कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

नेशनल मिशन टेक्नोलॉजी

  • कृषि प्रसार के लिए उप मिशन (एस०ए०एम०ई०)
  • बीज एवं रोपण सामग्री के लिए उप मिशन (एस०एम०एस०पी०)
  • कृषि यंत्रीकरण हेतु उप मिशन (एस०एम०ए०एम०)
  • कृषि रक्षा एवं पादप निरोध हेतु उप मिशन (एस०एम०पी०पी०)

प्रशासनिक सुविधा के लिए चारों सब मिशन्स को नेशनल मिशन आन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एण्ड टेक्नॉलाजी में शामिल किया गया है परन्तु धरातल पर चारों सब मिशन एक दूसरे में मिले हुए हैं प्रसार एवं प्रौद्योगिकी ऐसे सूत्र हैं जो सभी में समान रूप से विधमान है। विषयों की विशेषता के अनुसार क्षमता विकास कृषि प्रसार के अलावा अन्य तीन उप मिशनों में भी निहित है कृषि प्रसार एवं प्रौद्योगिकी साथ – साथ चलेंगे यही ‘‘नेशनल मिशन आन एग्रीकल्चुरल एक्सटेंशन एण्ड टेक्नालॉजी (एन०एम०ए०ई०टी०)ʺ के प्रारम्भ का आधार है।

मिशन का उद्देश्य

कृषि प्रसार को पुर्नगठित एवं सुदृढ बनाकर उपयुक्त प्रौद्योगिकी एवं सस्य विधियों को किसानों तक पहुचाना। इस उद्देश्य की पूर्ति सघन भौतिक पहॅुच, विचार–विमर्श की विधि द्वारा सूचना का प्रसार, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग, आधुनिकी एवं उपयुक्त प्रौद्योगिकी की लोकप्रियता, क्षमता विकास एवं कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए संस्था का सुदृढ़ीकरण, गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता, कृषि रक्षा संसाधनों की उपलब्धता आदि कृषक अभिरूचि समूहों के गठन को बढ़ावा देकर की जायेगी।

कृषि प्रसार के लिए उप मिशन (एस०ए०एम०ई०)

यह उप मिशन जागरूकता पैदा करने तथा उपयुक्त प्रौद्योगिकी के कृषि एवं एलाइड सेक्टर में अधिकाधिक उपयोग पर केन्द्रित होगा। पूर्व की उपलब्धियों को प्रसार कार्मिकों की बढ़ी हुई पहॅुच के माध्यम से ठोस एवं सुदृढ़ बनाया जायेगा। एग्री–क्लीनिक एग्री बिजनेस स्कीम के प्रशिक्षित एग्रीप्रीन्यूर्स, कृषि प्रसार में डिप्लोमा प्राप्त इनपुट डीलर्स भी किसानों को प्रसार सेवा उपलब्ध करायेंगे। सूचना प्रसार की विमर्शी एवं नवोन्मेषी विधियों यथा– पीको प्रोजेक्टर्स, कम कीमत की फिल्मों हैंड–हेल्ड–डिवाइस, मोबाइल आधारित सेवा, किसान काल सेन्टर आदि का प्रयोग किया जायेगा और विभिन्न प्रोग्राम्स तथा स्कीमों के प्रसार संबंधी प्रयासों से ग्राम स्तर पर कृषि तकनीक प्रबन्ध अभिकरण (ए०टी०एम०ए०) एवं ब्लाक टेक्नालॉजी टीम की संस्था द्वारा केन्द्राभिमुखता (कन्वर्जेन्स) सुनिश्चित की जायेगी।

बीज एवं रोपण सामग्री के लिए उप मिशन (एस०एम०एस०पी०)

उच्च गुणवत्ता के बीजों का प्रयोग कृषि उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाने का सबसे प्रभावी साधन है यह उप मिशन न्यूकिलियस बीज से लेकर किसानों को प्रमाणित बीज की आपूर्ति तक पूरी बीज श्रृंखला को आच्छादित करता है। बीज क्षेत्र के विकास से संबंधित सभी कार्य इसमें सम्मिलित हैं। पौधों की प्रजातियों का संरक्षण एवं कृषक अधिकार प्राधिकरण (पी०पी०वी० और एफ०आर०ए०) सुदृढीकरण भी इसी के अन्तर्गत है ताकि पौधों की प्रजातियों, किसानों के अधिकारों के संरक्षण और नई पादप अभिजनक के द्वारा पौधों के प्रजातियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित किया जा सके।

कृषि यंत्रीकरण हेतु उप मिशन (एस०एम०ए०एम०)

फार्म पावर की उपलब्धता एवं कृषि उत्पादकता में गहरा सम्बन्ध हे इसलिए यह उप मिशन कृषि यंत्रीकरण पर केन्द्रित होगा इसमें संस्थागत व्यवस्था यथा–कस्टम हाइरिंग, चयनित ग्रामों का यंत्रीकरण, यंत्रों एवं उपकरणों आदि की खरीद के लिए अनुदान के द्वारा विशेष रूप से सीमान्त एवं लघु कृषकों की आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा।

कृषि रक्षा एवं पादप निरोध हेतु उप मिशन (एस०एम०पी०पी०)

इसे नेशनल मिशन आन एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन एण्ड टेक्नालॉजी में फसलों को वैज्ञानिक एवं पर्यावरण–मित्रवत तकनीकों को आई०पी०एम० के माध्यम से रोग ⁄ कीट मुक्त रखकर कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए रखा गया है। इसमें पेस्ट प्रबन्धन की सुविधाओं का सुदृढीकरण एवं आधुनिकीकरण, कृषि रक्षा रसायनों की गुणवत्ता नियंत्रण, पौध निरोध सुविधा एवं खाद्य पदार्थो में पेस्टीसाइड अवशेषों का अनुश्रवण भी सम्मिलित है टिकाऊ प्लांट स्वास्थ्य प्रबन्धन एवं क्षमता विकास द्वारा जैव–सुरक्षा को भी इसमें लिया गया है।

कृषकों का दक्षता प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय प्रसार कार्य जो 4 उप मिशन में दिये गये हैं वह किसान से संबंधित समान कार्यक्रम जो कृषि तकनीक प्रबन्ध अभिकरण (ए०टी०एम०ए०) द्वारा चलाये जा रहे हैं उनके साथ केन्द्राभिमुख हो जायेंगे।