कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

बीज एवं भूमि शोधन

बीज शोधन/भूमि शोधन विशेष अभियान रबी 2017-18

उत्तर प्रदेश का मूल आधार कृषि है तथा लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आधारित है। प्राकृतिक संसाधनों यथा मृदा, जल एवं जैव विविधता का समुचित संरक्षण, राष्ट्रीय कृषि उत्पादन नीतियों के विनिर्माण एवं क्रियान्वयन तथा संसाधनों के क्षरण सहित फसल व मृदा स्वास्थ्य को अक्षुण्ण बनाये रखते हुए उत्तरोत्तर वृद्धि परक गुणवत्तायुक्त उत्पादन के आयाम विकसित करने का गुरूतर उत्तरदायित्व कृषि विभाग पर है। कृषि में उर्वरकों के संतुलित प्रयोग तथा सिंचाई के साधनों में विस्तार के साथ-साथ बीज शोधन/भूमि शोधन के विशेष अभियान चलाकर उत्पादन में आशातीत वृद्धि पर बल दिया जा रहा है।

  1. प्रदेश में प्रतिवर्ष फसलों में कीट,रोग, खरपतवारों तथा चूहों आदि द्वारा लगभग 15 से 20 प्रतिशत क्षति होती है, जिसमें लगभग 33 प्रतिशत खरपतवार,26 प्रतिशत रोगों, 20 प्रतिशत कीटों, 7 प्रतिशत भण्डारण के कीटो, 6 प्रतिशत चूहों तथा 8 प्रतिशत अन्य कारक सम्मिलित हैं।
  2. खरपतवारों के बाद सबसे अधिक क्षति रोगों द्वारा होती है। बीज जनित/भूमि जनित रोगों से आगामी बोई जाने वाली फसल के बचाव हेतु बीज शोधन का अत्यधिक महत्व है। ‘‘बीज शोधन‘‘ द्वारा फसल कीे रोगों से सुरक्षा कर अधिक पैदावार ली जा सकती है, जिसमें कृषकों की आर्थिक स्थिति भी सुद्धृढ़ होगी।
  3. इसी प्रकार अनेक प्रमुख कीटों की प्रावस्थायें व भूमि जनित रोगों के कारक भूमि में पाये जाते हैं, जो फसलों को विभिन्न प्रकार से क्षति पहॅुचाते हैं, प्रमुख रूप से दीमक, सफेद गिडार, कटवर्म, सूत्रकृमि, लेपीडाप्टेरस आदि अनेक कीटों तथा फफॅूदी/जीवाणु रोगों के भी भूमि जनित कारक प्रावस्थाएं भूमि की संरचना के अनुरूप मिट्टी में पाये जाते हैं, जो अनुकूल परिस्थितियों में पौधे की विभिन्न प्रावस्थाओं को संक्रमित कर फसल उत्पादन में बाधक बन हानि पहॅुचाते हैं। इस कीट ब्याधियों की रोकथाम हेतु कृषि रक्षा रसायनों का आवश्यकतानुसार प्रयोग करना पड़ता है, फलस्वरूप अधिक व्यय हो जाने के कारण उत्पादन लागत में वृद्धि होती है, बीज बोने व पौधरोपण के पूर्व समय से संस्तुत कृषि रक्षा रसायनों तथा जैविक रसायनों (बायो पेस्टीसाइड्स) से भूमि शोधन द्वारा कीट/रोगों की सम्भावित क्षति प्रारम्भ में ही रोककर स्वस्थ फसल से भरपूर गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त होगा, फलतः उत्पादन लागत भी कम होगी।

ऐसी स्थिति में रबी 2017-18 की प्रमुख फसलों में प्रत्येक विकासखण्ड के 05 राजस्व ग्रामों में कृषि विभाग द्वारा शत-प्रतिशत बीज शोधन एवं भूमि शोधन हेतु प्रत्येक राजस्व ग्राम में कम से कम 50 हे0 क्षेत्रफल में विशेष अभियान के रूप में चलाया जा रहा है। इसके अन्तर्गत चयनित गांवों में बीज शोधन एवं भूमि शोधन के महत्व की जानकारी देकर कृषकों को प्रशिक्षित किया जायेगा तथा बीज शोधक/भूमि शोधक रसायनों की समय से उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

रबी 2017-18 में बीज शोधन एवं भूमि शोधन के विशेष अभियान के सफल संचालन हेतु निम्नवत् कार्यक्रम का संचालन/अनुश्रवण किया जा रहा है।

