कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

गुणवत्ता नियंत्रण

प्रदेश में प्रति इकाई क्षेत्रफल से अधिकतम उत्पादन लेने वाले निवेशों में से महत्वपूर्ण निवेश उर्वरक एवं कीटनाशी है भविष्य में भी टिकाऊ खेती में इन निवेशों का महत्वपूर्ण योगदान बना रहेगा। एफ0ए0ओ0 के अनुसार खाद्य उत्पादन की 50 प्रतिशत बढ़ोत्तरी निवेशो के सदुपयोग से होती है। एक बार नोबल पुरस्कार महान कृषि वैज्ञानिक नारमन वोरलॉग ने कहा था यदि अधिक उपज देने वाली प्रजातियॉ हरित क्रान्ति में उत्प्रेरक का कार्य करती हैं तो उर्वरको का प्रयोग ईंधन शक्ति का कार्य करता है।

हमारे देश में विगत 4 दशकों में उर्वरकों के प्रयोग की बढ़ोत्तरी 17 गुना बढ़ी है जिसके कारण वर्ष 2001-2002 एवं 2003-2004 में देश का रिकार्ड खाद्यान्न उत्पादन 212 मेट्रिक टन पहुंच गया। खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोत्तरी तो हुई किन्तु इसके परिणामस्वरूप मृदा स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा है। इस संदर्भ में उर्वरकों एवं कीटनाशियों के गुणवत्ता का भी प्रभाव हमारी मृदा को प्रभावित किया है।

प्रचुर मात्रा में गुणवत्ता युक्त उर्वरक कृषकों तक पहुंचे, को दृष्टिगत रखते हुए भारत सरकार ने उर्वरकों एवं कीटनाशी रसायनों को आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत रखा, जिनमें उर्वरकों को उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश-1985 तथा कीटनाशी रसायनों को कीटनाशी अधिनियम-1968 द्वारा इन वस्तुओं के गुणवत्ता को नियंत्रित एवं वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाया गया है। उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश में विशेष कमियां थीं जिन्हें दूर करने हेतु कई परिवर्तन किए गये और नवीन परिवर्तन वर्ष 2017 में पूर्णकर 39 क्लाज 5 शिड्यूल, 20 फार्मस एवं 99 रासायनिक उर्वरक, 11 जैव उर्वरक, 7 जैविक उर्वरक, 1 अखाद्य तेल रहित केक, प्रकार के उर्वरकों सूचीबद्ध कर अनुप्रयोगी बनाया गया है। इसके साथ ही 6 अस्थाई उर्वरक तथा प्रदेश 10 प्रचलित उर्वरक को भी सूचीबद्ध किया गया है। इसके साथ ही कृषि विभाग, उ०प्र० प्रान्त हेतु 4 उर्वरक मिश्रण तथा 5 सूक्ष्म पोषक तत्व उर्वरक मिश्रण को भी फसलों एवं जलवायुविक दशाओं हेतु सूचीबद्ध किया है।

वर्ष 1975-76 में राज्य व केन्द्र पुरोनिधानित योजना के अन्तर्गत उर्वरक एवं कीटनाशी नमूनों के विश्लेषण हेतु लखनऊ में उर्वरक एवं कीटनाशी नियंत्रण प्रयोगशाला स्वीकृत की गई। इस प्रयोगशाला में सितम्बर-1977 से उर्वरकों एवं अक्टूबर-1978 से कीटनाशी नमूनों के विश्लेषण का कार्य निरन्तरता से हो रहा है। उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 एवं कीटनाशी अधिनियम-1968 के अनुपालन का दायित्व राज्य सरकार पर है। राज्य सरकार को इन निवेशों के उत्पादन, निरीक्षण एवं विक्रय को नियंत्रित करने का अधिकार प्राप्त है। प्रदेश का कृषि विभाग विक्रय हेतु प्रदर्शित उर्वरकों एवं कीटनाशी रसायनों के नमूने लेने तथा उन्हें गुण नियंत्रण प्रयोगशालाओं में उनके विश्लेषण की व्यवस्था करता है।

प्रयोगशाला के उद्देश्य
  • प्रदेश में उर्वरक विर्निमाताओं एवं विक्रेताओं को उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 तक उर्वरक नियंत्रण संशोधन आदेश 2017 में निहित प्राविधानों के अन्तर्गत उच्च गुणवत्ता युक्त उर्वरक के विर्निमाण हेतु प्रेरित करना तथा प्रदेश के कृषकों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराने में सहयोग प्रदान करना।
  • प्रदेश में कृषि रक्षा रसायनों की गुणवत्ता को कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं नियम 1971 एवं आर्डर 1986 कें प्राविधनान्तर्गत विर्निमाताओं को गुणवत्तायुक्त रसायन निर्मित करने हेतु प्रेरित करना तथा कृषकों को गुणवत्ता युक्त कृषि रक्षा रसायन उपलब्ध कराने में सहयोग प्रदान करना।

उर्वरक विश्लेषण

उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण की प्रावस्थाएं
उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण दो क्रमागत चरणों में होती हैं

  • उर्वरक नमूने को ग्रहीत करना
  • नमूने का विश्लेषण

उपरोक्त दोनों चरण समान महत्व के होते हैं विश्लेषण की कोई भी विधि नमूना लेने अथवा उसे तैयार करने की त्रुटियों को पृथक नहीं कर सकेगी और न ही उसका निवारण कर सकेगी।