कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

अधिनियन-2005

14. सूचना आयुक्त या मुख्य सूचना आयुक्त का हटाया जाना
  1. उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त को राष्ट्रपति के आदेश द्वारा साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर उसके पद से तभी हटाया जाएगा, जब उच्चतम न्यायालय ने, राष्ट्रपति द्वारा उसे किए गये निर्देश पर जांच के पश्चात यह रिपोर्ट दी हो कि, यथास्थिति, मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त को उस आधार पर हटा दिया जाना चाहिए।
  2. राष्ट्रपति, उस मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त को, जिसके विरूद्ध उपधारा (1) के अधीन उच्चतम न्यायालय को निर्देश किया गया है, ऐसे निर्देश पर उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट प्राप्त होने पर राष्ट्रपति द्वारा आदेश पारित किए जाने तक पद से निलंबित कर सकेगा और यदि आवश्यक समझे तो, जांच के दौरान कार्यालय में उपस्थित होने से भी प्रतिषिद्ध कर सकेगा।
  3. उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी राष्ट्रपति, किसी मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त को पद से हटाने का आदेश कर सकेगा, यदि, यथास्थिति, मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त
    1. दिवालिया न्यायनिर्णीत है। या
    2. वह ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया गया है, जिसमें राष्ट्रपति की राय में, नैतिक अधमता अन्तर्वलित है। या
    3. अपनी पदावधि के दौरान, अपने पद के कर्तव्यों से परे किसी वैतनिक नियोजन में लगा हुआ है। या
    4. राष्ट्रपति की राय में, मानसिक या शारीरिक अक्षमता के कारण वह पद पर बने रहने के अयोग्य है ।
    5. उसने ऐसे वित्तीय और अन्य हित अर्जित किए हैं, जिनसे किसी मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त के रूप में उस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है।
  4. यदि मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त, किसी रूप में भारत सरकार द्वारा या उसकी ओर से की गई किसी संविदा या करार से संबद्ध या उसमें हितबद्ध रहा है या किसी निगमित कंपनी के सदस्य से अन्यथा किसी रूप में और उसके अन्य सदस्यों के साथ संयुक्त रूप में उसके लाभ में या उससे प्रोद्भूत होने वाले किसी फायदे या परिलब्धियों में हिस्सा लेता है तो वह, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, कदाचार का दोषी समझा जाएगा।

अध्याय 4

राज्य सूचना आयोग
राज्य सूचना आयोग का गठन।
15.
  1. प्रत्येक राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा-(राज्य का नाम) सूचना आयोग के नाम से ज्ञात एक निकाय का, इस अधिनियम के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग और उसे सौंपे गए कृत्यों का पालन करने के लिए गठन करेगी।
  2. राज्य सूचना आयोग निम्नलिखित से मिलकर बनेगा-
    1. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त । और
    2. दस से अनधिक उतने राज्य सूचना आयुक्त, जितने आवश्यक समझे जाएं।
  3. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा निम्नलिखित से मिलकर बनी समिति की सिफारिश पद की जाएगी,
    1. मुख्यमंत्री, जो समिति का अध्यक्ष होगा ।
    2. विधानसभा मे विपक्ष का नेता और
    3. मुख्यमंत्री द्वारा नामनिर्दिष्ट मंत्रिमंडलीय मंत्री।
    स्पष्टीकरण
  4. शंकाओं को दूर करने के प्रयोजनों के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां विधान सभा में विपक्षी दल के नेता को उस रूप में मान्यता नहीं दी गई है, वहां विधान सभा में सरकार के विपक्षी एकल सबसे बड़े समूह के नेता को विपक्षी दल का नेता माना जाएगा।
  5. राज्य सूचना आयोग के कार्यो का साधारण अधीक्षण, निर्देशन और प्रबंधन राज्य मुख्य सूचना आयुक्त मे निहित होगा, जिसकी राज्य सूचना आयुक्तों द्वारा सहायता की जाएगी और वह सभी ऐसी शक्तियों का प्रयोग और सभी ऐसे कार्य और बातें कर सकेगा जो राज्य सूचना आयोग द्वारा इस अधिनियम के अधीन किसी अन्य प्राधिकारी के निर्देशों के अध्यधीन रहे बिना स्वतंत्र रूप से प्रयोग की जाएं या की जा सकती हो।
  6. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त विधि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समाजसेवा, प्रबंधन, पत्राकरिता, जन माध्यम या प्रशासन और शासन में व्यापक ज्ञान और अनुभव वाले समाज में प्रख्यात व्यक्ति होंगे।
  7. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त, यथास्थिति, संसद का सदस्य या किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के विधान-मंडल का सदस्य नहीं होगा या कोई अन्य लाभ वाला पद धारण नहीं करेगा या किसी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं होगा या कोई कारोबार नहीं करेगा या कोई वृत्ति नहीं करेगा।
  8. राज्य सूचना आयोग का मुख्यालय, राज्य में ऐसे स्थान पर होगा, जो राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिदिष्ट करे और राज्य सूचना आयोग, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से राज्य में अन्य स्थानों पर अपने कार्यालय स्थापित कर सकेगा।