कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

कोदो

खरीफ एग्रोक्लाइमेटिक जोनवार धान संकर धान बासमती एवं सुगंधित धान सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसीफिकेशन जीरो टिल से बुवाई मक्का बाजरा ज्वार सॉवा कोदो राम दाना की खेती मूंगफली सोयाबीन तिल अंडी (अरण्ड) अरहर मूंग उर्द सहफसली खेती खरपतवार नियंत्रण लोबिया तोरिया हरा चारा बीज का महत्त्व क्रॉस एवं मोथा ऊसर सुधार कार्यक्रम सनई की खेती जैव उर्वरक महत्ता एवं उपयोग फसल सुरक्षा रसायनों का नाम व मूल्य पोषक तत्व प्रबंधन फसल चक्र यंत्र एवं मशीनरी खरीफ फसलों के आंकड़े (परिशिष्ट एक एवं दो ) एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन कार्यक्रम का मासिक कैलेंडर सघन पद्धतियाँ 2016 मशरूम की खेती जैविक खेती फसलों के अवशेष धान की बुवाई रक्षा रसायन प्रमुख रासायनिक उर्वरक खरीफ फसलों के आंकड़े नकली एवं मिलावटी उर्वरकों की पहचान सत्यापित प्रजातियां महत्वपूर्ण दूरभाष नम्बर

रोकथाम

  • यदि बीज प्रमाणित नहीं हैं तो बोने से 20 प्रतिशत नमक के घोल में डुबोकर तुरन्त स्केलेरेशिया को अलग कर देना चाहिए तथा शुद्ध पानी से 4-5 बार धोकर बीज का प्रयोग किया जाय खेत मैं गर्मी की जुताई अवश्य करनी चाहिए
  • फसल में फूल आने से पूर्व निम्न कृषि रक्षा रसायनो में से किसी एक छिड़काव 15 दिन के अंतर पर करना चाहिए
    क) जिरम 80 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 2.00 किलोग्राम प्रति हे0
    ख) मैंकोजेब घुलनशील चूर्ण 2.0 किग्रा. प्रति हे0
    ग) जिरम 75 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 2 किलोग्राम प्रति हे0

2. कडुवा
इस रोग रोग में बाली में काले जैसे कवक के बीजाणु भर जाते हैं आरम्भ में बीजाणु एक हल्के पिले रंग की झिल्ली से ढके रहते हैं जो आगे चलकर फटफटी हैं तथा बीजाणु बहार निकलकर फैल जाते है

रोकथाम
बुवाई से पूर्व बीजोपचार के उपरान्त ही बीज का प्रयोग बोने के लिए किया जाना चाहिए। बीजोपचार थिरम 75 प्रतिशत डी०सी०/डब्लू०पी० अथवा कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत डब्लू०पी० 2.5 ग्राम प्रति किग्रा० की दर करना चाहिए।

3. रतुआ/गेरूई
यह फफॅूदी जनित रोग है। प्रभावित पत्तियों पर भूरे रंग फफोले दिखाई पड़ते हैं। फलतः प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करता है जिससे पैदावार प्रभावित होती है।

रोकथाम
रोग के रोकथाम हेतु मैंकोजेब 75 डब्लू० पी० अथवा जिनेब 75 प्रतिशत डब्लू०पी० के 2 किग्रा० प्रति हे० की दर से खड़ी फसल पर छिड़काव करना चाहिए।

कीट
सधारणतया कोदों में हानिकारक कीट कम लगते हैं। जो कीट फसल को नुकसान पहुँचा सकते हैं वे निम्न हैं-1. दीमक 2. तना बेधक। इनके रोकथाम के उपाय निम्नवत् हैं

रोकथाम
तनाबेधक के रोकथाम हेतु फोरेट 10 प्रतिशत सी०जी० 10 किग्रा०प्रति हे० की दर से करना चाहिए।
दीमक के रोकथाम हेतु ब्यूबेरिया बैसियाना 1.15 प्रतिशत (जैव कीटनाशी) की 2.5 किग्रा० प्रति हे० 60-75 किग्रा० गोबर की खाद में मिलाकर हल्के पानी का छींटा देकर 8-10 दिन तक छाया में रखने के उपरान्त बुवाई के पूर्व आखिरी जुताई पर भूमि में मिला देने से दीमक सहित अन्य भूमिजनित कीटों की रोकथाम हो जाती है। खड़ी फसल में दीमक कीट का प्रकोप देखे जाने पर क्लोरोपाइरीफास 20 प्रतिशत ई०सी० की 2.5 ली०प्रति हे० की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करना चाहिए।

कटाई व मड़ाई
फसल कटाई के लिए माह सितम्बर व अक्टूबर में पक कर तैयार हो जाता है। फसल की कटाई जमीन से सटाकर करते हुए, बण्डल बनाकर एक सप्ताह सूखने के लिए छोड़ देते है। फिर थ्रेसिंग कर अनाज अलग कर लेते हैं।

उत्पादन औसत उत्पादकता 15-18 कुन्तल / हेक्टेयर
चारा 30-40 कुन्तल / हेक्टेयर

भण्डारण
कटाई तथा मड़ई के बाद बीज को धूप में भली भाँति सुखा लेना चाहिए। बीज में भण्डारण के समय नमी की मात्रा 10-12 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। बीज को थैलों में भरकर ऐसी जगह रखना चाहिए जहां नमी न हो।

मुख्य बिन्दु

  • गर्मी की जुताई अवश्य करें।
  • शोधित बीज का प्रयोग करें।
  • जैविक खाद एवं उर्वरक का प्रयोग संस्तुति के अनुसार करें।
  • पानी के निकासी की व्यवस्था करें।
  • खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान दें।
  • फसल सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें।