कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

एकीकृत पोषण तत्व प्रबन्धन

उर्वरकों की उपलब्धता के पूर्व प्रदेश में जैविक खादों के माध्यम से खेती होती थी परन्तु हरित क्रान्ति के उद्भव के साथ उर्वरकों का अंधाधुध प्रयोग शुरू हुऔ प्रथमतया तो नत्रजानिक उर्वरकों का प्रयोग हुआ पर धीरे-धीरे फास्फेटिक, पोटेशिक उर्वरकों के प्रयोग हुआ परन्तु पौधों के अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता के दृष्टिगत मिट्टी से प्राप्त किये जाने वाले अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता के दृष्टिगत मिट्टी से प्राप्त किये जाने वाले अन्य पोषक तत्व यथा मैगनीशियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कापर, मैगनीज, मालेब्डिनम, बोरान एवं क्लोरिन की सतत् कमी होती रही और पौधों को ये तत्व आवश्यकतानुसार उपलब्ध नहीं हो सके फलतः अधिकांश क्षेत्रों में उत्पादन में ठहराव आया और किंचित क्षेत्रों में उत्पादन में कमी भी आयी। मृदा के जीवांश में भी कमी आयी फलतः मृदा में भौतिक रसायनिक एवं जैविक क्रियाओं में इस प्रकार परिवर्तन हुआ। मृदा उर्वरता का संतुलन इस प्रकार किया जाय कि फसल की भूख के अनुसार उन्हें आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध होते रहे तथा सम्बन्धित फसल की वांछित उपज भी मिले और मृदा स्वास्थ्य सुरक्षित रहे। इसके लिए स्थलीय आवश्यकतानुसार अकार्बनिक एवं कार्बनिक स्त्रोतों को यथेष्ठ सम्मिश्रण अपरिहार्य है। इस तकनीकी को एकीकृत पोषक तत्व प्रबन्धन की संज्ञा दी गई है।

एकीकृत पोषक तत्व प्रबन्धन हेतु कुछ सुझाव

  • मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों एवं जैविक खादों का प्रयोग करें।
  • दलहनी फसलों में राइजोबियम कल्चर का प्रयोग अवश्य करें।
  • धान व गेहूँ के फसल चक्र में ढैंच की हरी खाद का प्रयोग करें।
  • फसल चक्र में परिवर्तन करें।
  • आवश्यकतानुसार उपलब्धता के आधार पर गोबर तथा कूड़े-करकट का प्रयोग कर कम्पोस्ट बनाई जाये।
  • खेत में फसलावशिष्ट जैविक पदार्थों को मिट्टी में मिला दिया जाये।
  • विभिन्न प्रकार के जैव उर्वरकों यथा नत्रजानिक सैंस्लेषी, फास्फेट को घुलनशील बनाने वाले बैक्टीरियल, अलगल तथा फंगल बायोफर्टिलाइजर का प्रयोग करें।

जैविक खादों एवं जैव उर्वरकों द्वारा उर्वरकों के समतुल्य पोषक तत्व

सामग्री निवेश की मात्रा उर्वरकों के रूप में पोषक तत्वों की समतुल्य मात्रा
(क).जैविक खादें फसल प्रति टन 3.6 किग्रा० नाइट्रोजन, फास्फोरस (पी०ओ०)+ पोटाश (के०ओ०) (2:1:1)
अवशेष गोबर की खाद
-ढैंचा की हरी खाद 45 दिन की फसल 50-60 किग्रा० नाइट्रोजन (बौनी जाति के धान में)
-गन्ने की खोई 5 टन प्रति हेक्टर 12 किग्रा० नाइट्रोजन प्रति टन
-धान का पुआल+जलकुम्भी 5 टन प्रति हेक्टर 2 किग्रा० नाइट्रोजन प्रति टन
(ख).जैव उर्वरक 9-22 किग्रा० नाइट्रोजन
राइजोबियम कल्चर
-एजोटोबैक्टर एवं कल्चर 20 किग्रा० नाइट्रोजन
एजोस्पाइरिलम
-नील हरित शैवाल

10 किग्रा० प्रति हेक्टर

20-30 किग्रा० नाइट्रोजन

-एजोला फर्म

6-21 टन प्रति हेक्टर

3-5 किग्रा० प्रति हेक्टर