कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

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किसान का अधिकार किसान के द्वार

हरा चारा

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बहु कटान वाली ज्वार

एम०पी० चरी एवं पूसा चरी 23, एस०एस०जी० 89-8 (मीठी सुडान) एम०एफ०एस०एच० 3ए पंत सकर ज्वार-5 इन्हें एक से अधिक कटाई के लिए ज्वार की सबसे अच्छी किस्म माना गया है। इसमें 7-9 प्रतिशत प्रोटीन होती है। तथा ज्वार में पाया जाने वाला विष हाइड्रोसायनिक अम्ल भी कम होता है।

भूमि
दोमट भूमि, जिसका जल निकास अच्छा हो, इसकी खेती के लिए सर्वोत्तम है।

भूमि की तैयारी
एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा एक या दो जुताइयां देशी हल से करना चाहिए।

बुवाई का समय
प्रथम वर्षा होने पर जून, जुलाई में करनी चाहिए। सिंचाई साधन उपलब्ध होने पर बुवाई अप्रैल-मर्इ में भी की जा सकती है।

बीज दर
25-30 किग्रा० प्रति हे० बीज की आवश्यकता होती है।

बुवाई की विधि
प्रायः इसको छिटकवां बोते हैं, परन्तु मिलवां खेती में हल के पीछे बुवाई करना अच्छा रहता है।

उर्वरक
120-150 किग्रा० नत्रजन तथा 40 किग्रा० फास्फेट प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करके अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। नत्रजन की आधी मात्रा तथा पूरा फास्फोरस बुवाई के समय खेत में डालना चाहिए। शेष नत्रजन का प्रयोग बराबर-बराबर मात्रा में बुवाई के 25-30 दिन बाद, प्रथम कटाई पर तथा बाद की अन्य कटाइयों पर 15-20 किग्रा०/हेक्टर की दर से प्रयोग करना चाहिए।

सिंचाई
सूखे की अवस्था में 1 या 2 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है।

कटाई
पहली कटाई बुवाई के 50-60 दिन बाद करना चाहिए। इसके बाद हर 30-35 दिन बाद फसल काटने योग्य हो जाती है। इसकी तीन कटाइयॉ प्राप्त की जा सकती है। यदि बीज इकट्ठा करना हो तो एक बार से अधिक कटाई नहीं करनी चाहिए।

उपज
हरे चारे की उपज 750 से 800 कुन्तल प्रति हेक्टर प्राप्त हो जाती है।

मक्का

मक्का की खेती चारा तथा दाना दोनों के लिए की जाती है। इसका चारा मुलायम होता है तथा पशु चाव से खाते है। यह एक निर्वाहक आहार है। इसमें फलीदार फसलों की खेती जैसे लोबिया के साथ 2रू1 के अनुपात में की जानी चाहिए।

भूमि
अच्छे जल निकास वाली दोमट, बलुई दोमट भूमि इसकी खेती के लिए उपयुक्त है।

भूमि की तैयारी
एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा एक या दो जुताइयां देशी हल से करके भूमि तैयार की जाती है।

उन्नत किस्में
प्रायः दाने वाली जातियां चारे के काम में लाई जाती हैं। संकर मक्का में प्रोटीन, गंगा-2, गंगा-5, गंगा-7 संकुल मक्का में किसान, अफ्रीकन टाल और विजय तथा देशी में टाइप-41 मुख्य किस्में हैं। संकर मक्का के बीज में उत्पादित बीज चारे की बुवाई में प्रयोग किया जा सकता है।

बुवाई का समय
जून या जुलाई में पहली वर्षा होने पर इसकी बुवाई करनी चाहिए।

बीज दर
40-50 किग्रा० प्रति हेक्टर बीज शुद्ध फसल की बुवाई के लिए पर्याप्त होता है। फलीदार चारे जैसे लोबिया के साथ 3:1 के साथ मिलाकर बोना चाहिए।

बुवाई की विधि
बीज लाइनों में 30 सेमी० की दूरी पर बोना चाहिए।

उर्वरक
संकर तथा संकुल किस्मों में 80 से 100 किग्रा० तथा देशी किस्मों में 50-60 किग्रा० प्रति हे० की दर से नत्रजन की दो तिहाई मात्रा बुवाई के समय तथा शेष एक तिहाई बुवाई के 30 दिन बाद खेतों में डालना चाहिए

सिंचाई
वर्षाकाल में बुवाई करने पर सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

कटाई
प्रायः मादा मंजरियों के निकलने की अवस्था में फसल चारे के लिए काटनी चाहिए। यह अवस्था बुवाई के 65 से 75 दिन बाद आ जाती है।

उपज
हरे चारे की औसत उपज लगभग 250-300 कुन्तल प्रति हेक्टर होती है।

मकचरी

मकचरी की यह विशेषता है कि एक ही कल्ले से अनेक कल्ले फूटते हैं, जिसके कारण एक छोटा सा समूह बन जाता है। प्रति हेक्टर 40 किग्रा० बीज की आवश्यकता होती है इसकी बोने की विधि मक्का के समान है। 100 किग्रा० नत्रजन तथा 40 किग्रा० फास्फोरस प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करना चाहिए। फसल बुवाई के 2-5.3 माह बाद चारे की कटाई के योग्य होती है। एम०पी० चरी की भांति इसकी भी दो से तीन कटाइयां प्राप्त की जा सकती हैं परन्तु उपज उससे कुछ कम होती है।