कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

उद्देश्य

कृषि विभाग का मूल उद्देश्य कृषि विकास की दर को गति प्रदान करने के साथ-साथ फसलोत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि करना है, जिससे प्रदेश के कृषकों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर उनके जीवन-स्तर को ऊपर उठाया जा सके। इसके अतिरिक्त प्रदेश के क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए क्षेत्र विशेष हेतु उपयुक्त योजनाओं का क्रियान्वयन एवं कृषकों को रोजगार के नये अवसर प्रदान करना है।


उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किये जा रहे प्रयास :-

  • कृषि उत्पादन की विकास दर प्रति वर्ष 5.1 प्रतिशत बनाये रखते हुए खाद्य सुरक्षा प्रदान करने हेतु कृषि की नवीन तकनीकी का प्रचार-प्रसार तथा कृषकों की कृषि से सम्बन्धित समस्याओं का समाधान।
  • विभिन्न फसलों की उत्पादकता एवं वृद्धि हेतु विभिन्न उपज पालन योजनाओं एवं कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।
  • कृषकों को विभिन्न पारिस्थितिकीय परिस्थितियों में उपयुक्त फसलों से अधिक उत्पादन लेने हेतु विभिन्न योजनाओं के माध्यम से तकनीकी प्रदर्शन का आयोजन एवं उनके परिणामों से कृषकों को परिचित कराना।
  • विभाग द्वारा विभिन्न फसलों की उत्पादकता एवं उत्पादन में वृद्धि हेतु संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।
  • कृषि निवेशों की आपूर्ति निर्धारित समय-सारिणी के अनुरूप कृषकों के मध्य उपलब्ध कराना।
  • कृषि उत्पादन के लिए अपरिहार्य विभिन्न कृषि निवेशों की गुणवत्ता नियंत्रण पर बल देना।
  • दैवी आपदाओं यथा- बाढ़, सूखे की स्थिति आदि में उन परिस्थितियों के अनुसार आकस्मिक योजना बनाकर कृषकों को सही समय पर उचित फसल चक्रों की जानकारी देकर उसी के अनुरूप कृषि निवेशों की व्यवस्था कराना।
  • प्रदेश की समस्याग्रस्त भूमि यथा-जलमग्न, ऊसर, बंजर, बीहड़ आदि को उपचारित करके कृषि क्षेत्रफल में वृद्धि करते हुये उपजाऊ बनाना।
  • कृषि नीति 2013 के सफल क्रियान्वयन का सत्त अनुश्रवण कर निर्धारित प्रतिमानों को साकार करना।
  • कृषि उत्पादन में प्राकृतिक आपदाओं, कीट/रोग आदि जोखिम के कारण होने वाली क्षति की पूर्ति के लिये प्रदेश में संचालित कृषि बीमा योजनाओं को व्यापकता प्रदान करना।