बीज शोधन एवं भूमि शोधन का क्रियान्वयन

  1. अपर कृषि निदेशक,(कृषि रक्षा) द्वारा बीज शोधन एवं भूमि शोधन हेतु आवश्यक रसायनों/बायो पेस्टीसाइड्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है एवं जनपद स्तर पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी प्रत्येक कृषि रक्षा इकाई पर रसायन एवं बायोपेस्टीसाइड्स की उपलब्धता सुनिश्चित करते है।
  2. जनपद स्तर पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी बीज शोधन हेतु रसायनों की मांग अपने मण्डलीय उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) के माध्यम से अपर कृषि निदेशक(कृषि रक्षा) को पे्रषित करते हैं, तथा भूमि शोधन हेतु बायोपेस्टीसाइड्स की मांग अपने मण्डल के उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) के माध्यम से सम्बन्धित आई0पी0एम0प्रयोगशाला को उपलब्ध कराते है। आई0पी0एम0 प्रयोगशालाओं के प्रभारी अधिकारी प्रयोगशाला से सम्बद्ध जनपदों से प्राप्त मांग के अनुरूप गुणवत्तायुक्त बायोपेस्टीसाइड की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।
  3. जनपद स्तर पर उप कृषि निदेशक तथा मण्डल स्तर पर सॅयुक्त कृषि निदेशक द्वारा प्रत्येक दिन अनुश्रवण सुनिश्चित किया जा रहा है।
  4. उप कृषि निदेशक एवं जिला कृषि रक्षा अधिकारी द्वारा अपने नियत्रंणाधीन वरिष्ठ प्राविधिक सहायक गु्रप-बी (कृषि/कृषि रक्षा) तथा प्राविधिक सहायक गु्रप-सी (कृषि/कृषि रक्षा) को एक-एक राजस्व ग्राम आवंटित किया गया है जिसमें अनिवार्य रूप से बीज शोधक/भूमि शोधक रसायन/बायो पेस्टीसाइड की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। आवश्यकतानुसार अन्य शाखा के कर्मचारियों को भी राजस्व ग्राम आवंटित किया जायेगा।
  5. उप कृषि निदेशक द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के सलाहकार एवं तकनीकी सहायक तथा आत्मा योजना के ब्लाक तकनीकी प्रबन्धक एवं विषय वस्तु विशेषज्ञ को भी उपरोक्तानुसार एक-एक राजस्व ग्राम आवंटित कर कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहे हैं।

जन जागरूकता अभियान का संचालन

बीज शोधन एवं भूमि शोधन के विशेष कार्यक्रम में ग्राम स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञ एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों का पूर्ण सहयोग लिया जा रहा है। अभियान में कीटनाशी रसायन के निर्माताओं, पंजीकृत विक्रेताओंतथा एग्री सेवा केन्द्रो का सहयोग लिया जा रहा है।

जिला कृषि रक्षा अधिकारियों द्वारा समस्त सम्बन्धित तकनीकी कर्मचारियों को दक्षता उन्नयन का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कृषकों को विभिन्न पारिस्थितिकीय संसाधनों द्वारा कीट/रोग नियंत्रण योजना में बीज शोधक रसायन एवं भूमि शोधन हेतु बायोपेस्टीसाइड्स पर 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।

न्याय पंचायत स्तरीय/विकासखण्ड स्तरीय कार्यकर्ता प्राविधिक सहायक गु्रप-सी (कृषि) तथा वरिष्ठ प्राविधिक सहायक ग्रुप-बी (कृषि/कृषि रक्षा) एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तकनीकी सहायक, आत्मा योजना के बी0टी0एम0 एवं ए0टी0एम0 द्वारा बीज शोधन एवं भूमि शोधन से होने वाले लाभ की समुचित जानकारी कृषकों को उपलब्ध कराई जा रही है, साथ ही साथ बीज शोधन/भूमि शोधन रसायन की संस्तुत मात्रा एवं प्रयोग की जानकारी दी जा रही है।

प्रचार-प्रसार

कृषकों को प्रशिक्षण, किसान गोष्ठी, किसान मेला, साहित्य, पम्फलेट्स, फोल्डर आदि के माध्यम से प्रचार-प्रसार द्वारा विश्वास दिलाया जा रहा है कि बीज शोधन/भूमि शोधन से उन्हें किस प्रकार आर्थिक लाभ होगा। बीज शोधन/भूमि शोधन सम्बन्धी प्रदर्शनी, परिचर्चा के माध्यम से जनपद/ तहसील/ ब्लाक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर बीज शोधन/भूमि शोधन कार्य हेतु कृषकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

बीज शोधन/भूमि शोधन से सम्बन्धित जानकारी स्थानीय समाचार पत्रों/ आकाशवाणी/ दूरदर्शन के माध्यम से कृषकों तक पहॅुचाया जा रहा है।

स्थानीय ग्रामवासियों की सहभागिता से बीज शोधन/भूमि शोधन से सम्बन्धित नारों को लिखवाया जा रहा है। तथा ग्राम सभा की महिलाओं/महिला समूहों को बीज शोधन/ भूमि शोधन की महत्ता से परिचित कराते हुए उनको इस कार्य में सहभागी बनाया जा रहा है।

अनुश्रवण

विकासखण्ड स्तर पर चयनित राजस्व ग्रामों का वरिष्ठ प्राविधक सहायक गु्रप-बी (कृषि/कृषि रक्षा), तहसील स्तर पर उप सम्भागीय कृषि प्रसार अधिकारी, जिला स्तर पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी, मण्डल स्तर पर उप कृषि निदेशक, (कृषि रक्षा) एवं प्रदेश स्तर पर अपर कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) द्वारा साप्ताहिक सूचना संकलित की जाती है तथा साप्ताहिक रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करायी जा रही है।