कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

मूंग

मूंग जायद की प्रमुख फसल है विगत् वर्षो में मूंग के अन्तर्गत प्रदेश में आच्छादन, उत्पादन एंव उत्पादकता का विवरण निम्नवत् है।

वर्ष क्षेत्रफल (हे.) उत्पादन (मी. टन) उत्पादकता कु./हे.
2008 3200 20000 6.36
2009 34733 24942 7.18
2010 47491 42436 8.94
2011 35262 29663 8.41
2012 44000 35000 8.09
2013 45454 30240 6.65
2014 50984 34274 6.72

दलहनी फसलों मे मूंग की बहुमुखी भूमिका है। इससे पौष्टिक तत्व प्रोटीन प्राप्त होने के अलावा फली तोड़ने के बाद फसलों को भूमि में पलट देने से यह हरी खाद की पूर्ति भी करती है। प्रदेश के एटा अलीगढ़, देवरिया, इटावा, फर्रूखाबाद, मथुरा, ललितपुर, कानपुर देहात, हरदोई एवं गाजीपुर जनपद प्रमुख मूंग उत्पादन के रूप में उभरे है। अन्य जनपदों में भी इसकी संभावनायें है। निम्न बातों पर ध्यान देकर जायद में इनकी अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

भूमि एंव उसकी तैयारी

मूंग की खेती के लिए दोमट भूमि उपयुक्त रहती है। पलेवा करके दो जुताइयां करने से खेत तैयार हो जाता है। यदि नमी की कमी हो तो दोबारा पलेवा करके बुवाई की जाए। ट्रैक्टर, पावर टिलर रोटोवेटर या अन्य आधुनिक कृषि यंत्र से खेत की तैयारी शीघ्रता से की जा सकती है।

संस्तुत प्रजातियॉ

अच्छी उपज लेने के लिए कम समय में पककर तैयार होने वाली निम्न प्रजातियां उपयुक्त रहती है।

  प्रजाति विशेषता पकने की अवधि (दिन) उपज कु०⁄ हेक्टेयर कीट रोग ग्राहिता उपयोगिता उपयुक्त क्षेत्र
1 नरेन्द्र मूंग–1 दाना धूमिल 65-70 11-13 पीला मौजेक सम्पूर्ण उ०प्र०
2 मालवीय जाग्रति (एच०यू०एम-2) हरा दाना 65-70 12-15 सहिष्णु सम्पूर्ण उ०प्र०
3 सम्राट (पी०डी०एम-139) हरा चमकीला 60-65 9-10 पीला मौजेक अवरोधी सम्पूर्ण उ०प्र०
4 मूंग जनप्रिया (एच०यू०एम०–6) - 60-65 12-15 तदैव सम्पूर्ण उ०प्र०
5 मेहा (आई०पी०एम०-99-125) - 60-65 12-15 तदैव सम्पूर्ण उ०प्र०
6 पूसा विशाल बड़ा चमकीला 60-65 12-14 तदैव सम्पूर्ण उ०प्र०
7 एच०यू०एम०-16 - 60 11-12 तदैव सम्पूर्ण उ०प्र०
8 मालवीय ज्योति (एच०यू०एम०-1) - 65-70 14-16 तदैव सम्पूर्ण उ०प्र०
9 टी०एम०वी०-37 - 60-65 12-14 तदैव सम्पूर्ण उ०प्र०
10 मालवीय जन चेतना (एच०यू०एम-12) - 60-62 12-14 तदैव सम्पूर्ण उ०प्र०
11 आई०पी०एम०-2-3 - 65-70 10.0 तदैव सम्पूर्ण उ०प्र०
12 आई०पी०एम०-2-14 - 62-65 10-11 तदैव सम्पूर्ण उ०प्र०
13 के०एम०-2241 - 60-62 12-14 तदैव सम्पूर्ण उ०प्र०