कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

बाजरा

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उत्तर प्रदेश में क्षेत्रफल की दृष्टि से बाजरा का स्थान गेहूं धान और मक्का के बाद आता है। कम वर्षा वाले स्थानों के लिए यह एक अच्छी फसल हैं। 40 से 50 सेमी० वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। बाजरा की खेती मुख्यतः आगरा, बरेली एवं कानपुर मण्डलों मे होती है। विगत पांच वर्षो में क्षेत्रफल, उत्पादन एवं उत्पादकता के आंकड़े परिशिष्ट-1 में दिये गये हैं।

1. प्रजातियों का चयन

अच्छी उपज प्राप्त करने हेतु उन्नतिशील प्रजातियों का शुद्ध बीज ही बोना चाहिए। बुवाई के समय एवं क्षेत्र अनुकूलता के अनुसार प्रजाति का चयन करें। विभिन्न प्रजातियों की विशेषतायें तथा उपज क्षमता निम्न तालिका में दर्शायी गयी हैं।

बाजरा के लिये उन्नतिशील प्रजातियां

प्रजाति पकने की अवधि ऊचाई (सेमी० ०) दाने की उपज कु०/हे० सूखे चारे की उपज कु०/हे० बाली के गुण
अं. संकुल
आई.सी.एम.बी-155 80-100 200-250 18-24 70-80 लम्बी मोटी
डब्लू.सी.सी.-75 85-90 185-210 18-20 85-90 मध्यम लम्बी ठोस
न.दे.यफ.बी.-3 (नरेन्द्र चारा बाजरा-3) 100-110 220-230 18-22 100-125 लम्बी मोटी, मध्यम
आई.सी.टी.पी.-8203 70-75 70-95 16-23 60-65 लम्बी ठोस
राज-171 70-75 150-210 18-20 50-60 पतली/लम्बी
ब. संकर
पूसा-322 75-80 150-210 25-30 40-50 मध्यम ठोस
पूसा-23 80-85 180-210 17-23 40-50 मध्यम ठोस
आई.सी.एम.एच.-451 85-90 175-180 20-23 50-60 मोटा ठोस

2. भूमि का चुनाव
बाजरा के लिए हल्की या दोमट बलुई मिट्टी उपयुक्त होती है। भूमि का जल निकास उत्तम होना आवश्यक हैं।

3. खेत की तैयारी
पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा अन्य 2-3 जुताइयां देशी हल अथवा कल्टीवेटर से करके खेत तैयार कर लेना चाहिए।

4. बुवाई का समय तथा विधि
बाजरे की बुवाई जुलाई के मध्य से अगस्त से मध्य तक सम्पन्न कर लें। बुवाई 50 सेमी० ० की दुरी पर 4 सेमी० गहरे कूंड में हल के पीछे करें।

5. बीज दर
4-5 किलोग्राम प्रति हे0

6. बीज का उपचार
यदि बीज उपचारित नहीं है तो बोने से पूर्व एक किग्रा० बीज को थीरम के 2.50 ग्राम से शोधित कर लेना चाहिए। अरगट के दोनों को 20 प्रतिशत नमक के घोल में डुबोकर निकाला जा सकता है।

7. उर्वरको का प्रयोग
मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। यदि परीक्षण के परिणाम उपलब्ध न हो तो संकर प्रजाति के लिए 80-100 किलोग्राम नत्रजन] 40 किलोग्राम फास्फोरस, एवं 40 किलोग्राम पोटाश तथा देशी प्रजाति के लिए 40-45 किग्रा० नत्रजन, 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हे० प्रयोग करें। फास्फोरस पोटाश की पूरी मात्रा तथा नत्रजन की आधी मात्रा बुवाई से पहली बेसल ड्रेसिंग और शेष नत्रजन की आधी मात्रा टापड्रेसिंग के रूप में जब पौधे 25-30 दिन के हो जाने पर देनी चाहिए।

8. छटनी (थिनिंग) तथा निराई-गुडाई
बाजरा की खेती में निराई-गुड़ाई का अधिक महत्व है। निराई-गुड़ाई द्वारा खरपतवार नियंत्रण के साथ ही आक्सीजन का संचार होता है जिससे वह दूर तक फैल कर भोज्य पदार्थ को एकत्र कर पौधों को देती है। पहली निराई जमाव के 15 दिन बाद कर देना चाहिए और दूसरी निराई 35-40 दिन बाद करनी चाहिए।
बाजरा में खरपतवारों को नष्ट करने के लिए