कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

जैविक कीटनाशी

मेटाराइजियम एनिसोप्ली के प्रयोग की विधि

  • भूमि शोधन हेतु मेटाराइजियम एनिसोप्ली की 2.5 किग्रा० प्रति हे० लगभग 75 किग्रा० गोबर की खाद में मिलाकर अन्तिम जुताई के समय प्रयोग करना चाहिए।
  • खड़ी फसल में कीट नियंत्रण हेतु 2.5 किग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर से 400-500 लीटर पानी में घोलकर सायंकाल छिड़काव करें जिसे आवश्यकतानुसार 15 दिन के अंतराल पर दोहराया जा सकता है।

5. वर्टीसीलियम लैकानीः

वर्टीसीलियम लैकानी फफूँद पर आधारित जैविक कीटनाशक है। वर्टीसीलियम लैकानी 1-15% W.P के फार्मुलेशन में उपलब्ध है जो विभिन्न प्रकार के फसलों में चूसने वाले कीटों यथा सल्क कीट, माहू, थ्रिप्स, जैसिड, मिलीबग आदि के रोकथाम के लिए लाभकारी हैं। वर्टीसीलियम लैकानी के प्रयोग के 15 दिन पहले एवं बाद में रासायनिक फफूंदीनाशक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। वर्टीसीलियम लैकानी की सेल्फ लाइफ एक वर्ष है।

वर्टीसीलियम लैकानी के प्रयोग की विधि

1. खड़ी फसल में कीट नियंत्रण हेतु 2.5 किग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर से 400-500 लीटर पानी में घोलकर आवश्यकतानुसार 15 दिन के अंतराल पर सांयकाल छिड़काव करना चाहिए।

6. बैसिलस थूरिनजियेन्सिस (बी०टी०)

बैसिलस थूरिनजियेन्सिस बैक्टीरिया पर आधारित जैविक कीटनाशक है। बैसिलस थूरिनजियेन्सिस प्रजाति कर्सटकी, 05% डब्लू०पी० विभिन्न प्रकार के फसलों, सब्जियों एवं फलों में लगने वाले लेपिडोप्टेरा कुल के फली बेधक, पत्ती लपेटक, पत्ती खाने वाले कीटों की रोकथाम के लिए लाभकारी है। बैसिलस थूरिनजियेन्सिस के प्रयोग के 15 दिन पूर्व या बाद में रासायनिक बैक्टेरीसाइड का प्रयोग नहीं करना चाहिए। बैसिलस थूरिनजियेन्सिस की सेल्फ लाइफ एक वर्ष है।

बैसिलस थूरिनजियेन्सिस के प्रयोग की विधि

1. खड़ी फसल में कीट नियंत्रण हेतु 0.5-1.0 किग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर से 400-500 लीटर पानी में घोलकर आवश्यकतानुसार 15 दिन के अंतराल पर सायंकाल छिड़काव करना चाहिए।

7.न्यूक्लियर पालीहेड्रोसिस वायरस (एन०पी०वी०)

एन०पी०वी० वाइरस पर आधरित जैविक कीटनाशक है, जा चना की सूंडी एवं तम्बाकू की सूंडी के नियंत्रण के लिए प्रयोग में लाया जाता है। चने की सूंडी के बना हुआ जैविक कीटनाशक 2% A.S. एवं तम्बाकू की सूंडी से बना हुआ जैविक कीटनाशक 0-5% A.S. के फार्मुलेशन में उपलब्ध है। चने की सूंडी से बना हुआ एन०पी०वी० चने की सूंडी पर ही काम करता है। कीट की सूंडी के द्वारा वाइरस युक्त पत्ती या फली खाने के 3 दिन बाद सूंडियों का शरीर पीला पड़ने लगता है तथा एक सप्ताह बाद सूंडियॉ काले रंग की हो जाती है तथा शरीर के अन्दर द्रव भर जाता है। रोगग्रस्त सूंडियॉ पौधे की ऊपरी पत्तियों अथवा टहनियों पर उल्टी लटकी हुई पायी जाती है। एन०पी०वी० की सेल्फ लाइफ एक वर्ष है।

न्यूक्लियर पालीहेड्रोसिस वायरस के प्रयोग की विधि

1. खड़ी फसल में कीट नियंत्रण हेतु 250-300 लारवा के समतुल्य (एल०ई०) प्रति हेक्टेयर की दर से 400-500 लीटर पानी में घोलकर आवश्यकतानुसार 15 दिन के अंतराल पर सांयकाल छिड़काव करना चाहिए।

8. एजाडिरेक्टिन (नीम आयल)

