कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

कृषि रक्षा

प्रश्न: कृषि यंत्रीकरण की उत्तर प्रदेश में कौन योजना संचालित है ?

उत्तर:

  • उत्तर प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण की सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन अण्डर नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेन्शन एण्ड टेक्नालाजी संचालित है।
  • प्रश्न: खेती की तैयारी के लिए ट्रैक्टर चालित कौन से उपयोगी यंत्र हैं ?

    उत्तर:

  • खेती की तैयारी के लिए ट्रैक्टर चालित के लिए उपयोगी यंत्र निम्न हैं
  • क्र.सं. यंत्र क्र.सं. यंत्र
    1 हैरो/ कल्टीवेटर 6 हैपीसीडर
    2 रिवर्सबेल प्लाउ 7 रीपर
    3 रोटावेटर 8 रीपर कम बाइन्डर
    4 जीरो ट्रिल /सीड ड्रिल-कम-फर्टीलाइजर ड्रिल 9 मल्टीक्राप थ्रेशर
    5 राइस ट्रान्सप्लान्टर

    प्रश्न: आलू की फसल के लिए अति महत्वपूर्ण और उपयोगी यंत्र कौन से हैं ?

    उत्तर:

  • आलू की फसल के लिए अति महत्वपूर्ण और उपयोगी यंत्र निम्न हैं
    • पोटैटो प्लान्टर
    • पोटैटो डिगर

    प्रश्न: गन्ने की फसल के लिए उपयोगी क्या हैं ?

    उत्तर:

  • गन्ने की फसल के लिए (शुगर केन कटर प्लान्टर) उपयोगी हैं ।
  • प्रश्न: फसल बीमा योजना क्या है ?

    उत्तर:

  • प्रदेश में वर्तमान में उपज गारण्टी योजना के रूप में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित की जा रही है जिसके अन्तर्गत प्रतिकूल मौसमीय स्थितियों के कारण फसल की बुवाई न कर पाने/असफल बुवाई, फसल की बुवाई से कटाई की अवधि में प्राकृतिक आपदाओं, रोगों व कृमियों से फसल नष्ट होने की स्थिति एवं फसल कटाई के उपरान्त खेत में कटी हुयी फसलों को बेमौसम/चक्रवाती वर्षा, चक्रवात से क्षति की स्थिति में फसल के उत्पादक कृषकों, जिनके द्वारा फसल का बीमा कराया गया है, को बीमा कवर के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • प्रदेश के चयनित जनपदों में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को लागू किया गया है जिसमें प्रतिकूल मौसमीय स्थितियों-कम व अधिक तापमान, कम व अधिक वर्षा आदि से फसल नष्ट होने की सम्भावना के आधार पर फसल के उत्पादक कृषकों, जिनके द्वारा फसल का बीमा कराया गया है, को बीमा कवर के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • प्रश्न: योजना में कौन-कौन से जोखिम कवर हैं ?

    उत्तर:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में प्राकृतिक आपदाओं-सूखा/षुष्क स्थिति, बाढ़, जलप्लावन, ओला, भूस्खलन, आकाशीय बिजली, तूफान व अन्य रोके न जा सकने वाले जोखिमों तथा रोगों, कृमियों आदि से फसल नष्ट होने के जोखिम को कवर किया गया है।
  • पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में प्रतिकूल मौसमीय स्थितियों-कम व अधिक तापमान, कम व अधिक वर्षा, आर्द्रता आदि से फसल नष्ट होने के जोखिम को कवर किया गया है।
  • प्रश्न: योजना में कौन-कौन से कृषक सम्मिलित हो सकते हैं ?

    उत्तर:

  • उक्त दोनों योजनाओं में अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल के ऋणी कृषक अनिवार्य आधार पर एवं अन्य सभी कृषक अपनी इच्छानुसार योजना में सम्मिलित हो सकते हैं।
  • प्रश्न: योजना में कौन-कौन से क्षेत्र व फसल अधिसूचित हैं ?

