कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

नेशनल कॉप इंश्योरेन्स प्रोग्राम

2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना/पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना

    वर्ष 2016-17 के खरीफ व रबी में प्रदेश के समस्त जनपदों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गयी है जिसमें खरीफ में फसल-धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग, मूँगफली, तिल, सोयाबीन, अरहर व गन्ना एवं रबी में फसल- गेहूँ चना, मटर, मसूर, लाही, सरसों व आलू को अधिसूचित किया गया है। वर्ष 2016-17 जनपद- कुशीनगर व गोरखपुर में औद्योगिक फसल- केला एवं जनपद- फतेहपुर व फिरोजाबाद में औद्योगिक फसल- मिर्च को पुर्नगठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में अधिसूचित किया गया है।
  1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना -
    • यह योजना प्रदेश में खरीफ 2016-17 से चालू की गई है। इस योजना के मुख्य बिन्दु निम्नवत है।
    1. योजना में फसल की बुआई न कर पाने / असफल बुआई की स्थिति, फसल की बुआई से कटाई की अवधि में खड़ी फसलों को प्राकृतिक आपदाओं, रोगों, कृमियों से क्षति की स्थिति तथा फसल कटाई के उपरान्त आगामी 14 दिनों तक खेत में कटी हुई फसल की क्षति की स्थिति में बीमा कवर के रूप में उन सभी कृषकों को वित्तीय सहायता का प्राविधान है जिनके द्वारा फसल का बीमा कराया गया है।
    2. योजना को समस्त जनपदों में ग्राम पंचायत स्तर पर लागू किया गया है।
    3. योजना में ऋणी कृषक अनिवार्य आधार पर अन्य कृषक स्वैच्छिक आधार पर सम्मिलित किये गये है।
    4. बीमित राशि को फसल के उत्पादन लागत के बराबर जनपद स्तर पर अधिसूचित किया गया। सभी फसलों हेतु वास्तविक प्रीमियम दर पर लागू किये गये। प्रीमियम मद में कृषक की देयता को खरीफ में अधिकतम 02 प्रतिशत तथा रबी में अधिकतम 1.5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। नकदी व औद्यनिकी फसलों हेतु प्रीमियम मद में कृषक की देयता को अधिकतम 05 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। कृषक द्वारा वहन किये जाने वाले प्रीमियम अंश से अधिक व वास्तिवक प्रीमियम दर के अन्तर की समस्त धन राशि को प्रीमियम पर अनुदान के रूप में केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा बराबर - बराबर वहन किये जाने का प्राविधान है।
    5. फसल के वास्तिविक प्रीमियम दर की अधिकतम दर निर्धारित नहीं की गई है एवं संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के प्राविधानों के अनुरूप बीमित राशि को कम किये जाने के प्राविधान को योजना में लागू नहीं किया गया है। अतः प्रदेश के प्रत्येक जनपद में फसल की उत्पादन लागत के अनुरूप बीमित राशि निर्धारित की गयी है।
    6. फसलों की क्षति का आंकलन मौसम के अन्त में ग्राम पंचायत में निर्धारित संख्या में सम्पादित फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त उपज के आधार पर किए जाने का प्राविधान है। स्थानिक आपदा - ओला, भू-स्खलन व जल प्लावन से फसल की क्षति की स्थिति में व्यक्तिगत आधार पर क्षति का आंकलन एवं अन्य सभी जोखिमों में ग्राम पंचायत स्तर पर क्षति के आंकलन का प्राविधान है।
    7. योजना में कृषकों को देय समस्त क्षतिपूर्ति को बीमा कम्पनी द्वारा वहन किये जाने को प्राविधान है। केन्द्र व राज्य सरकार को वित्तीय देयता को प्रीमियम पर अनुदान मद तक सीमित रखा गया है।
    8. वर्ष 2016-17 में प्रदेश के जनपद अमरोहा, झांसी, गोरखपुर, मुरादाबाद, शामली, व श्रावस्ती में आई.सी.आई.सी.आई लोम्बार्ड जनरल इनश्योरेंस कम्पनी लि० एवं शेष सभी 69 जनपदों में एग्रीकल्चर इनश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड की योजना की क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में अधिकृत किया गया है।
    9. वर्ष 2017-18 से आगामी खरीफ एवं रबी मौसम में प्रदेश के समस्त जनपदों में भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू किये जाने का प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है।
  2. पुर्नगठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना -
    • इस योजना के मुख्य बिन्दु निम्नवत है।
    1. योजना में प्रतिकूल मौसमी स्थितियों से फसल की सम्भावित क्षति के आधार पर बीमा कवर के रूप में उन सभी कृषको को वित्तीय सहायता का प्राविधान है जिनके द्वारा फसल का बीमा कराया गया है।
    2. योजना को जनपद में ब्लाक में स्थापित मौसम केन्द्र स्तर पर लागू किया गया है। प्रत्येक ब्लाक में 02 स्वचलित मौसम केन्द्र स्थापित है, जिनसे प्राप्त मौसम के प्रतिदिन के आंकड़ों एवं अधिसूचित फसल हेतु निर्धारित मौसमी स्थितियों में अन्तर के आधार पर फसल की सम्भावित क्षति को दृष्टिगत रखते हुए क्षतिपूर्ति का प्राविधान है।
    3. योजना में ऋणी कृषक अनिवार्य आधार पर एवं अन्य कृषक स्वैच्छिक आधार पर सम्मिलित किये गये हैं।
    4. बीमित राशि को फसल के उत्पादन लागत के बराबर जनपद स्तर पर अधिसूचित किया गया। सभी फसलों हेतु वास्तविक प्रीमियम दर लागू किये गये। प्रीमियम मद में कृषक की देयता को खरीफ में अधिकतम 02 प्रतिशत तथा रबी में अधिकतम 1.5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। नकदी व औद्योनिक फसलों हेतु प्रीमियम मद में कृषक की देयता को अधिकतम 05 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। कृषक द्वारा वहन किये जाने वाले प्रीमियम अंश से अधिक व वास्तविक प्रीमियम दर के अन्तर की समस्त धनराशि को प्रीमियम पर अनुदान के रूप में केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा बराबर - बराबर वहन किये जाने का प्राविधान है।
    5. फसल के वास्तविक प्रीमियम दर की अधिकतम दर निर्धारित नहीं की गयी है एवं संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के प्राविधानों के अनुरूप बीमित राशि को कम किये जाने के प्राविधान को योजना में लागू नहीं किया गया है। अतः प्रदेश के जनपद में फसल की उत्पादन लागत के अनुरूप बीमित राशि निर्धारित की गयी है।
    6. योजना में कृषकों को देय समस्त क्षतिपूर्ति को बीमा कम्पनी द्वारा वहन किये जाने का प्राविधान है। केन्द्र व राज्य सरकार की वित्तीय देयता को प्रीमियम पर अनुदान मद तक सीमित रखा गया है।
    7. वर्ष 2016-17 में सभी चयनित 04 जनपदों- कुशीनगर, गोरखपुर, फतेहपुर व फिरोजाबाद में योजना की क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में आई०सी०आई०सी०आर्इ० लोम्बार्ड जनरल इन्श्योरेन्स कम्पनी लि० को योजना की क्रियान्वयन एजेन्सी के रूप में अधिकृत किया गया है।
    8. वर्ष 2017-18 से आगामी वर्षों में प्रदेश के चयनित जनपदों में फसल केला व मिर्च को पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को लागू किये जाने का प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है।