कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

स्वावलम्बन योजना

किसानों के हितलाभ के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषि में प्रशिक्षित युवाओं की सेवाओं का उपयोग करने हेतु उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक कार्यक्रम संचालित किया जाना है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को उनके फसल उत्पादों के लिए कृषि केन्द्र (एग्री जंक्शन) के बैनर तले समस्त सुविधायें ‘‘ वन स्टाफ शॉप‘‘ के माध्यम से कृषि स्नातकों द्वारा कराये जाने का प्रस्ताव।

यह कृषि केन्द्र निम्नवत् सेवाओं को एक छत के नीचे उपलब्ध कराये जाने की सुविधा प्रदान करेंगे

  • मृदा परीक्षण सुविधा तथा उर्वरक उपयोग हेतु संस्तुतियां।
  • उच्च गुणवत्ता के बीज, उर्वरक, जैव उर्वरक, माइक्रोन्यूट्रियन्ट्स, वर्मी कम्पोस्ट, कीटनाशक तथा जैव कीटनाशकों सहित समस्त कृषि निवेशों की आपूर्ति।
  • लघु कृषियंत्रों को किराये पर उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था।
  • प्रसार सेवायें तथा कृषि प्रक्षेत्र निर्देशन।

उक्त के अतिरिक्त कृषि केन्द्रों द्वारा कृषि उपकरणों की मरम्मत तथा अनुरक्षण पशु आहार, कृषि उत्पादों एवं प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों का विक्रय, मौसम/ विपणन व अन्य सम्बन्धित सूचनाओं के लिए सूचना विज्ञान की स्थापना कराया जायेगा।

राज्य सरकार द्वारा कृषि प्रशिक्षित उद्यामियों को निम्न सुविधायें प्रदान की जायेंगी

  • कृषि व्यवसायं गतिविधियों के लिए लाइसेन्स प्राप्त करने में सहायता तथा लाइसेन्स फीस के व्यय की प्रतिपूर्ति।
  • इस उद्देश्य के लिए बैंकों से ऋण प्राप्त करने में सहायता तथा 04 प्रतिशत की दर से ब्याज अनुदान की व्यवस्था। यह अनुदान बैंक की बैंक इन्डेड सब्सिडी के रूप में रखा जायेगा तथा वर्ष की समाप्ति पर ऋणी के खाते में क्रेडिट कर दिया जायेगा।
  • एक वर्ष तक के लिए परिसर के किराये के 50 प्रतिशत की धनराशि जो रूपया 1000/- से अधिक न हो।
  • स्वतन्त्र कृषि केन्द्र व्यवसायं की स्थापना हेतु कृषि व्यवसाइयों को प्रशिक्षण प्रदान कराना।
  • लघु कृषि यंत्रों को अनुदानित दर पर किराये पर उपलब्ध कराना ।

प्रदेश की सभी विकास खण्डों एवं तहसील मुख्यालयों पर स्थापित ‘‘वन स्टाफ शाप्स‘‘ पर किसान गुणवत्ता, कृषि निवेश एवं कृषि प्रक्षेत्र निर्देशन प्राप्त कर सकेंगे। इसी के साथ युवा कृषि स्नातक स्वयं स्वरोजगार के लिए सक्षम होंगे। वित्तीय वर्ष 2016-17 में 1000 एग्री जंक्शन केन्द्रों (वर्ष 2015-16 के अवशेष लक्ष्य 399 को सम्मिलित करते हए) की स्थापना का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें रूपये 60,000/-प्रति केन्द्र अनुदान दिये जाने की व्यवस्था शासन द्वारा अनुमन्य की गयी है, परन्तु शासन निदेशालय के पत्रांक-प्रसार 57 दिनांक 26.04.2016 के द्वारा प्रशासनिक/वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने हेतु प्रमुख सचिव (कृषि), उ0प्र0 शासन को प्रेषित की गयी थी। शासन के पत्र संख्या-518/12-3-2016-100(4)/2015 दिनांक 29.04.2016 द्वारा उक्त योजना हेतु सम्पूर्ण प्राविधानित धनराशि रूपये 70,500 हजार की वित्तीय स्वीकृति जारी की गयी है। शासन द्वारा योजना की प्रशासनिक स्वीकृति शासन द्वारा जारी नहीं की गयी थी। तत्पश्चात् शासन के पत्र संख्या 684/12-3-2016-100(4)/2015 दिनांक 03.06.2016 के क्रम में प्रेषित निदेशालय के पत्रांक-प्रसार 418 दिनांक– 04.06.2016 प्रशिक्षित कृषि उद्यमी स्वावलम्बन एग्री जंक्शन योजना के सन्दर्भ में वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए कार्य योजना की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध शासन से किया गया था। गत वित्तीय वर्ष 2015-16 में योजना का क्रियान्वयन शासनादेश संख्या-1681/12-3-2015-100(4)/2015 दिनांक 02.11.2015 के अनुरूप किया गया। उक्त शासनादेश के अन्तर्गत ब्याज अनुदान की धनराशि रूपये 42,000/-प्रति केन्द्र 03 वर्ष के लिए प्राविधानित की गयी थी। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2016-17 में ब्याज अनुदान की धनराशि का आंगणन साधारण तरीके से ऋण की धनराशि रूपये 3.50 लाख पर 5 प्रतिशत की दर से करने पर रूपये 52,500/- प्रति केन्द्र निदेशालय स्तर से प्रस्तावित किया गया था, जो कि बैंकिंग गणना के आधार पर त्रुटिपूर्ण है। ऋण पर ब्याज अनुदान की धनराशि रूपये 42,000/- प्रति केन्द्र के आधार पर प्रस्तावित कार्य योजना की प्रशासनिक स्वीकृति इस शर्त के साथ प्रदान की गयी कि उक्त योजना का क्रियान्वयन शासनादेश संख्या संख्या-1681/12-3-2015-100(4)/ 2015 दिनांक 02.11.2015 के प्राविधानों के अनुसार ही किया जायेगा।