एजाडिरेक्टिन वनस्पति पर आधरित वानस्पति कीटनाशक है। एजाडिरेक्टिन 0.03,0.15,0.3,0.5,1.0 एवं 5% E.C. के फार्मुलेशन में उपलब्ध हैं एजाडिरेक्टिन विभिन्न प्रकार के फसलों, सब्जियों एवं फलों में पत्ती खाने वाले, पत्ती लपेटने वाले, चूसने वाले, फली बेधक आदि कीटों के नियंत्रण के लिए प्रभावी है। इसके प्रयोग से कीटों में खाने की अनिक्षा उत्पन्न करती है तथा कीटों को दूर भगाती है। अण्डों से सूंडियॉ निकलने के तुरन्त बाद इसका छिड़काव करना अधिक लाभकारी होता है। एजाडिरेक्टिन की सेल्फ लाइफ एक वर्ष है।

एजाडिरेक्टिन के प्रयोग की विधि

खड़ी फसल में कीट नियंत्रण अथवा कीट के प्रयोग से पूर्व सुरक्षात्मक नियंत्रण हेतु एजाडिरेक्टिन 0.15% E.C. की 2.5 ली० मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर आवश्यकतानुसार 15 दिन के अंतराल पर सायंकाल छिड़काव करना चाहिए।

ख- जैविक एजेण्ट (परजीवी एवं परभक्षी)

1. ट्राइकोग्रामा कोलिनिस

ट्राइकोग्रामा कोलिनिस अण्ड परजीवी छोटी ततैया होती है। मादा ततैया अपने अण्डे को हानिकारक कीटों के अण्डों में डाल देती है। अण्डों के अन्दर ही पूरा जीवन चक्र पूरा होता है। प्रौढ़ ततैया अण्डे में छेद कर बाहर निकलता है। इसका जीवन चक्र निम्न प्रकार है।

अण्डा अवधि 16-24 घण्टे
लारवा अवधि 2-3 दिन
प्यूपा अवधि 2-3 दिन
पूर्ण जीवन चक्र 8-10 दिन (गर्मी)
9-12 दिन (जाड़ा)

ट्राइकोग्रामा की पूर्ति कार्ड के रूप में होती है। एक कार्ड की लम्बाई 6 इंच तथा चौड़ाई 1 इंच होती है जिसमें लगभग 20000 अण्ड परजीवी होते हैं। ट्राइकोग्रामा विभिन्न प्रकार के फसलों, सब्जियों एवं फलों के हानिकारक कीटों, जो पौधे की पत्तियों, कलियों तथा टहनियों आदि के बाहरी भाग पर अण्डे देते है, के अण्डों को जैविक विधि से नष्ट करने हेतु प्रयोग किया जाता है।

ट्राइकोग्रामा कोलिनिस (ट्राइकोग्रमा कार्ड) के प्रयोग की विधि

ट्राइकोग्रामा कार्ड को विभिन्न फसलों में एक सप्ताह के अन्तराल पर 3-4 बार लगाया जाता है। खेतों में हानिकारक कीटों के अण्डे दिखाई देते ही ट्राइकोकार्ड को छोटे-छोटे 4-5 सामान टुकड़ों में काट कर खेत के विभिन्न भागों में पत्तियों की निचली सतह पर धागें से बॉध दे। सामान्य फसलों में 5 कार्ड किन्तु बड़ी फसलों जैसे गन्ने में 10 कार्ड प्रति हेक्टेयर प्रयोग करना चाहिए। ट्राइकोग्राम कार्ड को सायंकाल खेत में लगाया जाय लेकिन इसके उपयोग से पहले, उपयोग के समय तथा बाद में खेत में रसायनिक कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए। ट्राइकोग्रामा कार्ड को बर्फ के डिब्बे या रेफ्रिजरेटर में रख कर जीवन चक्र लगभग 15 दिन तक और बढ़ाया जा सकता है।

2. क्राइसोपर्ला

क्राइसोपर्ला एक परभक्षी कीट है इस कीट का लारवा, सफेद मक्खी,मॉहू, फुदका, थ्रिप्स आदि के अण्डों एवं शिशु को खा जाता है। क्राइसोपर्ला के अण्डों को कोरसियेरा के अण्डों के साथ लकड़ी के बुरादायुक्त बाक्स में आपूर्ति किया जाता है क्राइसोपर्ला का लारवा कोरसियेरा के अण्डों को खाकर प्रौढ़ बनते है। इसका जीवन चक्र निम्न प्रकार है।

अण्डा अवधि 3-4 दिन
लारवा अवधि 11-13 दिन
प्यूपा अवधि 5-7 दिन
पूर्ण जीवन चक्र 19-24 दिन

क्राइसोपर्ला के प्रयोग की विधि

विभिन्न फसलों एवं सब्जियों में क्राइसोपर्ला के 50000-100000 लारवा या 500-1000 प्रौढ़ प्रति हेक्टेयर प्रयोग करना चाहिए। सामान्यतयाः इन्हें 2 बार छोड़ना चाहिए।

