कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

अधिनियन-2005

9. कतिपय मामलो में पहुंच को अस्वीकृत करने के आधार
    धारा 8 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना कोई यथास्थिति केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी सूचना के किसी अुनरोध को वहां अस्वीकार कर सकेगा जहां पहुंच उपलब्ध कराने के ऐसे अनुरोध में राज्य से भिन्न किसी व्यक्ति के विद्यमान प्रतिलिप्यधिकार का उल्लंघन अन्तर्वलित है।
10. पृथकरणीयता
  1. जहॉ सूचना तक पहुच अनुरोध को इस आधार पर अस्वीकार किया जाता है, कि यह ऐसी सूचना के संबंध में है जो प्रकट किए जाने से छूट प्राप्त है वहाँ इस अधिनियम मे किसी बात के होते हुए भी अभिलेख के उस भाग तक पहुच अनुदत्त की जा सकती है जिसमें कोई ऐसी सूचना अंतर्विष्ट नहीं हैं जो इस अधिनियम के अधीन प्रकट किये जाने से छूट प्राप्त है और जो ऐसे भाग से जिसमें छूट प्राप्त सूचना अन्तर्विष्ट है, उचित रूप से पृथक की जा सकती है।
  2. जहॉ उपधारा (1) एक के अधीन अभिलेख के किसी भाग तक पहुच अनुदत्त की जाती है, वहाँ यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी निम्नलिखित सूचना देते हुए आवेदक को एक सूचना देगा कि -
    1. अनुरोध किए गए अभिलेख का केवल एक भाग ही, उस अभिलेख से उस सूचना को जो प्रकटन से छूट प्राप्त है, पृथक करने के पश्चात उपलब्ध कराया जा रहा है ।
    2. विनिश्चिय के कारण जिनके अतंर्गत तथ्य के किसी महत्वपूर्ण प्रश्न पर उस सामग्री का निर्देश देते हुए जिस पर वे विनिश्चय आधारित थें कोई निष्कर्ष भी है ।
    3. विनिश्चय करने वाले व्यक्ति का नाम और पदनाम ।
    4. उसके द्वारा संगठित फीस के ब्यौरे और फीस की वह रकम जिसकी आवेदन से निक्षेप करने की अपेक्षा है । और
    5. सूचना के भाग के अप्रकटन की बाबत विनिश्चय के पुनर्विलोकन के संबंध मे उसके अधिकार, प्रमाणित फीस की रकम या उपलब्ध कराई गई पहुंच का रूप जिसके अन्तर्गत यथास्थिति धारा 19 की उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट वरिष्ठ अधिकारी या केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी की विशिष्टया, समय सीमा, प्रक्रिया और कोई अन्य रूप भी है।
11.
  1. जहॉ किसी यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी का इस अधिनियम के अधीन किए गए अनुरोध पर कोई ऐसी सूचना या उसके किसी भाग को प्रकट करने का आशय है, जो किसी व्यक्ति पर से संबंधित है या उसके द्वारा प्रदाय किया गया है और उस पर व्यक्ति द्वारा उसे गोपनीय माना गया है, वहाँ केन्द्रीय यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी या अनुरोध प्राप्त होने से पांच दिन के भीतर ऐसे पर व्यक्ति को अनुरोध की और इस तथ्य की लिखित रूप में सूचना देगा कि यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी का उक्त सूचना या अभिेलेखें या उसके किसी भाग को प्रकट करने का आशय है और इस बाबत कि सूचना प्रकट की जानी चाहिए। या नही लिखित में या मौखिक रूप से निवेदन करने के लिए, पर व्यक्ति को आमत्रित करेगा तथा सूचना के प्रकटन की बाबत कोई विनिश्चत करते समय पर व्यक्ति के ऐसे निवेदन को ध्यान में रखा जायेगा। परन्तु विधि द्वारा संरक्षित व्यापार या वाणिज्यिक गुप्त बातों की दशा में,के सिवाए यदि ऐसे प्रकटन में लोकहित, ऐसे पर व्यक्ति के हितों की किसी संभावित अपहानि या क्षति से अधिक महत्वपूर्ण है तो प्रकटन अनुज्ञात किया जा सकेगा।
  2. जहां उपधारा (1) के अधीन यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारों द्वारा पर व्यक्ति पर किसी सूचना या अभिेलेख या उसके किसी भाग की बाबत कोई सूचना तामील की जाती है, वहाँ ऐसे पर व्यक्ति को, ऐसी सूचना की प्राप्ति की तारीख से दस दिन के भीतर प्रस्तावित प्रकटन के विरूद्ध अभ्यावेदन करने का अवसर दिया जायेगा।
  3. धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी धारा 6 के अधीन अनुरध प्राप्त होने के पश्चात चालीस दिन के भीतर यदि पर व्यक्ति को उपधारा (2) के अधीन अभ्यावेदन करने का अवसर दे दिया गया है, तो इस बारे में विनिश्चय करेगा कि उक्त सूचना या अभिलेख या उसके भाग का प्रकटन किया जाए या नही और अपने विनिश्चय की सूचना लिखित में पर व्यक्ति को देगा।
  4. उपधारा (3) के अधीन दी गई सूचना में यह कथन भी सम्मिलित होगा कि वह पर व्यक्ति, जिसे सूचना दी गई है, धारा 19 के अधीन उक्त विनिश्चय के विरूद्ध अपील करने का हकदार है।