कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

तोरिया

खरीफ एग्रोक्लाइमेटिक जोनवार धान संकर धान बासमती एवं सुगंधित धान सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसीफिकेशन जीरो टिल से बुवाई मक्का बाजरा ज्वार सॉवा कोदो राम दाना की खेती मूंगफली सोयाबीन तिल अंडी (अरण्ड) अरहर मूंग उर्द सहफसली खेती खरपतवार नियंत्रण लोबिया तोरिया हरा चारा बीज का महत्त्व क्रॉस एवं मोथा ऊसर सुधार कार्यक्रम सनई की खेती जैव उर्वरक महत्ता एवं उपयोग फसल सुरक्षा रसायनों का नाम व मूल्य पोषक तत्व प्रबंधन फसल चक्र यंत्र एवं मशीनरी खरीफ फसलों के आंकड़े (परिशिष्ट एक एवं दो ) एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन कार्यक्रम का मासिक कैलेंडर सघन पद्धतियाँ 2016 मशरूम की खेती जैविक खेती फसलों के अवशेष धान की बुवाई रक्षा रसायन प्रमुख रासायनिक उर्वरक खरीफ फसलों के आंकड़े नकली एवं मिलावटी उर्वरकों की पहचान सत्यापित प्रजातियां महत्वपूर्ण दूरभाष नम्बर

खेत की तैयारी
पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताइंया देशी हल से करके पाटा देकर मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए।

उन्नतिशील प्रजातियां

प्रजाति उत्पादन क्षमता(कु./हे.) पकने की अवधि (दिन) उपयुक्त क्षेत्र
टा-36 (पीली) 10-12 95-100 मध्य उत्तर प्रदेश
टा-9 (काली) 12-15 90-95 सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश
भवानी (काली) 10-12 75-80 सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश
पी०टी०-303 (काली) 15-18 90-95 सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश
पी०टी०-30 (काली) 14-16 90-95 उ०प्र० का तराई क्षेत्र

बीज दर
4 किग्रा० बीज एक हेक्टर क्षेत्रफल की बुवाई के लिए पर्याप्त होता है।

बुवाई का समय
तोरिया के बाद गेहूं की फसल लेने के लिए इनकी बुवाई सितम्बर के प्रथम पखवारे में समय मिलते ही अवश्य कर लेनी चाहिए, परन्तु भवानी प्रजाति की बुवाई सितम्बर के दूसरे पखवारे में ही करें।

उर्वरक की मात्रा
उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी परीक्षण की संस्तुति के आधार पर किया जाना सर्वोत्तम है। यदि मिट्टी परीक्षण सम्भव न हो पाये तो

  • असिंचित क्षेत्रों में 50 किग्रा० नत्रजन तथा 20 किग्रा० फास्फोरस प्रति हे० की दर से अन्तिम जुताई के समय प्रयोग करना चाहिए।
  • सिंचित क्षेत्रों में 100 किग्रा० नत्रजन तथा 50 किग्रा० फास्फोरस प्रति हेक्टर देना चाहिए। फास्फेट का प्रयोग सिंगिल सुपर फास्फेट के रूप में अधिक लाभदायी होता है क्योंकि इससे 12 प्रतिशत गन्धक की भी उपलब्धता हो जाती है। सिंगिल सुपर फास्फेट के न मिलने पर 2 कु० जिप्सम प्रति हे० का प्रयोग करें। फास्फोरस की पूरी मात्रा तथा नत्रजन की आधी मात्रा अन्तिम जुताई के समय नाई या चोंगे द्वारा बीज से 2-3 सेमी० नीचे प्रयोग करना चाहिए। नत्रजन की शेष मात्रा पहली सिंचाई (बुवाई के 25 से 30 दिन बाद) टाप ड्रेसिंग के रूप में देना चाहिए। अधिकतम उपज के लिए 90 किग्रा० नत्रजन तक दिया जा सकता है।

बुवाई की विधि
बुवाई देशी हल से करनी चाहिए। बुवाई के बाद बीज ढकने के लिए हल्का पाटा लगा देना चाहिए। बुवाई 30 सेमी० की दूरी पर 3 से 4 सेमी० की गहराई पर कतारों में करना चाहिए।

निराई गुडाई
बुवाई के 15 दिन के अन्दर घने पौधों को निकालकर पौधों की आपसी दूरी 10-15 सेमी० कर देनी चाहिए तथा खरपतवार नष्ट करने के लिए 35 दिन की अवधि पर एक निराई-गुड़ाई भी कर देनी चाहिए। खरपतवार नष्ट करने के लिए 3.3 लीटर प्रति हे० पेन्डीमेथलीन 30% का प्रयोग बुवाई के 3 दिन के अन्दर प्रयोग करें।

सिचाई
तोरिया फूल निकलने तथा दाना भरने की अवस्थाओं पर जल की कमी के प्रति विशेष संवेदनशील है। अतः अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए इन दोनों अवस्थाओं पर सिंचाई करना आवश्यक है। यदि एक ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो तो वह फूल निकलने पर (बुवाई के 25-30 दिन बाद) करें।

फसल सुरक्षा
बीज शोधन

बीज जनित रोगों से सुरक्षा के लिए यथासम्भव संशोधित उपचारित एवं प्रमाणित बीज ही बोना चाहिए। यह सम्भव न हो तो निम्नांकित विधि से बीजोपचार करके बुवाई करना चाहिए। यदि बीज जनित रोगों से सुरक्षा के लिए 25 ग्राम थीरम प्रति किग्रा० बीज की दर से बीज को उपचारित करके बोयें।

खड़ी फसल पर कीट रोग उपचार

अ- क्षेत्र

1. अल्टरनेरिया झुलसा
पहचान

इस रोग में पत्तियों तथा फलियों पर गहरे कत्थई रंग के धब्बे बनते हैं, जिसमें गोल-गोल छल्ले केवल पत्तियों पर स्पष्ट दिखाई देते हैं।

उपचार
झुलसा सफेद गेरूई तथा तुलासिता रोग की रोकथाम हेतु निम्नलिखित में से किसी एक रसायन का छिड़काव प्रति हेक्टर 800-1000 लीटर पानी में मिलाकर करें।

  • मैकोजेब 75 प्रतिशत 2 किलोग्राम।
  • जाइरम 80 प्रतिशत 2 किलोग्राम।
  • जिनेब 75 प्रतिशत 2.5 किग्रा।
  • जाइरम 27 प्रतिशत के 3 लीटर।

2. सफेद गेरूई
पहचान

इस रोग में पत्तियों की निचली सतह पर सफेद फफोले बनते हैं और बाद में पुष्प विन्यास विकृत होता है।

उपचार
इसकी रोकथाम भी उपयुक्त रसायनों से की जा सकती है। नोटः 30 दिन की फसल पर एक अवरोधक छिड़काव करना लाभदायक होगा।

ब-कीट

1. आरा मक्खी
पहचान

इसकी गिडारें सरसों कुल की सभी फसलों को हानि पहुंचाती हैं, गिडारें काले रंग की होती है जो पत्तियों को बहुत तेजी से किनारे से अथवा भिन्न आकार के छेद बनाती हुई खाती हैं, जिससे पत्तियां बिल्कुल छलनी हो जाती हैं।

उपचार
निम्नलिखित किसी एक कीटनाशक रसायन का प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करें

  • डाइक्लोरवास 76 प्रतिशत ई०सी० 0.5 लीटर।
  • मैलाथियान 50 ई०सी० 1.5 लीटर।
  • क्यूनालफास 1.5 प्रतिशत धूल 20 किग्रा०।