कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

तकनीकी साहित्य

क्र०सं० शीर्षक साइज़ भाषा दिनांक समय विस्तार से देखें
1 जैविक कीटनाशी/ जैविक एजेण्ट द्वारा कीट रोग नियंत्रण 896 KB हिंदी 08.12.2017 12:30pm pdf विस्तार से देखें

पीला रतुआ/गेरूई की रोकथाम कैसे करें

  • पीला रतुआ/गेरूई अवरोधी प्रजातियाँ
    • असिंचित दशा-एच0डी0-2888
    • सिंचित दशा(समय से बुवाई के लिए)-के0 9107, डी0बी0 डब्लू0-17, डी0बी0डब्लू0-39, एच0डी0-2967, पी0बी0 डब्लू0-621
    • सिंचित दशा(विलम्ब से बुवाई हेतु)-एच0आई0 1563, नरेन्द्र गेहॅू 2036
    • उसरीली भूमि हेतु-एन0डब्लू0-1067, के0आर0एल0-210
  • बुवाई समय से करें।
  • क्षेत्र में अनुमोदित प्रजातियाँ ही उगायें।
  • खेतों का निरीक्षण करें तथा वृक्षों के आस-पास उगायी गयी फसल पर अधिक ध्यान दें।
  • फसल पर इस रोग के लक्षण दिखायी देने पर छिडकाव करें यह स्थिति प्रायः जनवरी के अन्त या फरवरी मध्य में आती है।
  • गेरूई की रोकथाम हेतु निम्नलिखित रसायनों में से किसी एक रसायन की मात्रा को 600-800 ली0 पानी में घोलकर प्रति हे0 की दर से छिडकाव करना चाहिए-
  • पीली गेरूई
    • प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ई0सी0 500 मिली0।
  • भूरी गेरूई
    • प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ई0सी0 500 मिली0 अथवा
    • मैंकेाजेब 75 प्रतिशत डब्लू0पी0 2किग्रा0 अथवा
    • जिनेब 75 प्रतिशत डब्लू0पी0 2 किग्रा0।
  • काली गेरूई
    • थायोफिनेट मिथाइल 70 प्रतिशत डब्लू0पी0 700 ग्राम अथवा
    • मैंकेाजेब 75 प्रतिशत डब्लू0पी0 2 किग्रा0 अथवा
    • जिनेब 75 प्रतिशत डब्लू0पी0 2 किग्रा0।