कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

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मूंगफली

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3. मूंगफली क्राउन राट
पहचान

अंकुरित हो रही मूंगफली इस रोग से प्रभावित होती है। प्रभावित हिस्से पर काली फफूंदी उग जाती है जो स्पषट दिखायी देती है।
उपचार
इसके लिए बीज शोधन अवश्य करना चाहिए।

4. डाईरूट राट या चारकोल राट
पहचान

नमी की कमी तथा तापक्रम अधिक होने पर यह बीमारी जड़ो में लगती है। जड़ो भूरी होने लगती हैं और पौधा सूख जाता है।

उपचार
बीज शोधन करें। खेत में नमी बनाये रखें। लम्बा फसल चक्र अपनायें।

5. बड नेक्रोसिस
पहचान

शीर्ष कलियां सूख जाती हैं। बाढ़ रूक जाती है। बीमार पौधों में नई पत्तियां छोटी बनती हैं और गुच्छे में निकलती हैं। प्रायः अंत तक पौधा हरा बना रहता है, फूल–फल नहीं बनते।

उपचार
जून के चौथे सप्ताह से पूर्व बुवाई न की जाय । थ्रिप्स कीट जो रोग का वाहक है का नियंत्रण निम्न कीटनाशक दवा से करें। डाईमेथोएट 30 ई.सी. एक लीटर प्रति हेक्टर की दर से ।

6. मूंगफली का टिक्का रोग (पत्रदाग)
पहचान
पत्तियों पर हल्के भूरे रंग के गोल धब्बे बन जाते हैं, जिनके चारों तरफ निचली सतह पर पीले घेरे होते हैं। उग्र प्रकोप से तने तथा पुष्प शाखाओं पर भी धब्बे बन जाते हैं।

उपचार
खड़ी फसल पर मैंकोजेव ( जिंक मैगनीज कार्बामेंट) 2 कि.ग्रा. या जिनेब 75 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 2.5 कि.ग्रा. अथवा जीरम 27 प्रतिशत तरल के 3 लीटर अथवा जीरम 80 प्रतिशत के 2 कि.ग्रा. के 2-3 छिड़काव 10 दिन के अन्तर पर करना चाहिए।

सूत्रकृमि
  • सूत्रकृमि जनित बीमारियों रोकने के लिये हरी खाद गर्मी की गहरी जुताई या खलियों की खाद का उचित मात्रा में प्रयोग किया जाये।
  • 10 किग्रा. फोरेट 10 जी बुवाई से पूर्व प्रयोग करें अथवा नीम की खली 10-15 कुन्तलध/हे. की दर से प्रयोग करें।
मुख्य बिन्दु
  • विभिन्न प्रजातियों के लिए निर्धारित बीज दर का ही प्रयोग करें एवं शोधित करके बोयें।
  • समय से बुवाई करें एवं दूरी पर विशेष ध्यान दें।
  • मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग संस्तुति के अनुसार अवश्य करें।
  • विशिष्ट राइजोबियम कल्चर का प्रयोग अवश्य करें।
  • खूटिंयां एवं फली बनते समय (पानी की कमी पर ) सिंचाई अवश्य करें।
  • फसल पूर्ण पकने पर ही खुदाई करें।
  • कीट/रोगों का सामायिक एवं प्राभावी नियन्त्रण अवश्य करें।
  • 20 किग्रा. प्रति हेक्टेयर सल्फर का प्रयोग अवश्य करें।