कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

जायद में गन्ने की खेती

खरपतवार नियंत्रण हेतु निम्नलिखित विधियॉ अपनाई जा सकती है

1. यांत्रिक नियंत्रण

गन्ने के खेत को कस्सी/कुदाल/फावड़ा/कल्टीवेटर आदि से गुड़ाई करके खरपतवार नियंत्रित किया जा सकता है।

2. सूखी पत्ती बिछाना

जमाव पूरा हो जाने के उपरान्त गन्ने की दो पंक्तियों के मध्य आठ से बारह सेमी० सूखी पत्तियों की तह बिछाना चाहिए। सावधानी के तैार पर 25 किग्रा० मैलाथियान का 5 प्रतिशत धूल या लिण्डेन 1.3 प्रतिशत धूल का प्रति हेक्टेयर की दर से सूखी पत्तियों पर धूसरण करना चाहिए।

3. रासायनिक नियंत्रण

अ) 2-4 पी (50 डब्लू)

2.21 किग्रा० प्रति हेक्टेयर एवं 2-4 डी सोडियम साल्ट 80 प्रतिशत टेक्नीकल 1.25 किग्रा० प्रति हे० की दर से जमाव पूर्व प्रयोग करें।

ब) पेंडामिथलीन- 3.3 लीटर/हे

मोथा एवं एक बीज पत्रीय खरपतवारों के प्रभावी नियंत्रण हेतु 3 किग्रा०प्रति हे० की दर से जमाव से पूर्व प्रयोग करें।

स) एट्राजीन 50 प्रतिशत पी व 2-4 डी : सोडियम साल्ट 80 प्रतिशत टेक्नीकल

एट्राजीन 2.00 किग्रा० प्रति हे० जमाव पूर्व तथा 2-4 डी सोडियम साल्ट 80%,2.00 किग्रा० प्रति हे० की दर से जमाव पूर्व प्रयोग करने से अधिकांश एक बीज पत्रीय व दिवबीज पत्रीय खरपतवार नष्ट हो जाते हैं।

प्रमुख रोग, उनका आपतन काल लक्षण एवं नियंत्रण

रोग का नाम आपतन काल प्रमुख लक्षण
काना रोग जुलाई के अंत तक 1. अगोले के ऊपर से तीसरी व चौथी पत्ती के किनारे से गन्ना सूखने लगता है।
2.रोग की अंतिम अवस्था में पूरा अगोला सूख जाता है।
3.तने को लंबवत चीरने पर गूदे का रंग लाल तथा इसमें सफेद धब्बे दिखाई पड़ते हैं।
4.गूदे से सिरके जैसे गंध आने लगती है। पूरा गन्ना सूख जाता है और सूखा गन्ना गॉठों पर से सरलता से टूट जाता है।
कण्डुआ रोग का नाम वर्ष भर विशेषकर आपतन काल अप्रैल व जून, अक्टूबर, नवम्बर तथा फरवरी 1.गन्ने अपेक्षाकृत पतले हो जाते हैं तथा तने प्रमुख लक्षण पर पतली व नुकीली पत्तियॉ एक ही गॉठ से विपरीत दिशाओं में निकलने लगती हैं।
2.रोग की अंतिम अवस्था में अग्रभाग की बढ़वार रूक जाती है और लंबा कोढ़ा निकल जाता है।
3.गन्ने की निचली ऑखें समय से पूर्व अंकुरित हो जाती है।
उकठा अक्टूबर से अंत तक 1.धीरे-धीरे गन्ने का पूरा अगोला सूख जाता है।
2.पूरा गन्ना खोखला हो जाता है।
3.लंबवत् चीरने पर खोखले भाग में भूरे रंग की फफूदी भरी दिखाई देती है।
लाफ स्काल्ड अक्टूबर से अंत तक 1.अगोले की पत्तियॉ सुख कर सीधी हो जाती है तथा बाद में धीरे-धीर अगोला सूख जाता है।
2.नीचे से प्रारम्भ हो कर क्रमशः ऊपर की सभी ऑखें समय से पूर्व अंकुरित हो जाती हैं और फिर निकले किल्ले सूख जाते है।
3.तने के आंतरिक ऊतकों में लाल रंग की महीन धारियॉ पड़ जाती है जो गॉठों पर अधिक सघन होती है
ग्रासीशूट प्रारम्भ से अंत तक 1.पत्तियॉ र्अद्धपारदर्शक कागज की तरह हल्के पीले रंग की हो जाती है। तथा मध्य धारी के सामानान्तर सफेद धारियॉ पड़ जाती हैं।
2.पूरा थान झाड़ीनुमा हो जाता है।

नियंत्रण

गन्ने में वानस्पतिक प्रवर्धन होने के कारण अधिकांश फसल वर्ष स्वतः संक्रमित होती रहती है। अतः नियंत्रण की अपेक्षा सावधानी हेतु निम्न सरल उपाय अति आवश्यक है

  • रोगरोधी जातियों का चयन।
  • स्वस्थ बीज का चयन।
  • रोगोन्मूलन-

    • रोगी फसल की पेड़ी नहीं रखनी चाहिए।
    • फसल चक्र अपनाना चाहिए ताकि गन्ने के बाद पुनः गन्ना न लिया जा सके।
    • खेत में जल निकास की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
    • फसल कटाई के उपरान्त गहरी जुताई करनी चाहिए।