कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

अधिनियन-2005

27. नियम बनाने की समुचित सरकार की शक्ति
  1. समुचित सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी ।
  2. विशिष्टया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी विषय के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्
    1. धारा-4 की उपधारा (4) में प्रसारित किए जाने वाले माध्यम की लागत या माध्यम का प्रिन्ट लागत मूल्य ।
    2. धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन संदेय फीस।
    3. धारा 7 की उपधारा (1) और उपधारा (5) के अधीन संदेय फीस
    4. धारा 13 और धारा 16 की उपधारा (7) के अधीन अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के निबंधन और शर्तें।
    5. धारा 16 की उपधारा (10) के अधीन अपीलों का विनिश्चय करते समय यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया
    6. कोई अन्य विषय, जो विहित किए जाने के लिए अपेक्षित हो या विहित किया जाए।
28. निगरानी और रिपोर्ट करना
  1. सक्षम प्राधिकारी, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगा।
  2. विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी विषय के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात
    1. धारा 4 की उपधारा (4) के अधीन प्रसारित की जाने वाली सामग्रियों के माध्यम से लागत या प्रिन्ट मूल्य
    2. धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन संदेय फीस ।
    3. धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन संदेय फीस । और कोई अन्य विषय, जो विहित किए जाने के लिए अपेक्षित हो या विहित किया जाएं ।
29. नियमों का रखा जाना
  1. इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह ऐसी कुल तीस दिन की अवधि के लिए सत्र में हो जो एक सत्र में अथवा दो या अधिक अनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी/समविष्ट हो सकेगी, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाते हैं अथवा दोनों सदन सहमत हो जाते हैं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह नियम, यथास्थिति, केवल ऐसे उपांतरित रूप में ही प्रभावी होगी या निष्प्रभाव हो जाएगा। किन्तु ऐसे परिवर्तन या निष्प्रभाव से उस नियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  2. इस अधिनियम के अधीन किसी राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम अधिसूचित किए जाने के पश्चात यथाशीघ्र राज्य विधान- मंडल के समक्ष रखा जाएगा।
30. निगरानी और रिपोर्ट करना
  1. यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबंध, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, बना सकेगी जो उसे कठिनाई को दूर करने लिए आवश्यक और समीचीन प्रतीत होते हों परन्तु इस अधिनियम के अधीन कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा।
  2. इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जायेगा।
31. निरसन
  1. 31 सूचना स्वातंत्र्य अधिनियम 2002 इसके द्वारा निरसित किया जाता है।