कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

कृषि रक्षा

प्रश्न: कृषि रक्षा सेवा का क्या उद्देश्य है ॽ

उत्तर:

  • कृषि रक्षा सेवा के उद्देश्य निम्न हैं
  • क्र.सं. उद्देश्य
    1 विभिन्न फसलों, फलदार वृक्षों, सब्जियॉ, चारा फसलों, वन वृक्षों एवं औषधीय तथा सगंध पौधों को कीट/रोग, खरपतवार एवं भण्डार गृहों में चूहों तथा भण्डार कीटों से होने वाली हानि को एकीकृत नाशीकृत नाशीजीव प्रबन्धन द्वारा यथा सम्भव कम करके उत्पादन में वृद्धि करना।
    2 गुणवत्तायुक्त रसायनों की उपलब्धता बनाये रखने हेतु निर्माण एवं विक्रय के लाइसेंस जारी करना।
    3 जैव विविधता का संरक्षण करना।
    4 सुरक्षित एवं प्रभावी रसायनों के बारे में किसानों को जानकारी देना।

    प्रश्न: कृषि रक्षा अनुभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं में कौन-कौन से अनुदान अनुमन्य हैॽ

    उत्तर:

  • कृषि रक्षा अनुभाग द्वारा विभिन पारिस्थितिकीय संसाधनों द्वारा कीट/रोग नियंत्रण योजना में निम्न अनुदान अनुमन्य है
  • क्र.सं. अनुदान
    1 कृषि रक्षा रसायनों पर मूल्य का 50 प्रतिशत या अधिकतम रू० 500/हे० अनुदान देय है।
    2 बीजशोधक रसायनों पर मूल्य का 75 प्रतिशत या अधिकतम रू० 150/हे० अनुदान देय है।
    3 बायोपेस्टीसाइड्स/बायोएजेण्ट्स पर मूल्य का 75 प्रतिशत या अधिकतम रू० 500/हे० की दर से अनुदान देय है।
    4 कृषि रक्षा यंत्र पर मूल्य का 50 प्रतिशत अनुदान देय है। जिसमें मानव चलित यंत्र पर अधिकतम 1500/यंत्र एवं शक्ति चालित यंत्र पर अधिकतम रू 3000/यंत्र पर अनुदान देय है।
    5 बखारी पर मूल्य का 50 प्रतिशत या अधिकतम रू० 1500/बखारी अनुदान देय है।

    प्रश्न: आई०पी०एम० क्या है और इसका उद्देश्य क्या है ॽ

    उत्तर:

  • एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन (इन्टीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट) नाशीजीव एवं खरपतवारों का नियंत्रण करने का ऐसा बहुउद्देशीय कार्यक्रम में जिससे वातावरण के सभी संसाधनों जैसे शस्य क्रियायें, यांत्रिक विधियॉ, जैविक अवस्थाओं एवं पदार्थों तथा रसायनिक विधियों का उपयुक्ततम समन्वयन करके नाशी जीवों एवं खरपतवारों के घनत्व को आर्थिक क्षति स्तर के नीचे सीमित रखा जाय और रसायनों से हो रहे प्रदूषण को यथा सम्भव कम किया जाये।
  • उद्देश्य: किसानों के खेत पर व्यवहारिक रूप से अपनायें जाने वालें इस कार्यक्रम के उद्देश्य निम्नलिखित हैं
  • विषम परिस्थितियों में कीटनाशक रसायनों आदि का सामूहिक या आवश्यकतानुसार उपयोग करके नाशीजीव एवं खरपतवारों की वृद्धि को आर्थिक क्षति स्तर की सीमा से नीचे बनाये रखना। कीटनाशक रसायनों का कम से कम उपयोग करके पर्यावरण संतुलन को सुरक्षित बनाये रखना।
  • अवरूद्ध कृषि उत्पादन में वृद्धि लाना।