3. जाइगोग्रामा वाइकोलोराटा

जाइगोग्रामा वाइकोलोराटा गाजर घास का परभक्षी कीट है। इस कीट का प्रौढ़ एवं गिडार गाजर घास की पत्ती एवं फूल को खा जाते है। इस कीट को जुलार्इ-अगस्त के महीने में गाजर घास पर छोड़ने से उसको खाकर पूरी नष्ट कर देते है। इस कीट पर नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय फैजाबाद एवं राष्ट्रीय खरपतवार शोध केन्द्र, जबलपुर में शोध कार्य किया जा रहा है।

4. अन्य परभक्षी कीट

प्रेइंग मेन्टिस, इन्द्र गोप भृंग, ड्रोगेन लाई, किशोरी मक्खी, क्रिकेट (झींगुर), ग्राउन्ड वीटिल, रोल वीटिल, मिडो ग्रासहापर, वाटर वग, मिरिड वग आदि फसलों, सब्जियों आदि के खेतों में पाये जाते है जो हानिकारक कीटों के लारवा, शिशु एवं प्रौढ़ को प्राकृतिक रूप से खाकर नियंत्रण करते है। इन मित्र कीटों को संरक्षित करना चाहिए तथा खेतों में शत्रु एवं मित्र कीट का अनुपात 2:1 हो तो कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

5. परभक्षी मकड़ी

भेडिया मकडी, चार जबडे वाली मकडी, बौनी मकडी, थैली वाली मकडी, गोल मकडी, हली बग मकड़ी, गोलाकार मकड़ी, कूदने वाली मकड़ी धान के खेतों में पायी जाती है जो विभिन्न प्रकार के फुदकों, मैगेट, पत्ती लपेटक आदि कीटों के शिशु, लारवा एवं प्रौढ़ को खाकर प्राकृतिक रूप से नियंत्रण करते है। इन कीटों को संरक्षित करना चाहिए।

6. अन्य परजीवी कीट

सिरफिड लाई, कम्पोलेटिस क्लोरिडी, ब्रैकन, अपेन्टेलिस, इपीरीकेनिया मेलानोल्यूका आदि परजीवी कीट विभिन्न प्रकार के फसलों, सब्जियों एवं गन्ना के खेतों में पाये जाने वाले कीटों के लारवा, शिशु एवं प्रौढ़ को अन्दर ही अन्दर खाकर प्राकृतिक रूप से कीट का नियंत्रण करते है। इस मित्र परजीवी कीटों का संरक्षण करना चाहिए।

ग- गंधपाश (फेरोमोन ट्रैप)

फेरोमोन ट्रैप फसलों को क्षति पहुँचाने वाले सूडियों के नर पतंगों को फॅसाने के लिए प्रयोग किया जाता है। ट्रैप प्लास्टिक का बना होता है जिसमें कीप के आकार के मुख्य भाग पर लगे ढ़क्कन के मध्य में मादा कीट की गंधयुक्त ल्यूर लगाया जाता है जो नर पतंगों को आकर्षित करता है। कीप के निचले भाग पर पालीथीन की थैली लगायी जाती है जिसमें नर पतंगे फॅस जाते है। थैली के निचले मुख पर रबड़ बैण्ड हटाकर फॅसे पतंगों को मार कर निकाल दिया जाता है। ल्यूर विभिन्न प्रकार के नर कीटों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग गंध का बना होता है। चने का फली बेधक कीट, तम्बाकू कीट, भिड्डी का चित्तीदार कीट, कपास का गुलाबी कीट, धान का तना बेधक, बैंगन का फली व कलंकी बेधक, फल की मक्खी कीटों के प्रौढ़ को पकड़ने के लिए ल्यूर उपलब्ध है।

गंधपाश के प्रयोग की विधि

फेरोमोन ट्रैप को फसल की उॅचाई से लगभग 2 फीट ऊपर रखते हुए लकड़ी के गडे हुए डन्डे में ट्रैप के हत्थे को बॉध देते है। ल्यूर को बन्द थैली से निकालकर ट्रैप के ढक्कन में बने स्थान पर लगाया जाता है। बन्द थैली से निकाल कर ट्रैप में लगाने के बाद ल्यूर को 25 दिन बाद पुनः बदल देते है। हानिकारक पतंगों की उपस्थिति का पता करने के लिए 5-6 ट्रैप तथा अधिक से अधिक संख्या में नर कीट पतंगों को पकड़ने के लिए 15-20 ट्रैप प्रति हेक्टेयर दर से लगाया जाता है। फल की मक्खी के लिए बोतल ट्रैप कर सूक्ष्म फल मक्खी ट्रैप का प्रयोग किया जाता है।