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राज्य स्तरीय पेस्ट सर्विलेन्स एवं एडवाइजरी यूनिट की बैठक दिनांक 21.10.2016 का कार्यवृत्त

राज्य स्तरीय पेस्ट सर्विलेन्स एण्ड एडवाइजरी यूनिट की बैठक दिनांक 21.10.2016 को कृषि निदेशक, महोदय की अनुमति से अपर कृषि निदेशक (कृषि रक्षा), उत्तर प्रदेश के कक्ष में पूर्वान्ह 11.00 बजे आयोजित की गयी, जिसमे निम्नलिखित सदस्यों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

मुख्यालय स्तर पर डॉ० कनीज फातिमा, उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) मुख्यालय द्वारा भी बैठक में प्रतिभाग किया गया।

कीटों/रोगों के प्रकोप की स्थिति

बैठक में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों तथा प्रगतिशील कृषक प्रतिनिधियों के मध्य प्रमुख रूप से खरीफ में बोयी जाने वाली फसलों के साथ-साथ बागवानी एवं सब्जियों में सामयिक कीटों/व्याधियों व उनकी रोकथाम के सम्बन्ध में विस्तृत चर्चा की गयी, जिसमें उपलब्ध करायी गई सूचनायें/संस्तुतियां निम्नवत् हैः-

धान

श्री राजेश कुमार द्विवेदी, प्रगतिशील कृषक प्रतिनिधि द्वारा अवगत कराया गया कि कुछ क्षेत्रों में धान में कन्डुआ (स्मट) रोग की समस्या है।

उपरोक्त संदर्भ में डॉ० नीरजा अग्रवाल द्वारा रोग से प्रभावित पौधों को अलग करके मिट्टी में दबाकर नष्ट करने का सुझाव दिया गया है। उक्त के अतिरिक्त डॉ० अग्रवाल द्वारा अवगत कराया गया कि रोग से बचाव हेतु कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत डब्लू0पी0 की 2 ग्राम मात्रा को प्रति किग्रा0 बीज की दर से बीज शोधन कर बुवाई करना चाहिए।

डॉ० एल0पी0 अवस्थी द्वारा सुरक्षित भण्डारण हेतु सुझाव दिया गया कि कटाई मड़ाई करने के पश्चात धान के दानों को अच्छी तरह से सुखा लें जिससे नमी की मात्रा 10 प्रतिशत से अधिक न हो ।

चना/मटर/मसूर

डॉ० एल0पी0 अवस्थी द्वारा सुझाव दिया गया कि बीज जनित रोगों के नियंत्रण हेतु ट्राइकोडर्मा बायोपेस्टीसाइड की 4 ग्राम मात्रा प्रति किग्रा0 बीज की दर से बीज को शोधित कर बुवाई करें।

रसायनिक बीज शोधन हेतु थिरम 75 प्रतिशत 2 ग्राम एवं कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत 1 ग्राम मिश्रण की 3 ग्राम मात्रा प्रति किग्रा0 बीज की दर से शोधित करने के उपरान्त राइजोबियम कल्चर से बीजोपचार करके बुवाई किये जाने का सुझाव दिया गया।

राई/सरसों

डॉ० उमेश चन्द्र द्वारा सुझाव दिया गया कि बीज जनित रोगों से बचाव हेतु 2.50 ग्राम थिरम 75 प्रतिशत प्रति किग्रा0 बीज को उपचारित करके बुवाई करें।

रसायनिक बीज शोधन हेतु थिरम 75 प्रतिशत 2 ग्राम एवं कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत 1 ग्राम मिश्रण की 3 ग्राम मात्रा प्रति किग्रा0 बीज की दर से शोधित करने के उपरान्त राइजोबियम कल्चर से बीजोपचार करके बुवाई किये जाने का सुझाव दिया गया।

गेहूं

डॉ० एल0पी0 अवस्थी द्वारा सुझाव दिया गया कि गेहूं की बुवाई का समय आ रहा है। अतएव भूमिजनित एवं बीजजनित रोगों से बचाव हेतु भूमि शोधन व बीज शोधन अवश्य किया जाना चाहिए।

उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) मुख्यालय द्वारा विस्तृत चर्चा करते हुए अवगत कराया गया कि फसलों में होने वाली क्षति में 26 प्रतिशत क्षति रोगों का प्रकोप होने के फलस्वरुप होती है। अतएव उक्त से बचाव हेतु फसलों को बुवाई से पूर्व बीज शोधन एवं भूमि शोधन किया जाना चाहिए।

उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) मुख्यालय द्वारा अवगत कराया गया कि रबी की प्रमुख फसलों में शत-प्रतिशत बीज शोधन एवं भूमि शोधन अभियान का क्रियान्वयन कृषि विभाग द्वारा किया जा रहा है। जिसके अन्तर्गत प्रत्येक विकास खण्ड के पाॅच राजस्व ग्रामों का चयन किया गया है तथा प्रत्येक राजस्व ग्राम में शत-प्रतिशत बीज शोधन अभियान एवं कम से कम 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में भूमि शोधन किया जाना है जिसके लिए कृषकों को विभिन्न पारिस्थितिकीय संसाधनों द्वारा कीट/रोग नियंत्रण योजना में बीज शोधक रसायन एवं भूमि शोधन हेतु बायोपेस्टीसाइड्स पर 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है।

सब्जियाँ

आलू

डॉ० मिथलेश कुमार आर्या द्वारा अवगत कराया गया कि वर्तमान में आलू की बुवाई की जा रही है। अतएव आलू की रोग रोधी प्रजातियों एवं प्रमाणित बीज को बुवाई करने का सुझाव दिया गया।

उक्त हेतु डॉ० आर्या द्वारा अवगत कराया गया कि प्रमाणित बीज प्राप्त करने हेतु संयुक्त कृषि निदेशक, आलू अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम, मेरठ से संम्पर्क करके उन्नतिशील प्रजातियों का बीज प्राप्त किया जा सकता है।

टमाटर

डॉ० के0के0 पाण्डे द्वारा अवगत कराया गया कि टमाटर की रोपाई चल रही है। अतएव टमाटर के प्रमुख रोग लीफ कर्लिंग, रुटराट एवं कालर रुट से बचाव हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस0एल0 की 1.00 मिली0 मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर पौध की जड़ों को 10-15 मिनट तक डुबोने के पश्चात ट्राइकोडर्मा बायोपेस्टीसाइडस को गोबर की सड़ी हुई खाद में सेलरी बनाकर उपचारित करके रोपाई करने का सुझाव दिया गया।

बैंगन

डॉ० के0के0 पाण्डे द्वारा सुझाव दिया गया कि फसल के प्रमुख कीट तना एवं फल बेधक कीट के नियंत्रण हेतु पौध के अग्रभाग कीट प्रभावित तनों को अलग (शूट क्लिपिंग) करके मिट्टी में दबाकर नष्ट करने के उपरान्त इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस0एल0 की 1.00 मिली0 मात्रा को 2-3 लीटर पानी में घोलकर प्रति हे0 की दर से आवश्यकतानुसार 10-15 दिन के अन्तराल पर छिड़काव किया जाना चाहिए। कीट के जैविक नियंत्रण हेतु फैरोमैन ट्रैप प्रति 10 वर्ग मीटर में एक ट्रैप लगाकर कीटों की रोकथाम का सुझाव भी दिया गया।

मिर्च

श्री राम कीरत मिश्रा, प्रगतिशील कृषक प्रतिनिधि द्वारा शिमला मिर्च में लगने वाले मोजैक रोग के सम्बन्ध में अवगत कराया गया।

डॉ० मिथिलेश कुमार द्वार अवगत कराया गया कि उक्त रोग का प्रसार वाहक कीट थ्रिप्स के द्वारा होता है। अतएव उक्त कीट के नियंत्रण हेतु घुलनशील गन्धक की 3 ग्राम मात्रा का प्रति लीटर पानी में घोलकर 10-15 दिन के अन्तराल पर 2-3 छिड़काव करने का सुझाव दिया गया।

फूलगोभी/पत्तागोभी

डॉ० मिथिलेश कुमार द्वारा ब्लैक राट (जीवाणु जनित) रोग से बचाव हेतु पौध की जड़ों को स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट के 100 पी0पी0एम0 से उपचारित करने के उपरान्त रोपाई करने का सुझाव दिया गया। कद्दू वर्गीय सब्जियां

