कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन

उर्द एवं मूंग

  • ट्राइकोडर्मा विरिडी या ट्राइकोडर्मा हारजेनियम की 4.0 ग्रा० मात्रा अथवा इनकी या सूडोमोनास फ्लोरोसेंस की 3.0 ग्रा० मात्रा को 1.0 ग्रा० कार्बेडाजिंम या कार्बाक्सीन के साथ मिलाकर प्रति किग्रा० बीज को शोधित करना चाहिए।
  • बालदार सूंड़ी की प्रथम अवस्था में गिडारें पत्तियों की निचली सतह में रहती है अतः ऐसी पत्तियों को तोड़कर जमीन में दबा दें।
  • फेरोमोन ट्रैप (8-10) प्रति हे० की दर से लगाये जायं जिससे फली छेदक के वयस्क फेरोमोन ट्रैप में एकत्रित हो सकें।
  • समय से बुवाई करने पर फलीछेदक कीट का प्रकोप कम होता है। चने के फलीबेधक के प्रकोप होने पर 250 एलई हैलियोथिस एन०पी०वी० आवश्यक पानी (400-500 लीटर) में मिलाकर प्रति हे० की दर से 2-3 सूंड़ी प्रति पौधा दिखने पर छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव 7-10 दिन के अंतराल पर 2-3 बार करना चाहिए।
  • आवश्यकता पड़ने पर रासायनिक दवाओं की उचित मात्रा का प्रयोग उचित समय पर किया जाय।

सूरजमुखी

  • सूरजमुखी के नाशीजीवों के प्राकृतिक शत्रुओं जैसे इन्द्रगोप भृंग, किशोरी मक्खी, मकड़ी एवं क्राइसोपा आदि का संरक्षण एवं उपयोग करें।
  • अण्ड परजीवी एवं सूंडी परजीवी जैसे ट्राईकोग्रामा किलोनिस कैम्योलिटिस आदि का प्रयोग करें।
  • परभक्षी जैसे क्राइसोपा एवं काक्सीनेलिड को पालकर खेत में छोड़ा जाय।
  • एन०पी०वी० का छिड़काव करके हेड (मुण्डक) बोरर को नष्ट करें।
  • फेरोमोन ट्रैप लगाकर हैलिकोवर्पा व स्पोडेप्टेरा के नर कीटों को एकत्रित करके नष्ट करें।
  • नीम जनित रसायनों का छिड़काव हेड बोरर एवं तम्बाकू की सूंडी के लिए करें।

मक्का

  • फसल अवशेषों को नष्ट कर दें।
  • प्रारम्भिक अवस्था में प्रकोपित पौधों की सूड़ी सहित नष्ट कर दें।
  • जायद की फसल में गोभ बेधक मक्खी से प्रभावित क्षेत्रों में 20 प्रतिशत बीज की मात्रा बढ़ा दें।
  • मक्का तना बेधक के नियंत्रण हेतु फसल जमाव के 10-15 दिन बाद ट्राइकोग्रामा किलोनिस के 50000 अण्डे प्रति हेक्टर की दर से 5-6 दिन के अन्तराल पर 3-4 बार लगाये।
  • बालदार सूंड़ी के लिए उपरोक्त विधि अपनाये।