कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

जैव उर्वरको की महत्ता

फास्फोटिका जैव उर्वरक

फास्फोटिका जैव उर्वरक भी स्वतंत्र-जीवी जीवाणु का ए नम चूर्ण रूप उत्पाद है। इससे भी एक ग्राम में लगभग 10 करोड़ जीवाणु होते हैं। यह जैव उर्वरक प्रयोग करने से मृदा में उपस्थित अघुलनशी फास्फोरस घुलनशील अवस्था में जीवाणुओं द्वारा बदल दी जाती है।

साधारणतया मृदा में भी उपरोक्त प्रकार के जीवाणु होते हैं, परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि मृदा में उपस्थित जीवाणु सूक्ष्म एवं असरकारक हों। अतः कल्चर के माध्यम से किसानों को असरकारक जीवित पदार्थ या जीवाणु उपलब्ध कराये जाते हैं।

फास्फोटिका जीवाणु के लाभ

  • फास्फोटिका जीवाणु खाद के प्रयोग करने से 10 से 20 प्रतिशत पैदावार में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ मिट्टी में उपलब्ध फास्फोरस की 30 से 50 प्रतिशत की बचत की जा सकती है।
  • जड़ों का विकास अधिक होता है, जिससे पौधा स्वस्थ बना रहता है।

सावधानियाँ

  • राइजोबियम जीवाणु फसल विशिष्ट होता है। अतः पैकेट पर लिखी फसल में ही प्रयोग करें।
  • जैव उर्वरक को धूप व गर्मी से दूर किसी सूखी एवं ठंडी जगह में रखें।
  • जैव उर्वरक या जैव उर्वरक उपचारित बीजों को किसी भी रसायन या रासायनिक खाद के साथ न मिलायें।
  • यदि बीजों पर फफूंदी नाशी का प्रयोग करना हो तो कार्बेन्डाजिम का प्रयोग करें, यदि तांबा युक्त रसायन का प्रयोग करना हो तो बीजों को पहले फफूंदी नाशी से उपचारित करें तथा फिर जैव उर्वरक की दुगुनी मात्रा से उपचारित करें।
  • जैव उर्वरक का प्रयोग पैकेट पर लिखी अन्तिम तिथि से पहले ही कर लेना चाहिए।

एजोटोबेक्टर/एजोस्पाइरिलम/फास्फेटिक, जैव उर्वरक की मात्रा एवं प्रयोग विधियाँ

क्रम. सं. प्रयोग विधि फसल जैवउर्वरक मात्रा/एकड़
1 बीजोपचार
आवश्यकतानुसार जैव उर्वरक की मात्रा को लगभग 1.5 लीटर पानी प्रति एकड़ बीज के ढ़ेर पर धीरे-धीरे डालकर हाथों से तब तक मिलायें जब तक कि जैव उर्वरक की बीजों पर समान रूप से परत न चढ़ जाये। उपचारित बीज को छाया में रखें अथवा तुरन्त बीजाई कर दें। गेहूं ज्वार 1 किग्रा.
मक्का, कपास 500ग्राम
सूरजमुखी, सरसो 200ग्राम
2 पौध जड़ उपचार
आवश्यकतानुसार जैव उर्वकर की मात्रा की 4 लीटर पानी प्रति 1 किलोग्राम के हिसाब से किसी चौड़े मुंह वाले बर्तन में घोल बनायें, इस घोल को पौधे की जड़ों को 2 से 3 मिनट तक डुबोकर पौध उपचार करें तथा फिर, उपचारित पौध की तुरंत खेत में रोपाई कर दें। धान मिर्च, टमाटर, गोभी, बैगन, प्याज आदि 1.5 किग्रा. सें 2 किलोग्राम
3 कन्द उपचार
आवश्यकतानुसार जैव उर्वरक की मात्रा को 15 ली० पानी प्रति 2 किग्रा० जैव उर्वरक के हिसाब से घोल बनाकर कन्द को 5 से 10 मिनट तक डुबोये रखें या जैव उर्वरक के घोल को कन्द पर समान रूप से छिड़काव करें तथा उपचारित कन्दों की तुरन्त बीजाई कर दें। फसलों के लिए (अर्थात् 6 माह से कम समय में पकने वाली) 2 किग्रा० 2.5 किग्रा०
4 मृदा उपचार
आवश्यकतानुसार जैव उर्वरक को 35 से 50 किग्रा० कम्पोस्ट खाद या भुरभुरी मिट्टी में मिश्रण बनाकर अन्तिम जुताई के समय अथवा फसल की पहली सिंचाई से पूर्व समान रूप से एक एकड़ खेत में छिड़क कर मिट्टी में मिला दें। लम्बी अवधि वाली फसलों के लिये (अर्थात् 6 माह से अधिक समय में पकने वाली) 1.5 किग्रा०
5 नील हरित शैवाल
धान में नीलहरित शैवाल जैव उर्वरक 12.5 किग्रा० प्रति हेक्टर रोपाई के एक सप्ताह बाद प्रयोग करें। इसका प्रयोग करते समय खेत में 3-4 सेमी० पानी अवश्य भरा रहना चाहिए यदि धान में किसी खरपतवार नाशी का प्रयोग किया है तो नील हरति शैवाल का प्रयोग खरपतवार नाशी के प्रयोग के 3-4 दिन बाद प्रयोग करें।