कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

अधिनियन-2005

अध्याय 6

21. प्रकीर्ण
    कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के बार में, जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई हो या की जाने के लिए आशयित हो, किसी व्यक्ति के विरूद्ध न होगी।
22. सद्भावपूर्वक की गई कार्यवाई के लिए संरक्षण
    इस अधिनियम के उपबंधों का, शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 और तत्समय प्रवत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से अन्यथा किसी विधि के आधार तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से अन्य किसी विधि के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखित में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभाव होगा।
23. सद्भावपूर्वक की गई कार्यवाई के लिए संरक्षण
    कोई न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन किए गए किसी आदेश की बाबत कोई वाद, आवेदन या अन्य कार्यवाही ग्रहण नहीं करेगा और ऐसे किसी आदेश को, इस अधिनियम के अधीन अपील से भिन्न किसी रूप में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा।
24. अधिनियम का कतिपय संगठन को लागू होना
  1. इस अधिनियम में अंतर्विष्ट कोई बात, केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित अधिसूचना और सुरक्षा संगठनों को, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट है या ऐसे संगठनों द्वारा उस सरकार को प्रस्तुत की गई किसी सूचना को लागू नहीं होगी: परन्तु भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के अतिक्रमण के अभिकथनों से संबंधित सूचना इस उपधारा से अपवर्जित नहीं होगी : परन्तु यह और कि यदि मांगी गई सूचना मानवाधिकारों के अतिक्रमण के अभिकथनों से संबंधित है तो सूचना केन्द्रीय सूचना आयोग के अनुमोदन के पश्चात् ही दी जाएगी और धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी सूचना के अनुरोध की प्राप्ति के पैंतालीस दिन के भीतर दी जाएगी।
  2. केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में किसी अधिसूचना द्वारा अनुसूची का, उस सरकार द्वारा स्थापित किसी अन्य आसूचना या सुरक्षा संगठन को उसमें सम्मिलित करके या उसमें पहले से विनिर्दिष्ट किसी संगठन का उससे लोक करके, संशोधन कर सकेगी और ऐसी अधिसूचना के प्रकाशन पर ऐसे संगठन को अनुसूची में, यथास्थिति, सम्मिलित किया गया या उससे लोप किया गया समझा जाएगा।
  3. उपधारा (2) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।
  4. इस अधिनियम की कोई बात ऐसे आसूचना और सुरक्षा संगठनों को लागू नहीं होगी जो राज्य सरकार द्वारा स्थापित ऐसे संगठन हैं, जो समय-समय पर उस सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए परन्तु भ्रष्टाचार के अभिकथनों से संबंधित सूचना इस धारा के अधीन अपवर्जित नहीं की जाएगी परन्तु यह और कि यदि मांगी गई सूचना मानव अधिकारों के अभिकथनों से संबंधित है तो सूचना राज्य सूचना आयोग के अनुमोदन के पश्चात ही दी जाएगी आर धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी सूचना के अनुरोध की प्राप्ति के पैंतालीस दिनों के भीतर दी जाएगी।
  5. उपधारा (4) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना राज्य विधान मंडल के समक्ष रखी जाएगी।

25. निगरानी और रिपोर्ट करना
  1. यथास्थिति, केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, प्रत्येक वर्ष के अंत के पश्चात यथासाध्य शीघ्रता से उसे वर्ष के दौरान इस अधिनियम के कार्यान्वयन के संबंध में एक रिपोर्ट तैयार करेगा और उसकी एक प्रति समुचित सरकार को भेजेगा।
  2. प्रत्येक मंत्रालय या विभाग, अपनी अधिकारिता के भीतर लोक प्राधिकरणों के संबंध में, ऐसी सूचना एकत्रित करेगा और उसे, यथास्थिति, केन्द्री सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को उपलब्ध कराएगा, जो इस धारा के अधीन रिपोर्ट तैयार करने के लिए अपेक्षित है और इस धारा के प्रयोजनों के लिए इस सूचना को प्रस्तुत करने तथा अभिलेख रखने से संबंधित अपेक्षाओं का पालन करेगा।
  3. प्रत्येक रिपोर्ट में, उस वर्ष के संबंध में कथन होगा, जिसमें रिपोर्ट निम्नलिखित से संबंधित है-
  4. यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार प्रत्येक वर्ष के अन्त के पश्चात्, यथासाध्यशीघ्रता से, उपधारा (1) में निर्दिष्ट यथास्थिति, केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग की रिपोर्ट की एक प्रति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष या जहां राज्य विधान-मंडल के दो सदन हैं वहां प्रतयेक सदन के समक्ष और जहां राज्य विधान-मंडल का एक सदन है वहां उस सदन के समक्ष रखवाएगी।
  5. यदि आयोग को ऐसा प्रतीत होता है कि इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का प्रयोग करने के संबंध में किसी लोक प्राधिकारी की पद्धति इस अधिनियम के उपबंधों या भावना के अनुरूप नहीं है तो वह प्राधिकारी को ऐसे उपाय विनिर्दिष्ट करते हुए सिफारिश कर सकेगा, जो उसकी राय में ऐसी अनुरूपता को बढ़ाने के लिए किए जाने चाहिए।

