कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

उर्द

बुवाई की विधि

उर्द की बुवाई कूंडो में करना चाहियें। कूंड से कूंड की दूरी 20-25 सेमी. कूंड रखना चाहिये। बुवाई के तुंरन्त बाद पाटा लगा देना चाहियें।

बुवाई का समय

बुवाई क उपयुक्त समय 15 फरवरी से 15 मार्च।

उर्वरकों का प्रयोग

सामान्यतः उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण की संस्तुतियों के अनुसार किया जाना चाहिये अथवा उर्वरक की मात्रा निन्नानुसार निर्धारित की जायें।

15-20 किलो नत्रजन, 40 किलो फास्फोरस 20 किग्रा० पोटाश एवं 20 किग्रा० गन्धक प्रति हेक्टर प्रयोग करें।

फास्फोरस प्रयोग से दाने की उपज मे विशेष वृद्धि होती हे। उर्वरकों की सम्पूर्ण मात्रा बुवाई के समय कूडो में बीज से 2-3 सेमी. नीचे देनी चाहियें। यदि सुपरफास्फेट उपलब्ध न हो तो 1 कुन्तल डी0ए0पी0 तथा 2 कुन्तल जिप्सम का प्रयोग बुवाई के समय किया जाये।

सिंचाई

पहली सिंचाई 30-35 दिन बाद करनी चाहिए। पहली सिंचाई बहुत जल्दी करने से जड़ों तथा ग्रन्थियों का विकास ठीक प्रकार नहीं होता है। बाद में आवश्यकतानुसार 10-15 दिन बाद हल्की सिंचाई करते रहें। स्प्रिकलर से सिंचाई अत्यधिक लाभप्रद रहता है।

खरपतवार नियंत्रण

मूंग की भाति करे।