कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

सर्विलांस

धान

जीवाणु झुलसा

श्री राजीव कुमार द्वारा सुझाव दिया गया कि धान के खेत में जीवाणु झुलसा रोग के लक्षण दिखाई देते ही यथा सम्भव खेत का पानी निकाल कर स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत टेट्रासाइक्लीन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत की 15 ग्राम मात्रा को 500 ग्राम कापर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू0पी0 के साथ मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से 500-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

गन्धी बग

राजेश कुमार द्विवेदी प्रगतिशील कृषक प्रतिनिधि द्वारा धान की फसल में गन्धी बग कीट का प्रकोप होने के सम्बन्ध में अवगत कराया गया। उपरोक्त संदर्भ में श्री राजीव कुमार, वैज्ञानिक सहायक द्वारा सुझाव दिया गया कि एजाडिरैक्टिन 0.15 प्रतिशत ई0सी0 की 2.5 लीटर मात्रा को प्रति हेक्टेयर 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

तना छेदक

श्री राजीव कुमार, वैज्ञानिक सहायक द्वारा तना छेदक के रासायनिक नियंत्रण हेतु कार्बोफ्यूरान 3 प्रतिशत सी0जी0 20-30 किग्रा0 अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रतिशत की 18 किग्रा0 मात्रा को प्रति हे0 की दर से 3-5 सेमी0 स्थिर पानी मे बुरकाव करने का सुझाव दिया गया।

डॉ० एल0पी0 अवस्थायी द्वारा अवगत कराया गया कि जिन क्षेत्रों में वर्षा कम मात्रा में हुई है उन क्षेत्रों में धान की फसल में दीमक व जिन क्षेत्रों में अधिक मात्रा में वर्षा हुई है वहाँ पर जड़ की सूड़ी का प्रकोप अधिक पाया गया जिसके नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 की 2.5 लीटर मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करने का सुझाव दिया गया।

शीथ ब्लाइट

श्री आत्मा राम राजपूत कृषक प्रतिनिधि द्वारा धान की फसल में कहीं-कहीं शीथ ब्लाइट रोग का प्रकोप होने के सम्बन्ध में अवगत कराया गया।

उक्त के संदर्भ में डॉ० एल0पी0 अवस्थायी द्वारा कार्बेण्डाजिम 12 प्रतिशत + मैंकोजेब 63 प्रतिशत डब्लू0पी0 की 750 ग्राम मात्रा को प्रति हेक्टेयर 550-650 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने का सुझाव दिया गया।

ज्वार/बाजरा/मक्का

श्री राजीव कुमार, वैज्ञानिक सहायक द्वारा अवगत कराया गया कि खरीफ में बोयी गयी उक्त खाद्यान्न की फसलों में किसी प्रकार के कीट/रोग की विशेष समस्या नहीं है।

उर्द/मूँग

श्री पूरनलाल कुशवाहा प्रगतिशील कृषक प्रतिनिधि द्वारा उर्द/मूँग की फसल में येलो मोजैक (पीला चित्त वर्ण) रोग का प्रकोप होने के सम्बन्ध में अवगत कराया गया।

उपरोक्त संदर्भ में श्री उमेश चन्द्रा द्वारा उक्त रोग के नियंत्रण के सम्बन्ध में विस्तृत चर्चा करते हुए अवगत कराया गया कि रोग का वाहक कीट सफेद मक्खी है। अतएव उक्त रोग के प्रसार को रोकने हेतु ग्रसित पौधों को उखाड़ कर नष्ट करने के उपरान्त रोग के वाहक कीटों के नियंत्रण हेतु डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ई0सी0, 1 लीटर अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस0एल0 की 250 मिली0 मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से आवश्यकतानुसार 10-15 दिन के अन्तराल पर दो से तीन छिड़काव करने का सुझाव दिया गया।

डॉ० बी0 किरन गाँधी, वैज्ञानिक, आई0आई0पी0आर0, कानपुर द्वारा मूँग की पीला चित्तवर्ण रोग प्रतिरोधी प्रजाति आई0पी0एम0 2-3 एवं उर्द की उत्तरा प्रजाति की बुवाई करने का सुझाव दिया गया।

बालदार गिडार

श्री राजीव कुमार द्वारा बालदार गिडार के नियंत्रण हेतु बैसिलस थूरिनजिएन्सिस (बी0टी0) 1.0 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 400-500 लीटर पानी में घोलकर आवश्यकतानुसार 15 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करने का सुझाव दिया गया।

फली बेघक

श्री राजीव कुमार, वैज्ञानिक सहायक द्वारा सुझाव दिया गया कि इसके नियंत्रण हेतु क्यूनालफास 25 प्रतिशत ई0सी0 1.25 लीटर अथवा फेनथोएट 50 प्रतिशत ई0सी0 की 2 लीटर मात्रा को 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

मूँगफली

डॉ० एल0पी0 अवस्थी द्वारा अवगत कराया गया कि लखीमपुर के आस-पास के क्षेत्रों में मूँगफली की फसल में टिक्का रोग की समस्या अधिक है जिसके नियंत्रण हेतु डॉ० अवस्थी द्वारा मैन्कोजेब अथवा जिनेब 75 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण की 2.0 किग्रा मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर आवश्यकतानुसार 10-15 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करने का सुझाव दिया गया।

गन्ना

श्री राजीव कुमार द्वारा गन्ने की फसल में टाप शूट बोरर कीट के प्रकोप की स्थिति में एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन के अन्तर्गत ट्राईकोग्रामा किलोनिस के 10 कार्ड प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग किया जाना चाहिए तथा कीट की आर्थिक क्षति स्तर पार करने की दशा में रासायनिक नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 800-1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने का सुझाव दिया गया।

तिल

फाईलोडी- डॉ० एल0पी0 अवस्थी द्वारा तिल में फाईलोडी रोग के बारे में अवगत कराया गया कि यह रोग माइकोप्लाजमा के द्वारा होता है। इस कीट के नियंत्रण हेतु मिथाइल-ओ-डिमेटान 25 ई0सी0 1.0 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने का सुझाव दिया गया।

सनई

डॉ० एल0पी0 अवस्थी द्वारा अवगत कराया गया कि प्रतापगढ़ क्षेत्र में सनई की फसल में मोजैक वायरस की समस्या अधिक है। जिसके नियन्त्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस0एल0 1.00 मिली0 मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर डॉ० अवस्थी द्वारा छिड़काव करने का सुझाव दिया गया।

सब्जियाँ

श्री राजधारी पाल,उद्यान निरीक्षक (पौध रक्षा अनुभाग) द्वारा आगामी रबी में उगाई जाने वाली मुख्य फसलें आलू, मटर, फूलगोभी, पातगोभी, गांठगोभी, मूली, गाजर, चुकन्दर, टमाटर, बैंगन, पालक, मिर्च, शिमला मिर्च, प्याज, लहसुन, धनिया, मेथी व सौंफ आदि का बुवाई का समय प्रारम्भ हो चुका है। इन फसलों को कीट/रोग से बचाने के लिए सुझाव दिया गया कि स्वस्थ्य एवं रोग रोधी किस्मों का प्रयोग करें, बीज शोधन करके बुवाई करें एवं बुवाई से पूर्व भूमि शोधन करें।

बागवानी

आंवला

श्री राजेश कुमार द्विवेदी प्रगतिशील कृषक प्रतिनिधि जनपद-प्रतापगढ़ द्वारा आंवले की फसल में काला धब्बा रोग के बारे में अवगत कराया गया। उपरोक्त संदर्भ में डॉ० एल0पी0 अवस्थी द्वारा अवगत कराया गया कि उक्त रोग के नियंत्रण हेतु कोई विशेष उपाय नहीं है।

अनार

डॉ० एल0पी0 अवस्थी द्वारा फल मक्खी कीट के जैविक नियंत्रण हेतु मिथाइल यूजीनाल इथाइल एल्कोहल अथवा मैलाथियान 50 प्रतिशत ई0सी0 के 4:6:1 के बने घोल में 5X5X1.2 मिमी0 के प्लाईवुड के टुकड़ों को एक सप्ताह तक शोधित कर खेत मं लगाने से फलमक्खी आकर्षित होती है जिसे एकत्र कर नष्ट कर देना चाहिए।

अन्य विषय

श्री उमेश चन्द्रा, उप निदेशक, केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन केन्द्र, लखनऊ द्वारा सुझाव दिया गया कि कृषि रक्षा रसायनों को खरीदते समय रजिस्ट्रेशन संख्या, रसायन के उत्पादन की तिथि एंव रैपर पर त्रिभुजाकार नीला या हरा रंग को देखकर ही किसान खरीदें।

बैठक के अन्त में उपस्थित समस्त सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद के साथ बैठक का समापन किया गया। राज्य स्तरीय पेस्ट सर्विलेंस एवं एडावइजरी यूनिट की आगामी बैठक दिनांक 21.10.2016 को पूर्वान्ह 11:00 बजे आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।