26. केन्द्रीय सरकार द्वारा कार्यक्रम तैयार किया जाना
  1. केन्द्रीय सरकार वित्तीय और अन्य संसाधनों की उपलब्धि की सीमा तक-
    1. जनता की, विशेष रूप से, उपेक्षित समुदायों की, इस अधिनियम के अधीन अनुध्यात अधिकारों का प्रयोग करने के ज्ञान में वृद्धि करने के लिए शैक्षिक कार्यक्रम बना सकेगी और आयोजित कर सकेगी
    2. लोक प्राधिकारियों को, खंड (क) में निर्दिष्ट कार्यक्रमों को बनाने और उनके आयोजन में भाग लेने और उनके लिए ऐसे कार्यक्रम करने के लिए बढ़ावा दे सकेगी।
    3. लोक प्राधिकारियों द्वारा उनके क्रियाकलापों के बारे में सही जानकारी का समय से और प्रभावी रूप से प्रसारित किए जाने को बढ़ावा दे सकेगी ।
    4. लोक प्राधिकरणों के, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारियों या राज्य सूचना अधिकारियों को प्रशिक्षित कर सकेगी और लोक प्राधिकरण द्वारा अपने प्रयोग के लिए सुसंगत प्रशिक्षण सामग्रियां पेश कर सकेगी।
  2. समुचित सरकार, इस अधिनियम के प्रारम्भ से अट्ठारह मास के भीतर अपनी राजभाषा में, सहज व्यापक रूप और रीति में ऐसी सूचना वाली एक मार्गदर्शिका संकलित करेगी, जिसकी ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा युक्तियुक्त रूप में अपेक्षा की जाए, जो अधिनियम में विनिर्दिष्ट किसी अधिकार का प्रयोग करना चाहता है।
  3. समुचित सरकार, यदि आवश्यक हो, उपधारा (2) में निर्दिष्ट मार्गदर्शी सिद्धांतों को नियमित अंतरालों पर अद्यतन और प्रकाशित करेगी, जिनमें विशिष्टतया और उपधारा (2) की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना निम्नलिखित सम्मिलित होगा-
    • इस अधिनियम के उद्देश्य ।

      1. धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्रत्येक लोक प्राधिकरण, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी का डाक और गली का पता, फोन और फैक्स नम्बर और यदि उपलब्ध हो तो उसका इलैक्ट्रानिक डाक पता ।
      2. वह रीति और प्रारूप, जिसमें, यथास्थिति, किसी केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी को किसी सूचना तक पहुंच का अनुरोध किया जाएगा।
      3. इस अधिनियम के अधीन लोक प्राधिकरण के किसी, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी से उपलब्ध सहायता और उसके कर्तव्य ।
      4. केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग से उपलब्ध सहायता ।
      5. इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त या अधिरोपित किसी अधिकार या कर्तव्य की बाबत किसी कार्य या कार्य करने में असफल रहने के संबंध में विधि में उपलब्ध सभी उपचार, जिनके अंतर्गत आयोग को अपील फाइल करने की रीति भी है ।
      6. धारा 4 के अनुसार अभिलेखों के प्रवर्गों के स्वैच्छिक प्रकटन के लिए उपबंध करने वाले उपबंध।
      7. किसी सूचना तक पहुंच के लिए अनुरोधों के संबंध में संदत्त की जाने वाली फीसों से संबंधित सूचनाएं।
      8. इस अधिनियम के अनुसार किसी सूचना तक पहुंच प्राप्त करने के संबंध में बनाए गए या जारी किए गए कोई अतिरिक्त विनियम या परिपत्र।
  4. समुचित सरकार को, यदि आवश्यक हो, नियमित अंतरालों पर मार्गदर्शी सिद्धांतों के अद्यतन और प्रकाशित करना चाहिए।