कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

जायद में धान की खेती

7. खाद की मात्रा तथा खाद देने का समय

जायद में धान की खेती जलभराव वाले क्षेत्रों में ही होती है। धान की पौध लगाने के तुरन्त बाद पौधों की जड़े पोषक तत्व अवशोषित करने में असमर्थ रहती है। जिसके कारण पौधे लगने के बाद एक बार पौधों का हरा रंग कम हो जाता है। जायद धान के लिए 120 किग्रा. नत्रजन, 60 किग्रा. फास्फोरस एवं 60 किग्रा. पोटाश प्रति हे. तथा 25 किग्रा. जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर देनी चाहिए। धान के पौधों को लगाने के 1 हफ्ते बाद ही पौधे पोषक तत्व अवशोषित करने लगते हैं। इस बीच यदि नत्रजन बेसल ड्रसिंग के रूप में कुल मात्रा की आधी मात्रा दे दी जाये तो उर्वरकों का नुकसान लीचिग तथा अन्य कारणों से हो जाता है।

इसलिए उचित होगा कि नत्रजन की मात्रा को तीन भागों में बांटकर 1/3 भाग धान पौधों की रोपाई के 7 दिनों के बाद, 1/3 भाग कल्ले निकलने के समय तथा 1/3 भाग बलिया निकलने के समय देना उपयुक्त होगा। फास्फोरस, पोटाश तथा जिंक की पूरी मात्रा रोपाई के पहले मृदा में मिला देना चाहिए।

  एन. पी. के.  
मात्राः 120 60 60 किग्रा./हे.

8. सिंचाई

जायद में धान की खेती, पानी के लिए पूर्णतया सिंचाई पर ही निर्भर करती है तथा जायद का मौसम अत्यधिक गर्म, शुष्क एवं तेज पछुआ हवा के कारण पानी की आवश्यकता खरीफ की अपेक्षा और बढ़ा देता है। जायद में धान की सफल खेती के लिए सिंचाई की लगातार आवश्यकता पड़ती है, धान में बाली बनने से पहले सिंचाई, तीसरे–चौथे दिन तथा बाली बनने के समय से दाना भरने तक दूसरे–तीसरे दिन करना आवश्यक है। इस तरह धान की किस्म एवं भूमि के आधार पर आवश्यकता की जाय।

9. निराई एवं खर पतवार नियंन्त्रण

धान के खरपतवार नष्ट करने के लिए खुरपी या पैडीवीडर का प्रयोग करें। यह कार्य खरपतवार विनाशक रसायनों द्वार भी किया जा सकता है। रोपाई वाले धान में घास कुल एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण हेतु ब्यूटाक्लोर (50% ई.सी.) 3 से 4 लीटर अथवा प्रेटिलाक्लोर 50% ई.सी. 1.25 लीटर या एनिलोफास 30% ई.सी. 1.25 लीटर प्रति हे. का रोपाई के 3–7 दिन के अन्दर प्रयोग करना चाहिए। उक्त रसायनों का प्रयोग 3–4 सेमी. पानी में किया जाय। चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के नियंत्रण हेतु 2–4 डी सोडियम साल्ट 80% का मिश्रण का 625 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग किया जा सकता है। इसका प्रयोग धान की रोपाई एवं सीधी बुवाई के 20 दिन बाद करना चाहिए।

10. कटाई

जायद धान की कटाई पुष्पावस्था के 30 दिन के अन्दर करनी चाहिए। किस्म नरेन्द्र–118 तथा नरेन्द्र–97, पन्त धान–12, 115–120 दिन, साकेत–4, 115 दिन तथा बारानी दीप एवं शुष्क सम्राट 115–120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।

11. उपज

जायद में धान की उपज, खरीफ की तुलना में अच्छी होती है तथा रोग/कीट का प्रकोप भी कम होता है एवं दाने चमकीले/सुडौल होते हैं।