    उत्तर:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खरीफ मौसम में फसल धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, मूँग, मूँगफली, तिल, सोयाबीन व अरहर एवं रबी मौसम में फसल गेहूँ, चना, मटर, मसूर, लाही-सरसों व आलू को ग्राम पंचायत में लगभग 20 हेक्टेयर क्षेत्रफल उपलब्ध होने पर अधिसूचित किया गया है। पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में ब्लाक में फसल का क्षेत्रफल उपलब्ध होने पर अधिसूचित किया गया है।
  • प्रश्न: फसल का बीमा कब, कहॉ व कैसे करा सकते हैं ?

    उत्तर:

  • ऋणी कृषक की अधिसूचित फसल का बीमा सम्बन्धित बैंक शाखा/सहकारी समिति द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाता है, जबकि अन्य सभी कृषक खरीफ में दिनांक 31 जुलाई तथा रबी में दिनांक 31 दिसम्बर की अन्तिम तिथि तक बैंक शाखा अथवा बीमा कम्पनी के एजेंट के माध्यम से अधिसूचित फसल का बीमा करा सकते हैं।
  • प्रश्न: फसल की क्षति का आंकलन कैसे किया जाता है ?

    उत्तर:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अधिसूचित फसलों पर मौसम के अन्त में सम्पादित फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त उपज के आधार पर फसल की क्षति का आंकलन किया जाता है एवं कृषकों को उपज में कमी के अनुरूप क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है। योजना के प्राविधानों के अनुरूप क्षतिपूर्ति देय होने पर बीमा कम्पनी द्वारा कृषक के बैंक खाते में क्षतिपूर्ति की धनराशि जमा करा दी जाती है। अतः क्षतिपूर्ति प्राप्त करने के लिए कृषकों को व्यक्तिगत दावा प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है।
  • ग्रामपंचायत में अधिसूचित फसल के अधिकांश कृषकों द्वारा फसल की बुवाई न कर पाने/असफल बुवाई की स्थिति में क्षति का आंकलन ग्रामपंचायत स्तर पर करते हुए प्राथमिकता पर क्षतिपूर्ति देय होती है। योजना में स्थानिक आपदाओं-ओला, भूस्खलन व जलप्लावन तथा फसल कटाई के उपरान्त आगामी 14 दिन की अवधि तक फसल नष्ट होने की स्थिति में फसल की क्षति का आंकलन व्यक्तिगत बीमित कृषक के स्तर पर करते हुए कृषकों को प्राथमिकता पर आंशिक क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है जिसको मौसम के अन्त में फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त उपज के आधार पर देय कुल क्षतिपूर्ति की धनराशि में समायोजित किया जाता है। इसी प्रकार फसल की मध्य अवस्था तक ग्राम पंचायत में फसल की सम्भावित उपज सामान्य उपज से 50 प्रतिशत कम होने की स्थिति में भी कृषकों को आपदा की स्थिति तक उत्पादन लागत में व्यय के अनुरूप तात्कालिक सहायता प्रदान की जाती है जिसे मौसम के अन्त में फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त उपज के आधार पर देय कुल क्षतिपूर्ति की धनराशि में समायोजित किया जाता है।
  • पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में फसल की क्षति का आंकलन ब्लाक में स्थापित स्वचालित मौसम केन्द्र स्तर पर मौसम के प्रतिदिन के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। फसल की बुवाई से कटाई के प्रत्येक महत्वपूर्ण चरणों में फसल की आवश्यकतानुसार निर्धारित मौसमीय स्थितियों एवं मौसम की वास्तविक स्थिति में अन्तर के अनुरूप फसल की सम्भावित क्षति को दृष्टिगत रखते हुए कृषकों को क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है।
  • प्रश्न: गैर ऋणी कृषक फसल का बीमा किस बीमा कम्पनी से करा सकते हैं ?

    उत्तर:

  • वर्ष 2017-18 व 2018-19 में भारत सरकार द्वारा पैनलबद्ध सभी बीमा कम्पनियों से निविदा आमंत्रित की गयी है एवं बीमा कम्पनियों से प्राप्त न्यूनतम प्रस्ताव के आधार पर जनपद स्तर पर बीमा कम्पनी के कार्यक्षेत्र का निर्धारण किया जायेगा।