कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

जायद में गन्ने की खेती

गन्ने की उत्पादकता एवं चीनी परता में अभिवृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए यह अत्यन्त आवश्यक है कि इस प्रकार की आधुनिक तकनीकी पर आधारित गन्ने की खेती की जाये, जिससे गन्ने का उत्पादन बढ़े साथ ही साथ उसके प्रसंस्करण के उपरान्त अधिकाधिक चीनी प्राप्त हो। साथ ही यह भी प्रयास होना चाहिए कि गन्ना उत्पादन लागत में अत्याधिक वृद्धि न होने पाये।

फसल चक्र

1. पश्चिमी क्षेत्र

  • चारा-लाही-गन्ना-पेड़ी+लोबिया (चारा)- गेहॅू
  • धान-बरसीम-गन्ना-पेड़ी+लोबिया (चारा)
  • धान-गेहॅू-गन्ना-पेड़ी-गेहॅू-मॅूग

2. मध्य क्षेत्र

  • धान-राई-गन्ना पेड़ी-गेहॅू
  • हरी खाद-आलू-गन्ना-पेड़ी-गेहॅू
  • चारा-लाही-गन्ना-पेड़ी+लोबिया (चारा)

3. पूर्वी क्षेत्र

  • धान-लाही-गन्ना-पेड़ी-गेहॅू
  • धान-गन्ना-पेड़ी-गेहॅू
  • धान-गेहॅू-गन्ना-पेड़ी+लोबिया (चारा)

भूमि का चुनाव

गन्ने की खेती के लिए सामान्यतः 10-15 प्रतिशत नमी युक्त दोमट भूमि उपयुक्त रहती है।

भूमि की तैयारी

यदि मृदा में नमी कम हो तो गन्ना बुवाई से पूर्व नमी की कमी को पलेवा कर के पूरा किया जा सकता है। तत्पश्चात् मिट्टी पलटने वाले हल से एक गहरी जुतई तथा 2-3 उथली जुताइयॉ करके पाटा लगाना चाहिए।

बुवाई का समय

उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में 30-35 डि०से० का तापक्रम वर्ष में दो बार अक्टूबर एवं फरवरी-मार्च में आता है। जो गन्ने की बुवाई के लिए उपयुक्त समय के साथ के साथ ही सर्वोत्तम जमाव हेतु भी उपयुक्त है।

सं० क्रम० मौसम बसन्त बुवाई का समय
1. पूर्वी क्षेत्र 15 जनवरी से फरवरी
2. मध्य क्षेत्र 15 फरवरी से 15 मार्च
3. पश्चिम क्षेत्र 15 फरवरी से 15 मार्च

पंक्तियों के मध्य की दूरी एवं बीज

सामान्यतयः पंक्ति से पंक्ति के मध्य 90 सेमी० दूरी रखने एवं तीन ऑख वाले टुकड़े बोने पर लगभग 37.5 हजार टुकड़े अथवा गन्ने की मोटाई के अनुसार 60-65 कुन्तल बीज गन्ना प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग किया जाता है।

बीज गन्ना

सामान्यतयः स्वीकृत पौधशालाओं से संस्तुत उन्नतशील गन्ना जातियों का रोग व कीटमुक्त, शत प्रतिशत शुद्ध 12 माह की आयु की फसल से बीज का चुनाव किया जाता है किन्तु वैज्ञानिक प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ है कि गन्ने के 1/3 ऊपरी भाग का जमाव अपेक्षाकृत अच्छा होता है तथा 12 माह की फसल की तुलना में 7-8 माह की फसल से लिए गये बीज का जमाव भी अपेक्षाकृत अच्छा होता है। बोने से पूर्व गन्ने के दो अथवा तीन ऑख वाले टुकड़े काट कर कम दो घंटे पानी में डुबो लेना चाहिए तदुपरान्त किसी पारायुक्त रसायन (एरीटान 6 प्रतिशत या ऐगलाल 3 प्रतिशत) का क्रमशः 0.25 या प्रतिशत के घोल में शोधित कर लेना चाहिए। बीजशोधन के लिए बावसटीन 0.1 प्रतिशत घोल का भी प्रयोग किया जा सकता है।

अगेती गन्ना प्रजातियाँ को० जे०-64 को०शा०-8436 को०शा०-88230
को०शा०-95255 को०शा०-98231 को०शा०-95436
को०शा०-96268 को०से०-00235 को०से०-01235 आदि।
मध्य देर से पकने वाली प्रजातियॉ को०शा०-96275 को०शा०-97261 यू०पी०-0097
ह्रदय), यू०पी०-39, को०शा०-96269 (शाहजहॉ),
को०शा०- 99259 (अशोक), को०से०-1424,
को०शा०-767, को०शा०-8432, को०शा०-92423
को०शा०-95422 को०शा०-97264 को०पन्त०-84212 आदि।