लिए अलाभकारी रूप में परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
  5. राज्य सरकार, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त को इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के दक्ष पालन के लिए उतने अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध कराएगी जितने आवश्यक हों और इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए नियुक्त किए गए अधिकारियों और कर्मचारियों के संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें वह होंगी, जो विहित की जाएं।
17. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त का हटाया जाना
  1. उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त को राज्यपाल के आदेश द्वारा साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर उसके पद से तभी हटाया जाएगा, जब उच्चतम न्यायालय ने, राज्यपाल द्वारा उसे किए गए निर्देश पर जांच के पश्चात् यह रिपोर्ट दे दी हो कि, यथास्थिति, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त को उस आधार पर हटा दिया जाना चाहिए।
  2. राज्यपाल, उस राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त को जिसके विरूद्ध उपधारा (1) के अधीन उच्चतम न्यायालय के निर्देश किया गया है, ऐसे निर्देश पर उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट की प्राप्ति पर राज्यपाल द्वारा आदेश पारित किए जाने तक उसके पद से निलंबित कर सकेगा और यदि आवश्यक समझे तो ऐसी जांच के दौरान कार्यालय में उपस्थित होने से प्रतिषिद्ध भी कर सकेगा।
  3. उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी राज्यपाल, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त को, आदेश द्वारा पद से हटा सकेगा, यदि यथास्थिति, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त-
    1. दिवालिया न्यायनिर्णीत है। या
    2. वह ऐसे किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया गया है, जिसमें राज्यपाल की राय में नैतिक अधमता अंतवर्लित है । या
    3. वह अपनी पदावधि के दौरान अपने पद से परे किसी वैतनिक नियोजन में लगा हुआ है। या
    4. राज्यपाल की राय में, मानसिक या शारीरिक अक्षमता के कारण वह पद पर बने रहने को अयोग्य हैं। या
    5. उसने ऐसे वित्तीय या अन्य हित अर्जित किए हैं, जिनसे, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है।
  4. यदि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त, किसी रूप में, राज्य सरकार द्वारा या उसकी ओर से की गई किसी संविदा या करार से संबद्ध या उसमें हितबद्ध रहा है या किसी निगमित कंपनी के सदस्य से अन्यथा किसी रूप में और उसके अन्य सदस्यों के साथ संयुक्त रूप से उसके लाभ में उससे प्रोद्भूत होने वाले किसी फायदे या परिलब्धियों में हिस्सा लेता है तो वह उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए कदाचार का दोषी समझा जायेगा।