डॉ० नीरजा अग्रवाल द्वारा फसल में गोंद निकलने की समस्या (गमोसिस) के सम्बन्ध में सुझाव दिया गया कि उग्र समस्या होने पर कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत डब्लू0पी0 की 1 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर आवश्यकतानुसार 8-10 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करना चाहिए।

गन्ना

डॉ० एल0पी0 अवस्थी द्वारा सुझाव दिया गया कि रोग प्रतिरोधी प्रजातियों का ही प्रयोग करना चाहिए। यदि किसी (बुवाई हेतु बीज) गन्ने के कटे हुए सिरे अथवा गाठों पर लालिमा दिखे तो ऐसे सेट का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

डॉ० नीरजा अग्रवाल द्वारा सुझाव दिया गया कि गन्ने के टुकड़ों को कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत रसायन के 2 प्रतिशत घोल में 5-10 मिनट डुबोने के पश्चात बुवाई करें।

बागवानी

डॉ० नीरजा अग्रवाल द्वारा आम, अमरुद एवं पपीता आदि फलों में फल मक्खी कीट के जैविक नियंत्रण हेतु मिथाइल यूजिनाल + इथाइल एल्कोहल+मैलाथियान 50 प्रतिशत ई0सी0 के 4:6:1 के बने घोल में 5X5X1.5 मिमी0 प्लाईबुड के टुकड़ों को एक सप्ताह तक शोधित कर लगाने का सुझाव दिया गया।

अन्य विषय

उप कृषि निदेशक, (कृषि रक्षा) मुख्यालय द्वारा अवगत कराया गया कि भारत सरकार द्वारा वीडिओ कान्फ्रेसिंग में कटाई के बाद फसल के अवशेषों को न जलाने के सम्बन्ध में निर्देश दिये गये। डॉ० मिथलेश कुमार द्वारा कीटों के जैविक नियंत्रण हेतु फेरोमैन ट्रैप का प्रदर्शन करते हुए प्रयोग करने का सुझाव दिया गया। डॉ० नीरजा अग्रवाल द्वारा कीटों के नियंत्रण हेतु लाइट ट्रेप को सायंकाल 9 बजे तक की अवधि में लगाने का सुझाव दिया गया।

बैठक के अन्त में उपस्थित समस्त सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद के साथ बैठक का समापन किया गया। राज्य स्तरीय पेस्ट सर्विलेंस एवं एडावइजरी यूनिट की आगामी बैठक दिनांक 18.11.2016 को पूर्वान्ह 11:00 बजे आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।

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1 फसल पर कीटों / रोगों की साप्ताहिक रिपोर्ट (फरवरी, तीसरा सप्ताह) 456 KB अंग्रेजी 24.03.2017 12:30pm pdf विस्तार से देखें
2 यू०पी० राज्य में कीट और रोग रिपोर्ट रबी सत्र (2016-17) के दौरान 21-02-2017 को समाप्त होने वाले समय के लिए 1,362 KB अंग्रेजी 24.03.2017 12:30pm pdf विस्तार से देखें
3 07-11-2016 को समाप्त होने वाली अवधि के लिए रबी सीजन 2016-17 के दौरान कीट निगरानी रिपोर्ट 1,362 KB अंग्रेजी 24.03.2017 12:30pm pdf विस्तार से देखें
4 07-11-2016 को समाप्त होने वाली अवधि के लिए रबी सीजन 2016-17 के दौरान कीट निगरानी साप्ताहिक रिपोर्ट 1,362 KB अंग्रेजी 24.03.2017 12:30pm pdf विस्तार से देखें
5 21.11.2017 समाप्त होने वाले अवधि के लिए यूपी की कीट निगरानी रिपोर्ट, रबी 2017 1,750 KB अंग्रेजी 08.12.2017 12:30pm pdf विस्तार से देखें
6 रबी फसलों के लिए साप्ताहिक कीट और रोग उपद्रव रिपोर्ट 1,627 KB अंग्रेजी 08.12.2017 12:30pm pdf विस्तार से देखें