कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसीफिकेशन

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प्रदेश में विद्यमान परिस्थितियों एवं उपलब्ध संसाधनों के दृष्टिगत धान पैदावार बढ़ाने हेतु ऐसी पद्धति की आवश्यकता है जिसे अपनाकर पर्यावरण सुरक्षित रखते हुए निवेशों का दक्षतापूर्वक उपयोग कर कम लागत से अधिक से अधिक उत्पादकता प्राप्त की जा सके। वर्णित यह सभी खूबियां धान उत्पादन की एस.आर.आई. पद्धति में विद्यमान हैं।

एस.आर.आई. क्या है?
सिस्टम ऑफ राईस इन्टेन्सीफिकेशन जो संक्षेप में एस.आर.आई अर्थात स्री पद्धति के नाम से प्रचलित है, धान की एक ऐसी पद्धति है जिसमें मृदा उत्पादकता, जल उपयोग दक्षता, श्रम शक्ति एवं निवेशित पूंजी की दक्षता एक साथ बढ़ाने की क्षमता है। स्री पद्धति से उगाई गई फसल द्वरा परम्परागत विधि से उगाई फसल की अपेक्षा औसतन 10-30% अतिरिक्त पैदावार विभिन्न स्थानों पर प्राप्त की गयी है। स्री पद्धति के अन्तर्गत न केवल अतिरक्ति उपज प्राप्त होती है बल्कि 50% तक सिंचाई जल की बचत, 90% तक बीज की बचत, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, 30-40% रासायनिक उर्वरक बचत, कम निवेशों के फलस्वरूप उत्पादन लागत में कमी का दावा किया जाता है। उक्त के दृष्टिगत एस.आर.आई. पद्धति को एक स्थाई उत्पादन पद्धति के रूप में देखा जाता है न कि सिर्फ अधिक उपज प्राप्त करने की विधि।

एस.आर.आई. पद्धित से धान की खेती

भूमि का चयन
मध्यम एवं भारी. भुमि जिनमें सिंचाई तथा जल निकास की उचित व्यवस्था हो, उपयुक्त है। स्री पद्धति अपनाने हेतु ऊसरीली, नई तोड़ वाली भूमि एवं निचले क्षेत्र जहां जल भराव की संभावना रहती है उपयुक्त नहीं है।

पोषक तत्व प्रबन्धन
स्री पद्धति का लाभ जैविक ढंग से खेती करने पर अपेक्षाकृत अधिक पाया गया है। अतः खेत की तैयारी करते समय 15 टन गोबर/कम्पोस्ट खाद प्रति हैक्टेयर की दर से खेत में मिलायें। हरी खाद हेतु ढैंच की लगभग 45 दिन की फसल को पलट कर खेत में सड़ाने हेतु मिलाकर पानी भर दें। ढैंचा सड़ने में लगभग 10 दिन का समय लगेगा। अतः उचित होगा कि जिस दिन ढैंचा पलटा जाये उसी दिन धान पौध तैयार करने हेतु नर्सरी डाल दी जाये।

नर्सरी तैयार करना
स्री पद्धति के अन्तर्गत कम अवधि (8–12 दिन) की पौध रोपी जाती है। नर्सरी को यथासम्भव मुख्य खेत के समीप ही रखा जाये जिससे नर्सरी से पौध निकालने के बाद शीघ्रतिशीघ्र रोपाई हो जाये। नर्सरी हेतु 5-6 इंच उठी तथा 4 फुट चौड़ी आवश्यकतानुसार लम्बाई की क्यारियाँ बनाये । उठी हुई क्यारियों से जड़ो को बगैर नुकसान पहॅुचाए पौधों को आसानी से निकाला जा सकेगा। एक हैक्टेयर खेत की रोपाई के लिये 1000 वर्गफुट की नर्सरी पर्याप्त होगी। उठी हुई क्यारियॉ निम्नानुसार तैयार करें।

पहली पर्त : 1 इंच मोटी सड़ी गोबर की खाद

दूसरी पर्त : 1.5 इंच मोटी खेत की भुरभुरी मिट्टी

तीसरी पर्त: 1 इंच मोटी सड़ी गोबर की खाद

चौथी पर्त : 2.5 इंच मोटी खेत की भुरभुरी मिट्टी

उपरोक्त सभी पर्तो को ठीक से मिला कर भुरभुरा बना लें। एक हैक्टेयर क्षेत्रफल की रोपाई के लिये नर्सरी तैयार करने हेतु 6 किग्रा. बीज की आवश्यकता होगी। तैयार की गई थ्यारियों में बीज को एक समान रूप से बिखेर कर सड़ी गोबर की खाद या खेत की मिटटी को भुरभुरा करके बीज को तुरन्त ढक दें। बीज को ढकने के लिये धान के पुआल का भी उपयोग किया जा सकता है। जिससे बीज को सीधे धूप व वर्षा तथा चिड़ियों द्वरा पहॅुचने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। क्यारियों में अंकुरित बीज की बोवाई भी की जा सकती है।

नर्सरी को मैट अर्थात चटाई विधि से भी तैयार किया जा सकता है। चटाई विधि से नर्सरी तैयार करने हेतू पॉलीथिन या उर्वरकों की खाली बोरियों का उपयोग किया जा सकता है।

क्यारियों में पर्याप्त नमी बनाये रखने के लिए फव्वारा विधि से सिंचाई करना श्रेयस्कर होगा। सिंचाई क्यारियों के मध्य बनाई नालियों में पानी चलाकर भी की जा सकती है।