कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

सूरजमुखी

फसल सुरक्षा

दीमक

इस कीट के श्रमिक फसल को भारी क्षति पहॅचाते है।

नियंत्रण : बुवाई से पूर्व

  • पूर्व फसल के अवशेषों को नष्ट कर देना चाहियें।
  • अच्छी ⁄ सड़ी गोबर ⁄ कम्पोस्ट खाद का ही प्रयोग करना चाहिए।
  • दीमक के नियंत्रण हेतु 2.5 किग्रा० ब्यूवेरिया बैसियाना को लगभग 75 किग्रा० गोबर की खाद में मिलाकर एक सप्ताह छाया में फैलाने के बाद प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करें।

खडी फसल में प्रकोप दिखाई देने पर

अ. सिंचाई के पानी के साथ क्लोरपाइरीफास 20 ई०सी० 2.5-3.5 लीटर प्रति हे० की दर से प्रयोग करना चाहिए।

हरे फुदके

इस कीट के प्रौढ़ तथा बच्चे पत्तियों से रस– चूसकर हानि पहुंचाते हैं। इससे पत्तियों पर धब्बे पड़ जाते हैं। इसके नियन्त्रण हेतु एजाडिरोक्टिन 0.15% ई०सी० 2.50 लीटर या मिथाइल ओडिमेटान 25% ई०सी० 1 लीटर या डाइमेथोएट 30% ई०सी० की 1.00 लीटर मात्रा का 600-800 लीटर पानी के साथ प्रति.हे. या इमिडाक्लोपिड 250 ग्राम छिड़काव करें। यह छिड़काव अपरान्ह देर से करना चाहिए ताकि परसेंचन क्रिया प्रभावित न हो।

डस्की बग

सुरमई रंग की यह छोटी छोटी बग पत्तियों डंठल एंव मुडक की निचली सतह से रस चूसकर हानि पहुचाते है। अधिक संख्या हो जाने पर पौधें कमजोर हो जाते है। और पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है। अधिक हरे फुदको के लिए संस्तुत उपचार इसके लिए भी प्रभावी है।

चने की फलीवेधक

इस कीट की सूडियों मुडक मे बन रहे बीजो को खाकर काफी क्षति पहुचाती है।

नियंत्रण

  • सर्वेक्षण के लिए 8 तथा नियंत्रण के लिए 10-12 फेरोमोन ट्रेैप प्रति हे. की दर से लगाना चाहियें।
  • प्रति ट्रेप औसत 5-8 पतंगे प्रति रात्रि लगातार 2-3 रातों तक आने के 20-25 दिन बाद एन.पी.वी. (एच) 250-300 सॅूडी समतुल्य या बी.टी. की 1 किग्रा. मात्रा को लगभग 350-400 ली. पानी में घोल कर सांय काल छिड़काव करना चाहिए। एक ग्राम टिपोल प्रति लीटर घोल में मिला देने से परिणाम अच्छे मिलते हैं। क्यूनालफास 25% र्इ.सी. 2.00 लीटर या फेनवेलरेट 1.00 ली. प्रति हे. की दर से 800-1000 लीटर पानी में घोल कर सांयकाल जब मधुमक्खियाँ कम से कम क्रियाशील हो, छिड़काव करना चाहिए।

कटाई मड़ाई
जब सूरजमुखी के बीज पक कर कडे हो जाये तो मुडको की कटाई कर लेना चाहिये। पके हुए मुडको का पिछला भाग पीला रंग का हो जाता है। मुडको को काटकर सायें मे सुखा लेना चाहियें। और इन्हे ढेर बनाकर नही रखना चाहियें इसके बाद मडाई डण्डे से पीटकर की जाती है। मडाई हेतु सूरजमुखी थ्रेसर का प्रयोग किया जाना उपयुक्त होगां।

उपज एवं भण्डारण
सूरजमुखी फसल की संकुल प्रजातियों की औसत उपज 12-15 कु0 तथा संकर प्रजातियों का 20-25 कु0 प्रति हे0 हो जाता है। सूरजमुखी के बीज को सामान्य परिस्थियों के अन्तर्गत भण्डारित किया जा सकता है। परन्तु बीजों में नमी 8-10 प्रतिशत से अधिक नही होनी चाहियें। अतः बीजों को अच्छी तरह सुखा लेना चाहियें। बीज से तीन महीने के अन्दर तेल निकाल लेना चाहियें। अन्यथा तेल मे कडुवाहट आ जाती है।

प्रभावी बिन्दु

  • फरवरी मे बुवाई अवश्य करे।
  • 200 किलोग्राम प्रति हेक्टर जिप्सम का प्रयोग अवश्य करें।
  • 15 दिन पर विरलीकरण कर पौधे से पौधे की दूरी 15-20 से.मी. सुनिश्चित करें।
  • क्रान्तिक अवस्थाओं में सिंचार्इ अवश्यक करें। (फूल निकलते एवं दाना भरते समय)
  • प्रथम सिंचाई के पश्चात् पौधों पर मिट्टी अवश्य चढ़ा दी जाये।