कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

मृदा स्वास्थ्य

प्रश्न: स्वस्थ्य मृदा क्या है ॽ

उत्तर:

  • स्वस्थ्य मृदा का मतलब है कि मृदा में पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों (कार्बनिक पदार्थ, मुख्य एवं सूक्ष्म तत्व) की भरपूर मात्रा एवं नमी रोकने की क्षमता हो। जिससे अधिक फसल उत्पादन लिया जा सकें।
  • प्रश्न: मृदा स्वास्थ्य कार्ड क्या है ॽ

    उत्तर:

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड मृदा परीक्षण जांच रिपोर्ट जिसे किसानों को प्रत्येक जोतों के लिए दिया जाता है। इसमें 12 पैरामीटर (यथा pH, EC, जीवांश कार्बन, नत्रजन, फास्फेट, पोटाश, गंधक, जस्ता, लोहा, ताँबा, मैग्नीज एवं बोरान) पर जांच परीक्षणोंपरान्त ही कृषकों को निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाता है।
  • प्रश्न: मृदा स्वास्थ्य कार्ड को प्रयोग किसान किस प्रकार कर सकता है ॽ

    उत्तर:

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड में किसान के खेत की मृदा जांच/परीक्षणोंपरान्त पोषक तत्वों की स्थिति के आधार पर रसायनिक उर्वरक, कार्बनिक खाद एवं जैव उर्वरक प्रयोग करने की सलाह दी जायेगी। इसके अलावा इसमें किसानों को उर्वरकों और उसकी मात्रा के सम्बन्ध में जानकारी दी जायेगी।
  • प्रश्न: मृदा नमूना लेने का उचित समय क्या है ॽ

    उत्तर:

  • खरीफ, रबी एवं जायद फसलों के बुवाई के पूर्व खेत खाली होने पर मृदा नमूना लिया जाता है।
  • प्रश्न: मृदा नमूना प्राप्त करना ॽ

    उत्तर:

  • मृदा नमूना ठीक प्रकार से लेना बहुत महत्वपूर्ण है जिसका परीक्षण करके उवर्रकों का निर्धारण किया जाता हैं। यह भूमि के एक बड़े भाग का प्रतिनिधि नमूना होता हैं। मृदा परीक्षण के लिए आधा किलोग्राम (खेत के विभिन्न भागों से एकत्रित) मृदा नमूना एकत्र किया जाता हैं।
  • प्रश्न: मृदा नमूना एकत्र करने की विधि क्या है ॽ

    उत्तर:

  • मृदा नमूना एकत्र करने की विधि निम्न हैं
    • जिस खेत/ग्रिड क्षेत्र से मृदा नमूना एकत्र करना है उसमें आठ से दस स्थानों पर 6x4x6 इंच (15 सेमी०) गहराई के गड्डे की दीवार से लगभग 2.5 सेमी० पर्त, खुरपी की सहायता से ऊपर से नीचे की मिट्टी खोदकर एकत्रित कर लें।
    • खेत के विभिन्न गड्डों से प्राप्त मिट्टी को साफ कपड़े/कागज/बर्तन में डालकर अच्छी तरह से मिला लें। अब मिट्टी का ढेर बना लें तथा उसके चार भाग कर लें। आमने-सामने के दो भाग फेंक दें एवं दो भाग फिर अच्छी तरह से मिलायें। पुनः ढेर बनाकर उक्त प्रक्रिया को दोहरायें। यह प्रक्रिया तब तक करें जब मिट्टी आधा किलो रह जायें। मिट्टी साफ थैली में भर दें।
    • अब दो लेबिल लें। उन पर कृषक का नाम, भू-स्थिति (अक्षांश एवं देशांतर) ग्राम का नाम, खेत की पहचान, खसरा सं०, आधार नम्बर, मोबाइल नम्बर, क्षेत्रफल, विकास खण्ड का नाम, तहसील का नाम, जनपद का नाम आदि अवश्य लिख दें। एक लैबिल थैली के अन्दर एवं एक थैली के ऊपर बाँध दें। मृदा नमूना भेजते समय यह भी अंकित करना आवश्यक है कि खेत में कौन-सी फसल ली जानी है, ताकि उसी के अनुसार उर्वरक की संस्तुति की जा सकें।