कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

मृदा स्वास्थ्य

प्रश्न: मृदा नमूना लेते समय ध्यान देने योग्य बातें ॽ

उत्तर:

  • मृदा नमूना लेते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए
    • खेत की मिट्टी की बनावट, ढाल, और उत्पादकता के आधार पर बांट लें।
    • पेड़ के नीचे से, सिंचाई नाली, खाद के गड्डे से, खड़ी फसल आदि से मृदा नमूनें न लें।
    • एक मृदा नमूना लेने हेतु एक ग्रिड के 8 से 10 स्थानों से मृदा लेकर एक में मिला कर प्रतिनिधित्व मृदा नमूना तैयार करना चाहिए।
    • यदि मिट्टी गीली हो तो उसे छाया में सुखाकर थैली में भरना चाहिए। इस प्रकार एकत्रित मृदा नमनों को यथाशीघ्र प्रयोगशाला में विश्लेषण हेतु भेज देना चाहिए।
    • मृदा नमूना लेते समय मृदा स्वास्थ्य कार्ड से सम्बन्धित चाही गयी समस्त सूचना यथाः कृषक का विवरण, भू–स्थिति (आक्षांश एवं देशान्तर) मोबाइल नं०, पता, खसरा नं०, आदि कॉलम पूर्ण रूप से अवश्य भरें जाये, कोई भी कॉलम रिक्त न छोड़ा जाये।

    प्रश्न: मृदा परीक्षण कराना क्यों आवश्यक है ॽ

    उत्तर:

  • अधिक उपज लेने के लिए विभिन्न फसलों में ठीक समय पर उचित मात्रा में उर्वरक उपयोग करने की आवश्यकता होती है। मिट्टी जॉच से स्पष्ट पता चल जाता है कि भूमि में पोषक तत्व उपलब्धता कितनी हैॽ किसी फसल विशेष के लिए कितने और तत्व चाहिए, के आधार पर उर्वरकों की सिफारिश कर दी जाती है। उर्वरकों का चुनाव मात्रा और उपयोग करने के सही ढंग की पूरी जानकारी किसानों को सरल भाषा में जांच रिर्पोट के साथ लिखित रूप से भेज दी जाती है।
  • प्रायः मिट्टी के भौतिक और रसायनिक गुणों के आधार पर ही फसलों का चयन करना अधिक श्रेयकर रहता है क्योंकि सभी मृदाएं सभी फसल उगाने के लिए उपयुक्त नहीं होती है। मिट्टी की जांच से स्पष्ट निर्देश मिल जाता है कि विशेष खेत में कौन सी फसल उगानी लाभप्रद रहेगी या कौन सी नहीं उगानी चाहिए। सभी फसलों के उचित बढ़वार⁄उत्पादन हेतु पी०एच० मान 6.5 से 7.5 सबसे उपयुक्त होता है।
  • प्रश्न: मृदा परीक्षण से लाभ क्या है ॽ

    उत्तर:

  • मृदा परीक्षण के निम्नलिखित लाभ इस प्रकार है
    • मृदा में उपलब्ध पोषक तत्वों का सही निर्धारण कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से कृषकों तक पहुचना।
    • विभिन्न फसलों की दृष्टि से पोषक तत्वों की कमी का पता करके किसानों को स्पष्ट सूचना देना।
    • मृदा में पोषक तत्वों की स्थिति ज्ञात करना और उसके आधार पर फसलों के अनुसार उर्वरकों/खादों को डालने की संस्तुति करना।
    • मृदा की विशिष्ट दशाओं का निर्धारण करना, जिससे मृदा को कृषि विधियों और मृदा सुधारकों की सहायता से ठीक किया जा सकें।
    • संतुलित उर्वकों के प्रयोग को प्रोत्साहित करना।

    प्रश्न: किसानों को मुख्यतः किन-किन तत्वों के प्रयोग पर विशेष ध्यान देना चाहिए ॽ

    उत्तर:

  • किसानों को मुख्य पोषक तत्वों (नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश), दितीय पोषक तत्व (गधक), सूक्ष्म पोषक तत्व (जस्ता, लोहा, तॉबा, मैग्नीज एवं बोरान) पर विशेष ध्यान देना होता है।